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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन को जोड़ने पर हमेशा ऊर्जा का निष्कासन होता है।
- 2. आवर्त सारणी में वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के कारण आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) के मान में सामान्यतः कमी आती है, किंतु संक्रमण तत्वों की तीसरी श्रेणी (5d) के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक ऊपर की दूसरी श्रेणी (4d) के तत्वों की तुलना में अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण लैंथेनाइड संकुचन के कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश में अत्यधिक वृद्धि है।
- 3. फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) पॉलिंग पैमाने पर संपूर्ण आवर्त सारणी में सर्वाधिक (4.0) होती है, लेकिन इसकी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि फ्लोरिन का आकार बहुत छोटा होता है।
- 4. किसी तत्व की धात्विक प्रकृति आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर घटती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति कम हो जाती है, जबकि वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक प्रकृति बढ़ती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है, क्योंकि सभी तत्वों की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान ऋणात्मक नहीं होता है। उदाहरण के लिए, उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) और कुछ अन्य तत्वों के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर ऊर्जा देनी पड़ती है, जिससे उनकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान धनात्मक होता है। कथन 2 सत्य है; लैंथेनाइड संकुचन के प्रभाव के कारण 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे उनकी आयनन एन्थैल्पी 4d श्रेणी के तत्वों से अधिक हो जाती है। कथन 3 असत्य है क्योंकि फ्लोरिन के छोटे आकार के कारण होने वाले अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक बल (Interelectronic repulsion) के कारण फ्लोरिन की प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन से कम (अर्थात क्लोरीन का अधिक ऋणात्मक होता है) होता है। कथन 4 पूर्णतः सत्य है, क्योंकि आवर्त सारणी के गुणों के अनुसार बाएं से दाएं जाने पर धात्विक गुण घटता है और नीचे जाने पर बढ़ता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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प्रकाश की कण प्रकृति?
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यूकेरियोटिक कोशिका चक्र के नियमन (Regulation of Cell Cycle) और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोशिका चक्र के विभिन्न चरणों (जैसे G1, S, G2 और M) के बीच सुचारू संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए 'साइक्लीन-डिपेंडेंट किनेसेस' (CDKs) और 'साइक्लीन' (Cyclins) प्रोटीन उत्तरदायी होते हैं, जिनमें सीडीके का स्तर पूरे चक्र के दौरान स्थिर रहता है जबकि साइक्लीन की सांद्रता आवधिक रूप से उतार-चढ़ाव करती है।
2. 'M-फेज प्रमोटिंग फैक्टर' (MPF) मुख्य रूप से साइक्लीन B और CDK1 का एक सक्रिय कॉम्प्लेक्स है, जो G2 प्रावस्था से समसूत्री विभाजन (Mitosis) में प्रवेश को प्रेरित करता है तथा केंद्रक झिल्ली के विखंडन और क्रोमोसोम संघनन को बढ़ावा देता है।
3. अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के पैचिटीन (Pachytene) चरण के दौरान, समझात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है, और यह प्रक्रिया 'रिकॉम्बिनैज' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
4. एनाफेज-प्रमोटिंग कॉम्प्लेक्स (APC/C) एक E3 यूबिक्विटिन लाइगेज है, जो मेटाफेज से एनाफेज में संक्रमण को नियंत्रित करता है, और इसके सक्रिय होने पर यह सिक्यूरिन प्रोटीन को विघटित कर देता है, जिससे सेपरेस (Separase) एंजाइम सक्रिय होकर सिस्टर क्रोमैटिड्स को अलग करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में जैविक अणुओं, पोषण, विटामिन और उनके सह-एंजाइम (Coenzyme) रूपों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B1 (थiamin) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थियामिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) है, जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान पाइरुवेट के एसिटाइल-CoA में ऑक्सीडेटिव विकार्बोक्सिलीकरण (Oxidative decarboxylation) के लिए आवश्यक होता है।
2. विटामिन B3 (नियासिन) का संश्लेषण मानव शरीर में आवश्यक अमीनो अम्ल 'ट्रिप्टोफैन' से हो सकता है, और इसके सक्रिय सह-एंजाइम रूप NAD+ तथा NADP+ कोशिकीय श्वसन में अपचयन-उपचयन (Redox) अभिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) शरीर में कोलेजन प्रोटीन के हाइड्रॉक्सीलेशन (Hydroxylation) के लिए आवश्यक प्रोलील और लिसिल हाइड्रॉक्सीलेज एंजाइम्स के लिए एक रिड्यूसिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है, जिसकी कमी से स्कर्वी रोग होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि ये पौधे मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) पूरी तरह अनुपस्थित होते हैं।
2. C4 पौधों में प्रकाश संश्लेषण की कार्यक्षमता C3 पौधों की तुलना में अधिक होती है क्योंकि इनमें प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, और कार्बन डाइऑक्साइड का प्राथमिक स्थिरीकरण मेसोफिल कोशिकाओं में फॉस्फोएनोलपाइरुवेट (PEP) कार्बोक्सिलेज एंजाइम द्वारा होता है।
3. जिब्रेलिन (Gibberellin) एक ऐसा पादप हार्मोन है जो आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में पर्व संधियों (Internodes) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके लंबाई बढ़ाता है, और यह बीजों में अल्फा-एमिलाइज एंजाइम के संश्लेषण को उत्तेजित कर सुषुप्तावस्था को भंग करता है।
4. एब्सिसिक एसिड (ABA) को 'तनाव हार्मोन' (Stress hormone) कहा जाता है, क्योंकि यह सूखे की स्थिति में रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है, जबकि साइटोकैनीन हार्मोन कोशिका विभाजन को रोकता है और पत्तियों में जीर्णता (Senescence) को त्वरित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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नाभिकीय संलयन के लिए आवश्यक न्यूनतम तापमान क्या है?
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