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General Science
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मानव शरीर में जैविक अणुओं, विशेष रूप से विटामिन और कार्बोहाइड्रेट के उपापचय (Metabolism) और उनके रासायनिक स्वरूप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जल-विलेय विटामिन (Vitamin B complex और C) शरीर में संचित नहीं होते हैं और मूत्र के माध्यम से उत्सर्जित हो जाते हैं, सिवाय विटामिन $B_{12}$ के, जो यकृत (Liver) में लंबी अवधि के लिए संग्रहित हो सकता है।
- 2. ग्लाइकोजन एक शाखित बहुलक (Branched polymer) है जो ग्लूकोज इकाइयों से बनता है, जिसमें मुख्य श्रृंखला $\alpha-1,4$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा और शाखाएँ $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, और यह मुख्य रूप से यकृत तथा कंकाल पेशियों में संचित होता है।
- 3. विटामिन D (कैल्सीफेरॉल) एक वसा-विलेय विटामिन है जो वास्तव में एक स्टेरॉयड हार्मोन अग्रदूत (Precursor) के रूप में कार्य करता है, और इसका सक्रिय रूप 'कैल्सीट्रियॉल' आंत से कैल्शियम और फॉस्फेट के अवशोषण को नियंत्रित करता है।
- 4. सेलूलोज़ पादप कोशिका भित्ति का एक प्रमुख घटक है, जो $\beta$-D-ग्लूकोज इकाइयों से बना एक शाखित पॉलिसैकराइड है, जिसे मानव पाचन तंत्र के एंजाइम (जैसे एमाइलेज) आसानी से पचा सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि सेलूलोज़ $\beta$-D-ग्लूकोज इकाइयों से बना एक **रेखीय (Unbranched)** पॉलिसैकराइड है, और मानव पाचन तंत्र में इसे पचाने वाले एंजाइम (सेल्युलेज) का अभाव होता है, इसलिए यह मानव के लिए पचनीय नहीं है। विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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विद्युत परिपथों, ओम के नियम और किर्चऑफ के नियमों (Kirchhoff's laws) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किर्चऑफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
2. किर्चऑफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन करता है, जो यह बताता है कि किसी बंद पाश (Closed loop) में सभी विद्युत वाहक बलों (emf) और प्रतिरोधों पर कुल विभव पतन का बीजगणितीय योग उस पाश में उपस्थित कुल धाराओं के गुणनफल के बराबर होता है।
3. जब समान प्रतिरोध वाले कई प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध बढ़ जाता है और प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है।
4. आंतरिक प्रतिरोध ($r$) वाले किसी विद्युत सेल का टर्मिनल विभवांतर ($V$) तब उसके विद्युत वाहक बल ($E$) से अधिक होता है जब सेल से कोई धारा ली जा रही हो (निरावेशन की स्थिति में)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और ऊष्मा स्थानांतरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का ही एक रूप है, जिसके अनुसार किसी निकाय को दी गई ऊष्मा उसकी आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन और निकाय द्वारा किए गए कार्य के योग के बराबर होती है।
2. कार्नोट इंजन (Carnot Engine) एक आदर्श ऊष्मा इंजन है जिसकी दक्षता तापमान पर निर्भर करती है, और यह ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के अनुसार 100% दक्षता प्राप्त कर सकता है यदि इसके सिंक का तापमान पूर्ण शून्य ($0\, K$) हो जाए।
3. स्टीफन-बोल्ट्ज़मैन नियम के अनुसार, किसी आदर्श कृष्णिका (Blackbody) द्वारा प्रति एकांक क्षेत्रफल से उत्सर्जित होने वाली कुल विकिरण ऊर्जा उसके ऊष्मागतिक तापमान की चतुर्थ घात के अनुक्रमानुपाती होती है।
4. न्यूटन का शीतलन नियम यह बताता है कि किसी वस्तु के ठंडे होने की दर वस्तु और उसके परिवेश के तापांतर के लगभग समान होती है, बशर्ते कि यह तापांतर बहुत अधिक न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हार्मोनल नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'सोमाटोसटेटिन' (Somatostatin) हार्मोन अग्र पीयूष ग्रंथि (Anterior pituitary gland) से वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) के स्राव को रोकता है।
2. एड्रेनल ग्रंथि का मेडुला भाग 'एपिनफ्राइन' और 'नॉरएपिनफ्राइन' हार्मोन का स्राव करता है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में 'फाइट-ऑर-फ्लाईट' (Fight-or-Flight) प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
3. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित कैल्सीटोनिन (Calcitonin) हार्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को बढ़ाता है, जबकि पैराथायराइड हार्मोन (PTH) रक्त में कैल्शियम के स्तर को घटाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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ऊष्मा और ऊष्मागतिकी के विभिन्न नियमों तथा तापमापी प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का एक विशेष रूप है, जिसके अनुसार किसी निकाय को दी जाने वाली ऊष्मा उसकी आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन और निकाय द्वारा किए गए कार्य के योग के बराबर होती है।
2. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic Process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का विनिमय शून्य होता है, जिसके कारण यदि किसी गैस का अचानक संपीडन किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है और ताप बढ़ जाता है।
3. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी विद्युत प्रतिरोध के तापमान के साथ रैखिक परिवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करती है और इसका उपयोग बहुत कम तापमान से लेकर उच्च तापमान तक के सटीक मापन के लिए किया जाता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
4. जल का त्रिक बिंदु (Triple Point of Water) वह विशिष्ट तापमान और दाब है जिस पर बर्फ, द्रव जल और जलवाष्प सह-अस्तित्व में तापीय साम्य में होते हैं, और केल्विन पैमाने पर इसका मानक मान 273.16 K होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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किस रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे कम होता है?
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