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General Science
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नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) और नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. नाभिकीय विखंडन में एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235) धीमे न्यूट्रॉन की बमबारी से लगभग समान आकार के हल्के नाभिकों में टूटता है, जिससे अपार ऊर्जा निकलती है क्योंकि उत्पादों का कुल द्रव्यमान प्रारंभिक द्रव्यमान से कम होता है (द्रव्यमान क्षति)।
  2. 2. परमाणु बम (Atomic Bomb) अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया पर आधारित होता है, जबकि हाइड्रोजन बम (Hydrogen Bomb) अनियंत्रित नाभिकीय संलयन अभिक्रिया का उपयोग करता है।
  3. 3. तारों (जैसे सूर्य) में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हाइड्रोजन के चार नाभिक मिलकर हीलियम के एक नाभिक का निर्माण करते हैं।
  4. 4. नियंत्रित नाभिकीय संलयन अभिक्रियाओं को प्रयोगशाला या ऊर्जा उत्पादन के लिए सफलतापर्ूवक बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से स्थापित किया जा चुका है और इससे किसी भी प्रकार के रेडियोएक्टिव कचरे की समस्या उत्पन्न नहीं होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। नाभिकीय विखंडन में भारी नाभिक न्यूट्रॉन के प्रहार से टूटता है और द्रव्यमान ऊर्जा में परिवर्तित होता है। परमाणु बम विखंडन पर तथा हाइड्रोजन बम संलयन पर आधारित होते हैं। सूर्य और तारों की ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन है। कथन 4 गलत है क्योंकि नियंत्रित नाभिकीय संलयन (Controlled Nuclear Fusion) को अभी तक व्यावसायिक पैमाने पर स्थिर ऊर्जा उत्पादन के लिए पूरी तरह से सफल रूप से स्थापित नहीं किया जा सका है (हालांकि टोकामक जैसे प्रयोग जारी हैं) और संलयन रिएक्टरों में भी कुछ मात्रा में न्यूट्रॉन विकिरण के कारण रेडियोएक्टिव कचरा उत्पन्न होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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