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General Science
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यदि पृथ्वी की घूर्णन गति बढ़ जाए तो भूमध्य रेखा पर g का मान क्या होगा?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
घूर्णन बढ़ने से अपकेंद्री बल बढ़ता है, जिससे g का मान घटता है।
Related Questions
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यांत्रिकी में ऊर्जा संरक्षण और संवेग संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी बंद निकाय (Closed system) पर यदि कोई बाह्य बल आघूर्ण (External torque) कार्य नहीं कर रहा हो, तो निकाय का कुल कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, भले ही निकाय के भीतर आंतरिक बलों के कारण उसके जड़त्व आघूर्ण में परिवर्तन हो रहा हो।
2. पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर (Perfectly elastic collision) में न केवल कुल रैखिक संवेग बल्कि कुल गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है, और इस प्रकार की टक्कर में वस्तुओं के बीच प्रत्यावस्थान गुणांक (Coefficient of restitution) का मान शून्य होता है।
3. जब कोई रॉकेट अंतरिक्ष में गति करता है, तो उसका द्रव्यमान लगातार कम होता जाता है और वह संवेग संरक्षण के सिद्धांत के आधार पर कार्य करता है, जिसमें उत्सर्जित गैसों का संवेग रॉकेट के संवेग परिवर्तन के बराबर और विपरीत होता है।
4. अप्रत्यास्थ टक्कर (Inelastic collision) के दौरान गतिज ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा, ध्वनि या विकृति ऊर्जा के रूप में क्षय हो जाता है, जिसके कारण टक्कर के बाद की कुल गतिज ऊर्जा टक्कर से पहले की कुल गतिज ऊर्जा से कम होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ताप?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative Properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम का सीधा परिणाम है जो केवल तनु विलयनों के लिए सत्य है।
2. वेंट-हॉफ कारक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए हमेशा एक से कम होता है जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप से वियोजित (Dissociation) या आयनित हो जाते हैं, क्योंकि आयनों की संख्या बढ़ने से अणुसंख्यक गुणधर्म का प्रेषित मान घट जाता है।
3. उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को परिवर्तित करके (सामान्यतः घटाकर) अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं, किंतु वे अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग को समान रूप से प्रभावित करते हैं जिससे साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant) का मान अपरिवर्तित रहता है।
4. जिओलाइट्स (Zeolites) त्रि-विमीय सिलिकेट नेटवर्क संरचना वाले सूक्ष्मछिद्रित उत्प्रेरक हैं जो 'आकार-वरण उत्प्रेरण' (Shape-selective Catalysis) प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि इनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता अभिकारकों और उत्पादों के अणुओं के आकार तथा छिद्रों के आकार पर निर्भर करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूकेरियोटिक कोशिका के विभिन्न अंगकों और उनके विशिष्ट कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) का खुरदरा भाग (RER) प्रोटीन संश्लेषण और उनके वलन (Folding) में सक्रिय रूप से भाग लेता है, जबकि चिकना भाग (SER) लिपिड, फॉस्फोलिपिड और स्टेरॉयड हार्मोन के संश्लेषण का मुख्य स्थल होता है।
2. गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus) का 'सिस' (Cis) सिस्टर्नी भाग आमतौर पर प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है जहाँ से स्रावी पुटिकाएं (Secretory vesicles) परिपक्व होकर बाहर निकलती हैं, जबकि 'ट्रांस' (Trans) भाग न्यूक्लियर एनवेलप की ओर स्थित होता है।
3. लिसोसोम (Lysosomes) में अम्लीय हाइड्रोलिसेस (जैसे लाइपेज, प्रोटीज, कार्बोहाइड्रेटेज) प्रचुर मात्रा में होते हैं जो pH 4.5 से 5.0 के बीच सर्वाधिक सक्रिय होते हैं, और इस अम्लीय वातावरण को बनाए रखने के लिए लिसोसोम झिल्ली पर प्रोटॉन पंप (H⁺-ATPases) सक्रिय रूप से कार्य करते हैं।
4. माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में साइट्रिक एसिड चक्र के एंजाइम उपस्थित होते हैं, तथा इसके आंतरिक झिल्ली पर ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण के माध्यम से एटीपी का उत्पादन होता है, जिसमें झिल्ली के बीच का अवकाश (Intermembrane space) प्रोटॉन प्रवणता के भंडारण का कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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नाभिकीय भौतिक और कण भौतिकी (Nuclear and Particle Physics) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. द्रव्यमान क्षति (Mass Defect) किसी नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान और उसके व्यक्तिगत प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों के विराम द्रव्यमानों के योग के बीच का अंतर होती है, जो आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता सिद्धांत के अनुसार 'बंधन ऊर्जा' (Binding Energy) के रूप में विमुक्त होती है।
2. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की प्रक्रिया मुख्य रूप से अत्यंत उच्च तापमान और दाब पर होती है क्योंकि समान धaves आवेश वाले दो नाभिकों के बीच के कूलम्बिक प्रतिकार बल (Coulombic repulsion) को पार करने के लिए पर्याप्त गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
3. बीटा-क्षय ($eta$-decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले पॉजिट्रॉन ($e^+$) और इलेक्ट्रॉन ($e^-$) वास्तव में दुर्बल नाभिकीय बल (Weak Nuclear Force) के माध्यम से एक न्यूट्रॉन के प्रोटॉन में या इसके विपरीत रूपांतरण का परिणाम होते हैं।
4. मंदक (Moderator) के रूप में प्रयुक्त होने वाले भारी जल ($D_2O$) या ग्रेफाइट का मुख्य कार्य नाभिकीय रिएक्टर में विखंडन के दौरान उत्पन्न तीव्र गति वाले न्यूट्रॉनों की गति को बढ़ाना होता है ताकि श्रृंखला अभिक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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