त्वरित लिंक्स
General Science
25 views
धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा उनके औद्योगिक अनुप्रयोगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और दीप्तिमान (Phosphorescent) ठोस होता है, जो पानी में अघुलनशील होने के कारण जल के अंदर संग्रहित किया जाता है, तथा यह कास्टिक सोडा ($NaOH$) के साथ गर्म करने पर जहरीली फॉस्फीन ($PH_3$) गैस उत्पन्न करता है।
- 2. 'कांस्य' (Bronze) तांबे और टिन की एक मिश्रधातु है, जबकि 'पीतल' (Brass) तांबे और जस्ते (Zinc) की मिश्रधातु है, जिसमें जस्ते की उपस्थिति पीतल को संक्षारण-प्रतिरोधी बनाती है, किंतु कांस्य की तुलना में पीतल में तन्यता (Ductility) कम होती है।
- 3. 'सिंदूर' (Vermilion या Red Lead) का रासायनिक नाम लेड टेट्राक्साइड ($Pb_3O_4$) है, जिसका उपयोग पारंपरिक रूप से लाल रंग के पेंट पिगमेंट और बैटरी निर्माण में किया जाता है।
- 4. जब सिलिकॉन डाइऑक्साइड ($SiO_2$) को सोडियम कार्बोनेट के साथ उच्च तापमान पर पिघलाया जाता है, तो सोडियम सिलिकेट बनता है, जिसे 'जल कांच' (Water Glass) कहा जाता है, और यह जल में आसानी से घुलकर एक क्षारीय विलयन बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त कथनों में से कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 असत्य है। रासायनिक रूप से, 'सिंदूर' या ट्रेडिशनल वर्मिलियन मुख्य रूप से मर्क्युरिक सल्फाइड ($HgS$) होता है, जबकि लेड टेट्राक्साइड ($Pb_3O_4$) को 'रेड लेड' या सिंदूरी कहा जाता है, किंतु औषधीय और पारंपरिक दृष्टिकोण से दोनों में रासायनिक भिन्नता है। सफेद फॉस्फोरस अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण जल में सुरक्षित रखा जाता है और कास्टिक सोडा के साथ अभिक्रिया कर फॉस्फीन गैस देता है। कांस्य और पीतल की मिश्रधातु संरचनाएं तथा जल कांच का निर्माण सही हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) की अवधारणाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आयनिक बंध (Ionic bond) का निर्माण दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की पूर्ण स्थानांतरण प्रक्रिया द्वारा होता है, और जालक एंथैल्पी (Lattice enthalpy) का उच्च मान आयनिक यौगिक के स्थायित्व को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, जबकि ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार अम्ल वे पदार्थ हैं जो प्रोटॉन ($H^+$) दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
3. जब किसी प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार से बने लवण (जैसे अमोनियम क्लोराइड - $NH_4Cl$) का जल अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति क्षारीय होती है और इसका pH मान 7 से अधिक होता है।
4. जल का स्व-आयनन (Self-ionization) एक ऊष्माशोषी प्रक्रम है, जिसके कारण तापमान में वृद्धि होने पर जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) बढ़ जाता है, किंतु शुद्ध जल का pH मान 7 से कम हो जाने के बावजूद वह उदासीन ही रहता है क्योंकि उसमें $[H^+]$ और $[OH^-]$ की सांद्रता समान होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हెరॉल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूऑर्स्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट मुख्य रूप से एलुमिना के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने का कार्य करता है।
2. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और विषैला होता है, जो अंधेरे में दीप्ति (Phosphorescence) उत्पन्न करता है, और इसे हवा में स्वतः जलने से रोकने के लिए पानी के नीचे रखा जाता है, जबकि लाल फॉस्फोरस बहुलकित संरचना के कारण सामान्य ताप पर जल में अघुलनशील और कम सक्रिय होता है।
3. संक्रमण धातुओं के यौगिकों द्वारा रंग प्रदर्शित करने का मुख्य कारण उनके 'd-d संक्रमण' (d-d transition) या 'चार्ज ट्रांसफर स्पेक्ट्रा' का होना है, जिसमें अपूर्ण रूप से भरे d-कक्षकों के बीच इलेक्ट्रॉनों का उत्तेजन दृश्य प्रकाश क्षेत्र के अवशोषण से होता है।
4. सोडियम कार्बोनेट (वाशिंग सोडा) का उत्पादन 'सॉलवे प्रक्रम' (Solvay process) द्वारा किया जाता है, जिसमें मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है, और इस प्रक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि अमोनिया को पुनर्प्राप्त (Recovered) करने के लिए इसमें अमोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया बुझे हुए चूने ($Ca(OH)_2$) के साथ कराई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
→
संक्रमण धातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक व्यवहार, समन्वय यौगिकों (Coordination Compounds) तथा धातु निष्कर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite Process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग अपचायक (Reducing agent) के रूप में किया जाता है, जो भारी धातु ऑक्साइडों (जैसे फेरिक ऑक्साइड) को अपचयित करके पिघली हुई अवस्था में धातु प्राप्त करने में सहायता करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता अत्यधिक उच्च होती है।
2. संक्रमण धातुओं के आयन जलीय विलयन में सामान्यतः रंगीन होते हैं, जिसका मुख्य कारण d-d संक्रमण (d-d transition) है, जिसमें अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन दृश्य प्रकाश के फोटॉन को अवशोषित कर एक कक्षक से दूसरे कक्षक में उत्तेजित होते हैं।
3. जब कॉपर पाइराइट्स ($CuFeS_2$) का भूनन (Roasting) किया जाता है, तो यह क्यूप्रस सल्फाइड और फेरस सल्फाइड के मिश्रण में बदल जाता है, और प्रगलित (Smelting) प्रक्रिया के दौरान सिलिका ($SiO_2$) मिलाकर 'धातु मल' (Slag) के रूप में $FeSiO_3$ को अलग किया जाता है।
4. जिंक ब्लेड ($ZnS$) अयस्क के सांद्रण के लिए 'फेन प्लवन विधि' (Froth Flotation Process) का उपयोग किया जाता है, जिसमें चीड़ का तेल (Pine oil) और सोडियम एथिल जैन्थेट का उपयोग ग्राही (Collector) के रूप में किया जाता है, और इस प्रक्रम की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत ($\Delta x \cdot \Delta p \ge \frac{h}{4\pi}$) यह प्रतिपादित करता है कि किसी गतिमान सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ अत्यंत यथार्थता से निर्धारण करना असंभव है।
2. पाउلي का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's exclusion principle) यह बताता है कि किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m_s, m$) का मान कभी भी सर्वसम नहीं हो सकता है, अर्थात् एक ही कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन विपरीत चक्रण (Spin) के साथ रह सकते हैं।
3. हुंड का अधिकतम बहुकता नियम (Hund's rule of maximum multiplicity) यह निर्देश देता है कि किसी उपकोश (Subshell) के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता, जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समानांतर चक्रण के साथ प्रवेश नहीं कर जाता।
4. मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) कक्षक के आकार और ऊर्जा को निर्धारित करती है, जबकि दिगंशी या azimuthal क्वांटम संख्या ($l$) कक्षक के त्रिविमीय अभिविन्यास (Orientation) को दर्शाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सूक्ष्मदर्शी?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.