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General Science
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो भारी संक्रमण धातुओं (जैसे फेरिक ऑक्साइड) को अपचयित करके पिघली हुई अवस्था में धातु निष्कर्षण में सहायता करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता अत्यधिक उच्च होती है।
  2. 2. जब सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) को कास्टिक सोडा ($NaOH$) के सांद्र जलीय विलयन के साथ अक्रिय वातावरण में गर्म किया जाता है, तो यह असमानुपातन (Disproportionation) अभिक्रिया के माध्यम से फॉस्फीन गैस ($PH_3$) और सोडियम हाइपोफॉस्फाइट का निर्माण करता है।
  3. 3. उत्कृष्ट गैसों में केवल क्ज़ेनॉन (Xenon) ही कुछ निश्चित परिस्थितियों में फ्लोरीन और ऑक्सीजन के साथ स्थायी सहसंयोजक यौगिक जैसे $XeF_2$, $XeF_4$ और $XeO_3$ बनाता है, क्योंकि इसकी आयनन एन्थैल्पी का मान भारी आकार के कारण अपेक्षाकृत कम और ध्रुवण क्षमता उच्च होती है।
  4. 4. संक्षारण (Corrosion) के दौरान लोहे पर जंग लगने की विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया में, एनोड क्षेत्र पर लोहे का ऑक्सीकरण होकर $Fe^{2+}$ आयन बनते हैं, जबकि कैथोड क्षेत्र पर ऑक्सीजन का अपचयन होता है, और वायुमंडल में उपस्थित नमी तथा कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति इस पूरी प्रक्रिया को धीमा कर देती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: थर्माइट अभिक्रिया में एल्युमिनियम एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करता है जो फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) को पिघले हुए लोहे में अपचयित करता है। कथन 2 सही है: सफेद फॉस्फोरस का कास्टिक सोडा के साथ गर्म करने पर फॉस्फीन ($PH_3$) गैस बनती है, जो फॉस्फोरस की एक महत्वपूर्ण अभिक्रिया है। कथन 3 सही है: क्ज़ेनॉन के आकार और कम आयनन ऊर्जा के कारण यह फ्लोरीन और ऑक्सीजन के साथ आसानी से यौगिक बना लेता है। कथन 4 गलत है क्योंकि नमी और कार्बन डाइऑक्साइड (जो कार्बोनिक अम्ल बनाते हैं) लोहे पर जंग लगने की प्रक्रिया को धीमा नहीं बल्कि तीव्र करते हैं। धातु और अधातु के गुणों के बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
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