त्वरित लिंक्स
General Science
39 views
विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राउल्ट का नियम (Raoult's Law) यह बताता है कि किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है, जो कि एक अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative property) है।
- 2. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों समान भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैस या सभी द्रव) में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होता है और अभिकारक गैस या द्रव अवस्था में होते हैं।
- 3. वान 'ट हॉफ गुणांक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए एक से अधिक होता है जो जलीय विलयन में वियोजित (Dissociation) हो जाते हैं (जैसे NaCl), जबकि संघनित (Association) होने वाले यौगिकों के लिए इसका मान एक से कम होता है।
- 4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme Catalysis) अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के होते हैं और उच्च तापमान पर उनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता बढ़ जाती है क्योंकि ऊष्मा मिलने से एंजाइम की त्रि-विमीय संरचना अधिक स्थिर हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि एंजाइम अत्यधिक संवेदनशील और विशिष्ट होते हैं; एक निश्चित इष्टतम (Optimum) तापमान के बाद उच्च तापमान पर एंजाइम की प्रोटीन संरचना विकृत (Denature) हो जाती है, जिससे उनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता समाप्त हो जाती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
धातुओं का राजा किसे कहा जाता है?
→
मानव शरीर में जैविक अणुओं और उनके चयापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B12 (कोबालामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जो यकृत (Liver) में कई वर्षों तक भंडारित रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की parietal कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'Intrinsic Factor' की अनिवार्यता होती है।
2. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids) वे अमीनो अम्ल हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर के भीतर पर्याप्त मात्रा में नहीं हो सकता, इसलिए इन्हें आहार के माध्यम से लेना आवश्यक होता है; उदाहरण के लिए, वैलीन, ल्यूसीन और टायरोसिन इसी श्रेणी में आते हैं।
3. ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें संचित ग्लाइकोजेन का ग्लूकोज-1-फास्फेट में विघटन होता है, और यह मुख्य रूप से यकृत और कंकाल पेशियों में इंसुलिन हार्मोन के नियंत्रण में संपन्न होती है।
4. सेलूलोज एक पादप-जनित पॉलीसेकेराइड है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ $eta$-1,4-ग्लूकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, और मानव शरीर में इसे पचाने के लिए आवश्यक 'सेल्युलेज' एंजाइम का पूर्ण अभाव होता है, जिससे यह आहार में फाइबर के रूप में कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली कार्ल लैंडस्टीनर द्वारा खोजी गई थी, जो लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद ग्लाइकोप्रोटीन या एंटीजन (एंटीजन A और एंटीजन B) की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर आधारित होती है, जबकि रक्त प्लाज्मा में इसके विपरीत प्राकृतिक एंटीबॉडी (एंटी-A और एंटी-B) पाए जाते हैं।
2. 'Rh कारक' (रhesus factor) का नामकरण रीसस बंदर के नाम पर किया गया था, और जिस व्यक्ति के रक्त में Rh एंटीजन (D एंटीजन) उपस्थित होता है उसे Rh-धनात्मक (Rh+) कहा जाता है, तथा Rh-ऋणात्मक (Rh-) माता और Rh-धनात्मक गर्भ के बीच प्रतिरक्षात्मक असंगति के कारण होने वाली स्थिति को 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस' (Erythroblastosis fetalis) कहते हैं।
3. सार्वत्रिक दाता (Universal Donor) 'O' रक्त समूह वाले व्यक्ति होते हैं क्योंकि उनकी लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर कोई भी एंटीजन (A या B) नहीं होता है, जिससे प्राप्तकर्ता के शरीर में कोई प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया नहीं होती है, बशर्ते Rh कारक का भी उचित मिलान किया गया हो।
4. रक्त स्कंदन (Blood coagulation) की कैसकेड प्रक्रिया के दौरान, निष्क्रिय प्रोथ्रॉम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलने के लिए 'थ्रॉम्बोप्लास्टिन' और कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और यह प्रक्रिया यकृत द्वारा स्रावित 'हेपरिन' नामक प्राकृतिक थक्कारोधी (anticoagulant) द्वारा आंतरिक रूप से प्रेरित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भौतिक राशियों के मापन और विमीय विश्लेषण (Dimensional Analysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्लांक स्थिरांक ($h$) और कोणीय संवेग (Angular Momentum) की विmaier (Dimensions) आपस में पूर्णतः समान होती हैं, तथा दोनों का विमीय सूत्र $[ML^2T^{-1}]$ होता है।
2. 'प्रत्यास्थता गुणांक' (Modulus of Elasticity) और 'दाब' (Pressure) दोनों की विमाएँ समान होती हैं, क्योंकि दोनों को प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है।
3. सार्वत्रिक गैस स्थिरांक ($R$) की विमा और 'ऊष्मीय धारिता' (Heat Capacity) की विमा समान होती है, क्योंकि दोनों ऊर्जा और तापमान के अनुपात को निरूपित करती हैं।
4. पृष्ठ तनाव (Surface Tension) और बल नियतांक (Spring Constant) दोनों का विमीय सूत्र $[MT^{-2}]$ होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
रासायनिक बंधन, समस्थानिक प्रभाव और अम्ल-क्षार साम्यावस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी अम्ल की प्रबलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका संयुग्मी क्षार कितना स्थायी है; अतः यदि किसी अम्ल के वियोजन में जुड़े बंध के निर्माण में शामिल परमाणुओं के आकार में वृद्धि होती है या विद्युत ऋणात्मकता अधिक होती है, तो बंध की लंबाई और उसकी वियोजन ऊर्जा में परिवर्तन के कारण अम्ल की सामर्थ्य बढ़ जाती है।
2. भारी हाइड्रोजन (ड्यूटीरियम, D) युक्त अम्लों (जैसे DCl) का आबंध वियोजन समस्थानिक प्रभाव (Isotope Effect) के कारण सामान्य हाइड्रोजन अम्ल (HCl) की तुलना में अधिक होता है, जिसके परिणामस्वरूप ड्यूटीरियम युक्त अम्ल जलीय विलयन में अधिक तीव्रता से और पूर्ण रूप से वियोजित होते हैं।
3. 'कठिन-मृदु अम्ल-क्षार' (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, एक कठोर अम्ल (Hard Acid) छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश घनत्व और कम ध्रुवणीयता वाले धनायनों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जो प्राथमिकता से कठोर क्षारों (Hard Bases) के साथ मजबूत और स्थिर आयनिक या उपसहसंयोजक बंध बनाते हैं।
4. बहुप्रोटिक अम्लों (जैसे ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल, $H_3PO_4$) के क्रमिक वियोजन स्थिरांकों ($K_{a1}, K_{a2}, K_{a3}$) का मान उत्तरोत्तर घटता जाता है, जिसका मुख्य कारण यह है कि ऋणावेशित आयन से धनात्मक प्रोटॉन को अलग करना अधिक कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.