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General Science
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मानव शरीर में होने वाले ऑटोइम्यून (स्वप्रतिरक्षी) रोगों और उनके रोग-शारीरिक (Pathophysiological) तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'हाशीमोटो थायरॉयडाइटिस' (Hashimoto's thyroiditis) एक स्वप्रतिरक्षी विकार है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरोग्लोबुलिन और थायराइड पेरोक्साइड एंजाइम के विरुद्ध एंटीबॉडी का उत्पादन करती है, जिससे क्रोनिक लिम्फैटिक थायरॉयडाइटिस और अंततः हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) की स्थिति उत्पन्न होती है।
- 2. 'मायस्थेनिया ग्रेविस' (Myasthenia gravis) तंत्रिका-पेशी जंक्शन (Neuromuscular junction) को प्रभावित करने वाला एक विकार है, जिसमें एसिटylकोलाइन रिसेप्टर्स के विरुद्ध एंटीबॉडी उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे कंकाल पेशियों में संकुचन का संचरण बाधित होता है और गंभीर पेशीय थकान (Muscle fatigue) होती है।
- 3. 'रूमेटाइड आर्थराइटिस' (Rheumatoid arthritis) एक प्रणालीगत ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें मुख्य रूप से लिम्फोसाइट्स और मैक्रोफेज साइनोवियल झिल्ली पर आक्रमण करते हैं, और यह रोग केवल अस्थिसंधियों (Joints) तक सीमित रहता है, इसका रक्त वाहिकाओं, फेफड़ों या अन्य अंगों पर कोई प्रणालीगत प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि हाशीमोटो थायरॉयडाइटिस एक ऑटोइम्यून स्थिति है जहाँ प्रतिरक्षा प्रणाली थायराइड ग्रंथि पर हमला करती है। कथन 2 सही है क्योंकि मायस्थेनिया ग्रेविस में एसिटाइलकोलाइन रिसेप्टर्स अवरुद्ध या नष्ट हो जाते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि रूमेटाइड आर्थराइटिस केवल जोड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक प्रणालीगत (systemic) रोग है जो फेफड़ों, हृदय और रक्त वाहिकाओं जैसे अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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संक्रमण धातुओं, उनके यौगिकों और धातुकर्म (Metallurgy) प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कॉपर पाइराइट्स ($CuFeS_2$) अयस्क के सांद्रण के पश्चात प्रगलक (Smelting) प्रक्रिया के दौरान प्राप्त 'कॉपर मैट' (Copper matte) मुख्य रूप से $Cu_2S$ और $FeS$ का मिश्रण होता है, जिसे बेसीमेराइजेशन के दौरान सिलिका की उपस्थिति में ऑक्सीकृत करके फेरस सल्फाइड को फेरस सिलिकेट धातुमल ($FeSiO_3$) के रूप में अलग किया जाता है।
2. 'हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम' (Hall-Heroult process) द्वारा एल्युमिनियम के विद्युत अपघटनी निष्कर्षण में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूरोस्पार ($CaF_2$) के साथ घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट मुख्य रूप से विलायक के रूप में कार्य करके एलुमिना के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने में सहायक होता है।
3. संक्रमण धातुओं और उनके आयनों द्वारा रंगीन यौगिक बनाने का मुख्य कारण आंशिक रूप से भरे हुए d-कक्षक होते हैं, जिनमें d-d संक्रमण ($d-d$ transition) संभव होता है, किंतु जिंक आयन ($Zn^{2+}$) और स्कैंडियम आयन ($Sc^{3+}$) अपने पूर्णतः भरे हुए या रिक्त d-कक्षक के कारण रंगहीन (Colorless) होते हैं।
