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General Science
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आवर्त सारणी (Periodic Table) के तत्वों के आवर्ती गुणों और उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लैंथेनाइड आकुंचन (Lanthanide Contraction) के कारण, आवर्त सारणी में छठे आवर्त के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण पाँचवें आवर्त के उनके समरूपी तत्वों (जैसे Zirconium) के लगभग समान हो जाते हैं।
  2. 2. 'विकर्ण संबंध' (Diagonal Relationship) मुख्य रूप से द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे लिथियम, बेरिलियम, बोरॉन) और तृतीय आवर्त के ठीक उनके विकर्णतः नीचे स्थित तत्वों (जैसे मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, सिलिकॉन) के बीच समानता को दर्शाता है, जिसका मुख्य कारण उनकी लगभग समान आयनिक त्रिज्या और ध्रुवण क्षमता है।
  3. 3. संक्रमण धातुओं (d-ब्लॉक तत्वों) के अधिकांश यौगिक रंगीन होते हैं, जिसका मुख्य कारण 'd-d संक्रमण' होता है, जिसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों द्वारा दृश्य प्रकाश क्षेत्र से ऊर्जा का अवशोषण करके उच्च ऊर्जा स्तर में जाना शामिल है।
  4. 4. किसी परमाणु की 'विद्युत ऋणात्मकता' (Electronegativity) एक स्थिर भौतिक राशि है जो केवल उस तत्व के परमाणु क्रमांक पर निर्भर करती है, और एक ही तत्व के विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं वाले आयनों के लिए इसका मान सदैव समान रहता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। लैंथेनाइड आकुंचन के कारण 4f कक्षकों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) से 5d और 6d श्रेणी के तत्वों (जैसे Hf और Zr) के आकार लगभग समान हो जाते हैं। विकर्ण संबंध द्वितीय और तृतीय आवर्त के तत्वों के बीच उनके आवेश-त्रिज्या अनुपात (Charge/Radius ratio) की समानता के कारण होता है। d-ब्लॉक तत्वों के यौगिकों में d-d संक्रमण के कारण रंग प्रदर्शित होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि विद्युत ऋणात्मकता कोई स्थिर राशि नहीं है; यह संकरण अवस्था और परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था के साथ बदलती रहती है (उदाहरण के लिए, उच्च ऑक्सीकरण अवस्था वाले परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता अधिक होती है)। आवर्त सारणी की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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