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General Science
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मानव रोगों और उनके संचरण या उपचार के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. ट्राइकोफाइटन (Trichophyton): यह एक कवक (Fungus) है जो मानव में 'दाद' (Ringworm) रोग का कारण बनता है, और इसके उपचार के लिए आमतौर पर एंटीफंगल दवाओं का उपयोग किया जाता है।
- 2. वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी (Wuchereria bancrofti): यह एक गोलकृमि (Nematode parasite) है जो फाइलेरिया या श्लीपद (Elephantiasis) का कारण बनता है, जिसका संचरण मुख्य रूप से मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से होता है।
- 3. प्लाज्मोडियम फाल्ciparum (Plasmodium falciparum): यह मलेरिया का सबसे गंभीर रूप पैदा करने वाला प्रोटोजोआ है, जिसके जीवन चक्र में मानव प्राथमिक परपोषी (Primary host) और मादा क्यूलैक्स मच्छर माध्यमिक परपोषी होता है।
- 4. लेइशमानिया डोनोवानी (Leishmania donovani): यह काला-जार (Kala-azar) का कारक जीव है, जो शरीर में मैक्रोफेज कोशिकाओं को संक्रमित करता है और इसका संचरण सिकफ्लाई (Sandfly / बालू मक्खी) द्वारा होता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
युग्म 1 सही है क्योंकि 'दाद' (Ringworm) मुख्य रूप से माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटन और एपिडर्मोफाइटन जैसे कवकों द्वारा होता है। युग्म 2 गलत है क्योंकि फाइलेरिया का संचरण मादा क्यूलैक्स मच्छर द्वारा होता है, न कि मादा एनोफेलीज द्वारा। युग्म 3 गलत है क्योंकि प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र में मनुष्य माध्यमिक (intermediate) परपोषी है जबकि मच्छर (मादा एनोफेलीज) प्राथमिक (definitive) परपोषी है जहाँ लैंगिक जनन होता है। युग्म 4 सही है क्योंकि काला-जार का कारक 'लेइशमानिया' है जिसका वेक्टर बालू मक्खी (Sandfly) है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर क्या होती है?
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मानव शरीर के विभिन्न जैविक तंत्रों की सूक्ष्म क्रियाप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. छोटी आंत के ड्यूओडेनम (Graahani) भाग में स्रावित होने वाला 'सिक्रेटिन' (Secretin) हार्मोन मुख्य रूप से अग्न्याशय को उद्दीप्त कर सोडियम बाइकार्बोनेट युक्त क्षारीय रस के स्रावण को प्रेरित करता है, ताकि आमाशय से आने वाले अम्लीय काइम को उदासीन किया जा सके।
2. मानव हृदय चक्र (Cardiac Cycle) के दौरान, निलय संकुचन (Ventricular systole) के आरंभ में जब निलय का दबाव आलिंद के दबाव से अधिक हो जाता है, तब एट्रियोवेंट्रिकुलर कपाट (जैसे द्विवलनी और त्रिवलनी) रक्त के पश्च-प्रवाह को रोकने के लिए बंद हो जाते हैं, जिससे पहली हृदय ध्वनि ('लब') उत्पन्न होती है।
3. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में सिनाप्टिक संचरण के दौरान, प्री-सिनाप्टिक न्यूरॉन के अंतर्ग्रथनी पुटिकाओं (Synaptic vesicles) से न्यूरोट्रांसमीटर का मोचन कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) के अंतःप्रवाह (Influx) के कारण होता है।
4. मानव श्वसन तंत्र के नियमन में, हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) की स्थिति में महाधमनी चाप (Aortic arch) और कैरोटिड धमनी में स्थित केंद्रीय केमोरेसेप्टर्स (Central chemoreceptors) अत्यधिक सक्रिय होकर श्वसन दर को तीव्र करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि उनके आयन स्थिरवैद्युत आकर्षण बलों द्वारा क्रिस्टल जालक में दृढ़ता से बंधे होते हैं, किंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में वे विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि आयन गति के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं।
2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकती हैं (अर्थात इलेक्ट्रॉन-न्यून), जबकि लुईस क्षार वे हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान कर सकती हैं, जैसे कि अमोनिया ($NH_3$)।
3. जब किसी दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) का उदासीनीकरण प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ किया जाता है, तो प्राप्त लवण का जलीय विलयन जलीय जल-अपघटन के कारण अम्लीय प्रकृति का होता है।
4. बफर विलयन वे विलयन होते हैं जो बाहरी मात्रा में प्रबल अम्ल या प्रबल क्षार मिलाने पर भी अपने pH मान में परिवर्तन का प्रभावी विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण एसिटिक अम्ल एवं सोडियम एसिटेट का मिश्रण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की सतह से छोड़े गए किसी उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_0$) और उसी कक्षा में परिक्रमण करने वाले उपग्रह की पलायन चाल ($v_e$) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उपग्रह की कक्षीय चाल उसकी पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर निर्भर करती है, और जैसे-जैसे उपग्रह की कक्षीय त्रिज्या बढ़ती है, उसकी कक्षीय चाल कम हो जाती है।
2. यदि किसी उपग्रह की कक्षीय चाल में अचानक $\sqrt{2}-1$ (या लगभग 41.4%) की आनुपातिक वृद्धि कर दी जाए, तो वह अपनी वृत्ताकार कक्षा को छोड़कर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकल जाएगा (पलायन कर जाएगा)।
3. पृथ्वी के बहुत निकट परिक्रमण कर रहे उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 11.2 किमी/सेकंड होती है, जबकि पृथ्वी की सतह से पलायन वेग का मान लगभग 7.9 किमी/सेकंड होता है।
4. दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हुए उपग्रह की चाल नियत नहीं रहती है, बल्कि जब उपग्रह पृथ्वी के निकटतम बिंदु (उपभू या Perigee) पर होता है, तब उसकी चाल अधिकतम होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाश के अपवर्तन-परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और उसका आपतन कोण माध्यम के क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश किरण दूसरे माध्यम में अपवर्तित होने के बजाय पूर्ण आंतरिक परावर्तित (Total Internal Reflected) होकर उसी माध्यम में लौट आती है।
2. उत्तल लेंस (Convex Lens) की फोकस दूरी लाल रंग के प्रकाश के लिए न्यूनतम और बैंगनी रंग के प्रकाश के लिए अधिकतम होती है, क्योंकि अपवर्तनांक बैंगनी रंग के लिए सबसे अधिक होता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु को अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र ($C$) और फोकस ($F$) के बीच रखा जाता है, तो उसका वास्तविक, उल्टा और वस्तु से बड़ा प्रतिबिंब वक्रता केंद्र के परे (बाहर) बनता है।
4. किसी पतले लेंस के लिए लेंस निर्माता का सूत्र (Lens Maker's Formula) $\frac{1}{f} = (n - 1)\left(\frac{1}{R_1} - \frac{1}{R_2}\right)$ इस बात पर निर्भर करता है कि लेंस को किस माध्यम में डुबोया गया है, किंतु लेंस के दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याएँ माध्यम से अप्रभावित रहती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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