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General Science
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मानव शरीर में पोषण और उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. विटामिन B3 (नियासिन या निकोटिनिक अम्ल) का पूर्वगामी अमीनो अम्ल 'ट्रिप्टोफैन' है, जिसकी पर्याप्त मात्रा होने पर मानव यकृत में ट्रिप्टोफैन से नियासिन का संश्लेषण हो सकता है, और इसकी गंभीर कमी से 'पेलॅग्रा' (Pellagra) रोग होता है जिसे 'चार D' (डर्मेटाइटिस, डायरिया, डिमेंशिया और डेथ) लक्षणों से पहचाना जाता है।
  2. 2. ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें यकृत और पेशियों में संचित ग्लाइकोजन का जलअपघटन होकर ग्लूकोज-1-फास्फेट बनता है, जिसे प्रेरित करने का मुख्य कार्य इंसुलिन हॉर्मोन का होता है।
  3. 3. रेशेदार प्रोटीन (Fibrous proteins), जैसे कि किरेटिन और कोलेजन, जल में अघुलनशील होते हैं और इनकी polypeptide श्रृंखलाएँ हाइड्रोजन बंध तथा डिस्ल्फ़ाइड बंधों द्वारा एक मजबूत तंतुवत संरचना बनाती हैं, जो शरीर में संरक्षणात्मक और संरचनात्मक भूमिका निभाती हैं।
  4. 4. विटामिन K (फाइलोक्विнон) एक वसा-विलेय विटामिन है जो यकृत में प्रोथ्रॉम्बिन और अन्य रक्त का थक्का जमाने वाले कारकों के संश्लेषण के लिए कार्बोक्सिलेशन प्रक्रिया में एक आवश्यक सह-कारक (Cofactor) के रूप में कार्य करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि विटामिन B3 (नियासिन) का संश्लेषण मानव शरीर में आवश्यक अमीनो अम्ल ट्रिप्टोफैन से हो सकता है, और इसकी कमी से पेलॅग्रा रोग होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि ग्लाइकोजेनोलिसिस को प्रेरित करने का मुख्य कार्य 'ग्लुकैगोन' और 'एड्रिनलीन' हॉर्मोनों का होता है, जबकि इंसुलिन इसका उल्टा यानी ग्लाइकोजेनेसिस (ग्लูकोज से ग्लाइकोजन निर्माण) को प्रेरित करता है। कथन 3 सही है क्योंकि किरेटिन और कोलेजन जैसे रेशेदार प्रोटीन जल में अघुलनशील होते हैं और मजबूत संरचनात्मक तंतु बनाते हैं। कथन 4 सही है क्योंकि विटामिन K रक्त का थक्का जमाने वाले कारकों (जैसे प्रोथ्रॉम्बिन) के संश्लेषण और उनके गामा-कार्बोक्सिलेशन के लिए आवश्यक होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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