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General Science
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की शारीरिक क्रिया विज्ञान (Physiology) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. क्षुद्रांत्र (Small intestine) के श्लेष्मल स्तर (Mucosa) से स्रावित होने वाला 'एंटेरोकाइनेज' (Enterokinase) एंजाइम अग्नाशयी रस में उपस्थित निष्क्रिय 'ट्रिप्सिनोजेन' को सक्रिय 'ट्रिप्सिन' में परिवर्तित करता है, जो प्रोटीन पाचन के लिए अनिवार्य है।
  2. 2. कशेरुकियों में श्वसन गैसों के परिवहन के दौरान, जब रक्त ऊतकों से फेफड़ों की ओर बढ़ता है, तो हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता (Affinity) बढ़ जाती है क्योंकि उच्च $CO_2$ सांद्रता और कम $pH$ का प्रभाव 'बोर प्रभाव' (Bohr effect) के रूप में कार्य करता है।
  3. 3. मानव हृदय के समेकित संचालन में, 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) को 'पेसमेकर' कहा जाता है क्योंकि यह स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करने की क्षमता रखता है, जबकि 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) आवेगों के संचरण में विलंब उत्पन्न करता है जिससे आलिंद और निलय का संकुचन क्रमिक रूप से हो सके।
  4. 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में माइलिन आच्छद (Myelin sheath) का निर्माण परिधीय तंत्रिका तंत्र में 'शवान कोशिकाओं' (Schwann cells) द्वारा और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में 'ओलिगोडेंड्रोसाइट्स' (Oligodendrocytes) द्वारा किया जाता है, जो नमक-मेड़ संचरण (Saltatory conduction) के माध्यम से आवेगों की गति को तीव्र करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि क्षुद्रांत्र के श्लेष्मल स्तर से स्रावित एंटेरोकाइनेज (या एंटरोपेप्टिडेज) निष्क्रिय ट्रिप्सिनोजेन को सक्रिय ट्रिप्सिन में बदलता है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'बोर प्रभाव' (Bohr effect) के अनुसार, ऊतकों में उच्च $CO_2$ सांद्रता, उच्च $H^+$ आयन सांद्रता (कम pH) और उच्च तापमान के कारण हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता घट जाती है, जिससे ऊतकों में ऑक्सीजन आसानी से विमोचित होती है, न कि बढ़ती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है। कथन 3 सही है; SA Node प्राकृतिक पेसमेकर है और AV Node आवेगों को थोड़ा विलंब प्रदान करता है ताकि आलिंद पूरी तरह खाली होकर रक्त निलय में भेज सकें। कथन 4 सही है, माइलिन आच्छद का निर्माण PNS में शवान कोशिकाओं और CNS में ओलिगोडेंड्रोसाइट्स द्वारा होता है, जिससे तंत्रिका आवेगों का 'सॉल्टरी कंडक्शन' संभव होता है।
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