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General Science
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यदि पृथ्वी की घूर्णन गति बढ़ जाए तो भूमध्य रेखा पर g का मान क्या होगा?

Detailed Explanation

घूर्णन बढ़ने से अपकेंद्री बल बढ़ता है, जिससे g का मान घटता है।
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→ पदार्थ की अवस्थाओं और परमाणु संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. क्वांटम संख्याओं के निर्धारण में, दिगंशी क्वांटम संख्या (Azimuthal Quantum Number) उपकोश की आकृति (Shape) को दर्शाती है, जबकि चुंबकीय क्वांटम संख्या (Magnetic Quantum Number) अंतरिक्ष में कक्षक के त्रिविमीय अभिविन्यास (Orientation) को निर्धारित करती है। 2. प्लाज़्मा पदार्थ की एक ऐसी अवस्था है जिसमें गैस अत्यधिक आयनित अवस्था में होती है जिसमें उच्च ऊर्जावान मुक्त इलेक्ट्रॉन और धनात्मक आयन होते हैं, और यह ब्रह्मांड में प्राकृतिक रूप से सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली अवस्था है। 3. द्रव्यमान संख्या (Mass Number) हमेशा परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के ठीक दोगुनी होती है, क्योंकि किसी भी परमाणु के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या सदैव प्रोटॉनों की संख्या के पूर्णतः बराबर होती है। 4. पावली का अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion Principle) यह बताता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान कभी भी पूरी तरह समान नहीं हो सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रम के दौरान अयस्क को वायु की नियमित या सीमित आपूर्ति में उसके गलनांक से कम तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है। 2. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड जैसे भारी धातु ऑक्साइडों को अपचयित कर पिघली हुई अवस्था में धातु प्राप्त करने में सहायता करता है। 3. 'जोन परिष्करण' (Zone Refining) विधि का उपयोग मुख्य रूप से अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम) के अत्यधिक उच्च शुद्धिकरण के लिए किया जाता है, जो इस सिद्धांत पर आधारित है कि अशुद्धियाँ ठोस अवस्था की तुलना में गलित अवस्था (Molten state) में अधिक विलेय होती हैं। 4. सोडियम कार्बोनेट के निर्माण की 'सॉल्वे प्रक्रम' (Solvay Process) विधि में अमोनिया का पुनर्चक्रण किया जाता है, और इस प्रक्रिया में उपोत्पाद के रूप में कैल्शियम क्लोराइड ($CaCl_2$) प्राप्त होता है, जिससे अमोनिया की कोई बड़ी हानि नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → प्रकाशिकी और प्रकाशीय उपकरणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब एक द्वيفोकल (Bifocal) लेंस का उपयोग किया जाता है, तो निकट दृष्टि दोष (Myopia) के निवारण के लिए ऊपरी भाग में अवतल लेंस होता है और दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia) के लिए निचले भाग में उत्तल लेंस होता है। 2. सरल सूक्ष्मदर्शी (Simple microscope) द्वारा बनने वाला अंतिम प्रतिबिंब सामान्यतः आभासी, सीधा और आवर्धित होता है, जब वस्तु को लेंस के प्रकाशित केंद्र और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है। 3. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical telescope) की आवर्धन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्यक लेंस (Objective lens) की फोकस दूरी बड़ी और नेत्रिका (Eyepiece) की फोकस दूरी छोटी होनी चाहिए। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के आधार पर कार्य करने वाले प्रकाशीय तंतु (Optical fibers) में संकेत का संचरण प्रकाश की किरणों के बहु-परावर्तन के सिद्धांत पर आधारित होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) की विभिन्न सैद्धांतिक संकल्पनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लुईस (Lewis) संकल्पना के अनुसार, वे रासायनिक स्पीशीज जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) दान करने की क्षमता रखती हैं, 'लुईस क्षार' कहलाती हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाली स्पीशीज 'लुईस अम्ल' होती हैं। 2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल प्रकृति का होता है। 3. जब किसी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट - $CH_3COONa$) का जलीय अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त विलयन का pH मान 7 से कम होता है क्योंकि इसमें हाइड्रोजन आयनों की साधिकता होती है। 4. आरहेनियस की जल-आधारित संकल्पना निर्जलीय माध्यमों (Non-aqueous media) में अम्लों और क्षारों के व्यवहार की व्याख्या करने में असमर्थ है, क्योंकि यह केवल जलीय विलयनों में $H^+$ और $OH^-$ आयनों की उपस्थिति पर आधारित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → एड्स का कारण?
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