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General Science
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प्रकाशिकी में लेंसों और दर्पणों के परावर्तन तथा अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी उत्तल दर्पण (Convex mirror) की फोकस दूरी धनात्मक होती है और यह हमेशा वस्तु की स्थिति चाहे जो भी हो, एक आभासी, सीधी और छोटी छवि बनाता है, जिसका उपयोग वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में किया जाता है क्योंकि इसका दृष्टि क्षेत्र (Field of view) विस्तृत होता है।
- 2. जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और उसका आपतन कोण माध्यम के क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण का अपवर्तन होने के बजाय वह उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहा जाता है।
- 3. जल में डूबे हुए एक वायु के बुलबुले का व्यवहार उत्तल लेंस की तरह होता है क्योंकि प्रकाश की किरणें विरल माध्यम (वायु) से सघन माध्यम (जल) में जाती हैं, जिससे किरणें अभिसरित हो जाती हैं।
- 4. एक समतल दर्पण की आवर्धन क्षमता (Magnification) का मान हमेशा +1 होता है, जिसका अर्थ है कि इसके द्वारा बनने वाली छवि का आकार वस्तु के आकार के बराबर और हमेशा सीधी होती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि उत्तल दर्पण का फोकस दर्पण के पीछे होता है, इसलिए इसकी फोकस दूरी धनात्मक ली जाती है और यह सदैव आभासी, सीधा एवं छोटा प्रतिबिंब बनाता है। इसका दृष्टि क्षेत्र अधिक होने के कारण वाहन चालकों द्वारा पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में इसका व्यापक उपयोग होता है। कथन 2 सही है क्योंकि जब प्रकाश किरण सघन से विरल माध्यम में जाती है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होता है, तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि जल के अंदर वायु का बुलबुला अवतल लेंस (अपसारी लेंस) की तरह व्यवहार करता है, न कि उत्तल लेंस की तरह, क्योंकि इसके किनारे पतले और बीच का भाग मोटा होता है, लेकिन माध्यमों के अपवर्तनांक के विपरीत व्यवहार के कारण यह किरणों को अपसारित (diverge) करता है। कथन 4 सही है क्योंकि समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है और यह हमेशा आभासी व सीधा होता है, जिससे इसका रेखीय आवर्धन +1 होता है। प्रकाशिकी के इन सिद्धांतों का विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में उपलब्ध है।
Related Questions
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यूकेरियोटिक कोशिका के कोशिकांगों (Organelles) और उनके कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माइटोकॉन्ड्रिया के आंतरिक झिल्ली पर पाए जाने वाले 'ऑक्सिसोम' (F0-F1 कण) ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण के दौरान एटीपी (ATP) के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं, और माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र से जुड़े एंजाइम प्रचुर मात्रा में उपस्थित होते हैं।
2. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) का 'सिस्टर्नी' (Cisternae) नेटवर्क ध्रुवीय रूप से व्यवस्थित होता है, जिसमें 'सिस' (Cis) सिरा निर्माणकारी (Forming) या अभिमुखी सिरा होता है जो अंतःद्रव्य जालिका (ER) की ओर होता है, जबकि 'ट्रांस' (Trans) सिरा परिपक्व (Maturing) सिरा होता है।
3. लाइसोसोम में उपस्थित 'हाइड्रोलिटिक एंजाइम' (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज, कार्बोहाइड्रेज) अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, और इस अनुकूलित pH को बनाए रखने के लिए लाइसोसोम झिल्ली पर सक्रिय प्रोटॉन पंप ($H^+$ ATPase) कार्य करते हैं।
4. परऑक्सिसोम (Peroxisomes) एकहरे झिल्ली से घिरे कोशिकांग हैं जो पादपों और जंतुओं दोनों में पाए जाते हैं, और इनमें उपस्थित 'कैटालेज' एंजाइम हाइड्रोजन पेरोक्साइड ($H_2O_2$) को जल और ऑक्सीजन में विघटित करके कोशिकाओं को विषैले प्रभावों से बचाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अवगाद्रो संख्या?
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पानी का सूत्र?
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र के नियामक एवं क्रियात्मक तंत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. छोटी आंत की श्लेष्मला (Mucosa) द्वारा स्रावित 'एंटेरोकाइनेज' (Enterokinase) एंजाइम अग्नाशयी रस के निष्क्रिय 'ट्रिप्सिनोजेन' को सक्रिय 'ट्रिप्सिन' में परिवर्तित करता है, जो आगे चलकर अन्य प्रोटीएज एंजाइमों को सक्रिय करता है।
2. विश्राम की अवस्था में सामान्य वयस्क मनुष्य द्वारा प्रति मिनट अंतःश्वसित या उच्च्वसित वायु की कुल मात्रा 'ज्वारीय आयतन' (Tidal Volume) कहलाती है, जिसका मान लगभग 6000 से 8000 मिलीलीटर प्रति मिनट होता है।
3. मानव हृदय के संकुचन के दौरान उत्पन्न होने वाले विद्युत विभवांतर को दर्शाने वाले 'इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम' (ECG) में QRS कॉम्प्लेक्स निलय के ध्रुवण (Ventricular depolarization) को निरूपित करता है, जो निलय के संकुचन की शुरुआत का प्रतीक है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम, एंट्रॉपी (Entropy) और विभिन्न तापमापी पैमानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम स्पष्ट करता है कि किसी भी स्वतः स्फूर्त (Spontaneous) प्रक्रम में ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी हमेशा बढ़ती है, और आदर्श रूप से उत्क्रमणीय (Reversible) प्रक्रम में कुल एंट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है।
2. केल्विन ताप पैमाने पर तापमान की परिभाषा ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम पर आधारित होती है, और इस पैमाने पर किसी वस्तु का ऋणात्मक तापमान संभव है क्योंकि कार्नोट इंजन की दक्षता 100% से अधिक हो सकती है।
3. जब किसी गैस का रुद्धोष्म (Adiabatic) स्वतंत्र प्रसार (Free expansion) निर्वात में किया जाता है, तो गैस द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता और न ही कोई ऊष्मा बाहर से दी जाती है, किंतु इस अप्रतिवर्ती प्रक्रम के कारण गैस की एंट्रॉपी में वृद्धि होती है।
4. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी और गैस तापमापी दोनों ही तापमान मापन के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिसमें स्थिर आयतन गैस तापमापी को उसके अत्यधिक व्यापक कार्यक्षेत्र और उच्च यथार्थता के कारण प्राथमिक मानक तापमापी माना जाता है, जिसका विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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