4. 'सफेद फॉस्फोरस' ($P_4$) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और वाष्पशील ठोस है जो अंधेरे में चमकता है (केमिलुमिनिसेंस) और इसे वायु में खुला छोड़ने पर यह स्वतः आग पकड़ लेता है, जबकि लाल फॉस्फोरस बहुलकीय संरचना के कारण कम क्रियाशील होता है और सामान्य ताप पर वायु में स्वतः प्रज्वलित नहीं होता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोनल नियंत्रण प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'सोमाटोस्टाटिन' (Somatostatin) हार्मोन अग्र पिट्सुरी ग्रंथि से ग्रोथ हार्मोन (Growth Hormone) के स्रावण को रोकता है, जबकि यह अग्नाशय की लैंगरहैंस द्वीपिकाओं की डेल्टा कोशिकाओं से इंसुलिन और ग्लूकागोन के स्रावण को भी नियंत्रित करता है।
2. एड्रिनल ग्रंथि का वल्कुट (Adrenal Cortex) भाग रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र के अंतर्गत 'एल्डोस्टेरोन' हार्मोन का स्रावण करता है, जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम और जल के पुनःअवशोषण को बढ़ाता है तथा पोटेशियम और हाइड्रोजन आयनों के उत्सर्जन को प्रेरित करता है।
3. पैराथायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'पैराथर्मोन' (PTH) एक हाइपरकैल्सेमिक हार्मोन है, जो रक्त में कैल्सियम के स्तर को बढ़ाने के लिए अस्थि के अवशोषण (Bone resorption) को प्रेरित करता है और वृक्क द्वारा कैल्सियम के पुन:अवशोषण को कम करता है।
4. पश्च पिट्सुरी (Neurohypophysis) ग्रंथि स्वयं किसी हार्मोन का संश्लेषण नहीं करती है, बल्कि यह हाइपोथैलेमस के न्यूरोसेक्रेटरी कोशिकाओं द्वारा उत्पादित 'ऑक्सीटोसिन' और 'वैसोप्रेसिन' (ADH) हार्मोन का भंडारण और मोचन करती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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केपलर के ग्रहों की गति के नियमों और उपग्रहों की कक्षीय गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केपलर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है कि केंद्रीय बलों के अंतर्गत गति करते हुए किसी ग्रह का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिससे ग्रह सूर्य के समीप होने पर अधिक चाल से गति करता है।
2. दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है।
3. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किमी होती है, और यह उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन दिशा के विपरीत पूर्व से पश्चिम की ओर अपनी कक्षा में परिक्रमण करता है।
4. किसी उपग्रह के भीतर स्थित अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण से मुक्त पतन की स्थिति में होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो भारी संक्रमण धातुओं (जैसे फेरिक ऑक्साइड) को अपचयित करके पिघली हुई अवस्था में धातु निष्कर्षण में सहायता करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता अत्यधिक उच्च होती है।
2. जब सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) को कास्टिक सोडा ($NaOH$) के सांद्र जलीय विलयन के साथ अक्रिय वातावरण में गर्म किया जाता है, तो यह असमानुपातन (Disproportionation) अभिक्रिया के माध्यम से फॉस्फीन गैस ($PH_3$) और सोडियम हाइपोफॉस्फाइट का निर्माण करता है।
3. उत्कृष्ट गैसों में केवल क्ज़ेनॉन (Xenon) ही कुछ निश्चित परिस्थितियों में फ्लोरीन और ऑक्सीजन के साथ स्थायी सहसंयोजक यौगिक जैसे $XeF_2$, $XeF_4$ और $XeO_3$ बनाता है, क्योंकि इसकी आयनन एन्थैल्पी का मान भारी आकार के कारण अपेक्षाकृत कम और ध्रुवण क्षमता उच्च होती है।
4. संक्षारण (Corrosion) के दौरान लोहे पर जंग लगने की विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया में, एनोड क्षेत्र पर लोहे का ऑक्सीकरण होकर $Fe^{2+}$ आयन बनते हैं, जबकि कैथोड क्षेत्र पर ऑक्सीजन का अपचयन होता है, और वायुमंडल में उपस्थित नमी तथा कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति इस पूरी प्रक्रिया को धीमा कर देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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