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General Science
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नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) और रेडियोएक्टिव क्षيय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब एक धीमे न्यूट्रॉन की बमबारी यूरेनियम-235 ($^{235}U$) पर की जाती है, तो यह एक अस्थाई समस्थानिक $^{236}U$ बनाता है जो तुरंत दो छोटे नाभिकों में विखंडित हो जाता है और इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा के साथ-साथ औसतन 2 से 3 तेज न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं।
- 2. परमाणु रिएक्टर में विखंडन की दर को नियंत्रित करने के लिए 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) के रूप में कैडमियम या बोरॉन का उपयोग किया जाता है, जो न्यूट्रॉनों का तीव्र विसर्जन करके उन्हें मंदित करती हैं।
- 3. द्रव्यमान क्षति (Mass defect) वह अंतर है जो किसी नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान और उसके व्यक्तिगत न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) के कुल द्रव्यमान के बीच होता है, और यही द्रव्यमान क्षति अल्बर्ट आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण ($E = mc^2$) के अनुसार नाभिकीय बंधन ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
- 4. अल्फा ($α$) क्षय के दौरान जनक नाभिक का परमाणु क्रमांक 2 इकाई से घट जाता है और द्रव्यमान संख्या 4 इकाई से कम हो जाती है, क्योंकि एक अल्फा कण वस्तुतः हीलियम नाभिक ($_2^4He^{2+}$) के समान होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: $^{235}U$ पर धीमे न्यूट्रॉन की बमबारी से $_{92}^{236}U$ बनता है जो विखंडित होकर बेरियम और क्रिप्टन जैसे हल्के नाभिक बनाता है तथा 2-3 न्यूट्रॉन मुक्त करता है। कथन 2 गलत है: नियंत्रक छड़ें (कैडमियम या बोरॉन) न्यूट्रॉनों का 'अवशोषण' (absorption) करती हैं, उन्हें 'मंदित' नहीं करतीं; न्यूट्रॉनों को मंदित करने का कार्य मंदक (जैसे भारी जल या ग्रेफाइट) द्वारा किया जाता है। कथन 3 सही है: नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान उसके घटकों (न्यूक्लियॉनों) के कुल द्रव्यमान से कम होता है, और यह अंतर द्रव्यमान क्षति कहलाता है जो बंधन ऊर्जा निर्धारित करता है। कथन 4 सही है: अल्फा क्षय में हीलियम नाभिक निकलने के कारण परमाणु क्रमांक में 2 और द्रव्यमान संख्या में 4 की कमी आती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आनुवंशिकी तथा अनुकूलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली में लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित एंटीजन (एग्लूटिनोजन) के प्रकार के आधार पर रक्त समूह निर्धारित होते हैं, और जिस व्यक्ति के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी उपस्थित होते हैं, उसका रक्त समूह 'AB' होता है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H एंटीजन' अनुपस्थित होता है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) से रक्त प्राप्त नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उनके प्लाज्मा में H एंटीजन के विरुद्ध भी एंटीबॉडी पाई जाती है।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटेलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-ऋणात्मक (Rh-) माता अपने गर्भ में Rh-धनात्मक (Rh+) भ्रूण को धारण करती है, जिससे पहली गर्भावस्था में ही भ्रूण की गंभीर क्षति या मृत्यु हो जाती है क्योंकि मातृ एंटीबॉडी प्लेसेंटा को बहुत तेजी से पार करती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर में 'हृदय चक्र' (Cardiac Cycle) के दौरान 'वेंट्रिकुलर सिस्टोल' (Ventricular Systole) की प्रारंभिक अवस्था में 'आसोवोल्यूमेट्रिक संकुचन' (Isovolumetric Contraction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस छोटी सी अवधि में निलय (Ventricles) का दबाव तेजी से बढ़ता है, जिससे एट्रियोवेंट्रिकुलर (AV) वाल्व और अर्धचंद्राकार (Semilunar) वाल्व दोनों एक साथ बंद हो जाते हैं।
2. इस प्रावस्था के दौरान निलय के भीतर रक्त का आयतन स्थिर रहता है क्योंकि सभी वाल्व बंद होते हैं और किसी भी कक्ष से रक्त का प्रवेश या निकास नहीं होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न परिपथों (Circuits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक तार का विद्युत प्रतिरोध उसके तापमान पर निर्भर करता है; धात्विक चालकों के लिए तापमान बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) के लिए तापमान बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध घटता है।
2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या आवेश संरक्षण का नियम) इस बात को स्पष्ट करता है कि किसी विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है, जो कि मूल रूप से ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
3. जब कई प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से भी अधिक होता है।
4. एक आदर्श वोल्टमीटर का आंतरिक प्रतिरोध अनंत माना जाता है ताकि वह परिपथ में न्यूनतम विद्युत धारा खींच सके और दो बिंदुओं के बीच यथार्थ विभवांतर माप सके, जबकि एक आदर्श आमीटर का आंतरिक प्रतिरोध शून्य होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के विभिन्न रासायनिक पहलुओं और उनके जलीय विलयन व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) संकल्पना के अनुसार, अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो प्रोटॉन ($H^+$) दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) अत्यधिक दुर्बल प्रकृति का होता है।
2. लुईस (Lewis) संकल्पना के आधार पर, वे यौगिक जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं, लुईस क्षार कहलाते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने वाली स्पीशीज लुईस अम्ल होती हैं।
3. जब सोडियम एसीटेट ($CH_3COONa$) जैसे दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय अपघटन किया जाता है, तो विलयन में हाइड्रॉक्साइड आयनों ($OH^-$) की अधिकता के कारण विलयन का pH मान 7 से अधिक होता है।
4. आरहेनियस सिद्धांत केवल जलीय माध्यम में अम्लीय और क्षारीय गुणों की व्याख्या करने तक सीमित है और यह अमोनिया जैसे निर्जलीय विलायकों में क्षारीय व्यवहार को स्पष्ट करने में असमर्थ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के तंत्रों की कार्यप्रणाली (Physiology) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की मुख्य या पैराइटल (Parietal) कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) का स्रावण करती हैं, जो क्षुद्रांत में विटामिन B12 के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
2. कशेरुकियों में श्वसन गैसों के परिवहन के दौरान, जब रक्त सक्रिय ऊतकों से फेफड़ों की ओर बढ़ता है, तो उच्च $O_2$ सांद्रता और अधिक $pH$ के कारण हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता (Affinity) घट जाती है, जिसे 'बोर प्रभाव' (Bohr effect) कहा जाता है।
3. मानव हृदय में 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करने की क्षमता रखता है जिसके कारण इसे प्राकृतिक 'पेसमेकर' कहा जाता है, जबकि 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) आवेगों के संचरण में थोड़ा विलंब उत्पन्न करता है जिससे आलिंदों का संकुचन निलय के संकुचन से पहले पूरी तरह समाप्त हो सके।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में माइलिन आच्छद (Myelin sheath) का निर्माण परिधीय तंत्रिका तंत्र में 'शवान कोशिकाओं' (Schwann cells) द्वारा और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में 'ओलिगोडेंड्रोसाइट्स' (Oligodendrocytes) द्वारा किया जाता है, जो नमक-मेड़ संचरण (Saltatory conduction) के माध्यम से आवेगों की गति को तीव्र करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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