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General Science
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एलकेन्स (Alkanes) के रासायनिक गुणों और उनके निर्माण की विधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वुर्ट्ज अभिक्रिया (Wurtz reaction) के दौरान जब एल्किल हैलाइड की अभिक्रिया शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु के साथ कराई जाती है, तो उच्च सममितीय (Symmetrical) एल्केन प्राप्त होते हैं, किंतु इस विधि द्वारा विषम कार्बन परमाणुओं वाले एल्केन का उच्च शुद्धता के साथ उत्पादन नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें उप-उत्पाद के रूप में विभिन्न एल्केन्स का मिश्रण प्राप्त होता है।
  2. 2. डीकार्बोक्सिलेशन (Decarboxylation) प्रक्रिया में सोडियम कार्बोक्सिलेट लवण को सोडालाइम (NaOH और CaO का मिश्रण) के साथ गर्म किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप मूल कार्बोक्सिलेट अणु की तुलना में एक कार्बन परमाणु कम वाला एल्केन (जैसे मीथेन) प्राप्त होता है।
  3. 3. एल्केन्स को 'पैराफिन' (Paraffins) भी कहा जाता है, जिसका लैटिन में अर्थ 'कम सक्रियता' होता है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में ये अम्ल, क्षार, ऑक्सीकारकों और अपचायकों के प्रति निष्क्रिय होते हैं, किंतु सूर्य के प्रकाश की विसरित उपस्थिति में ये हैलोजनीकरण (Halogenation) की मुक्त मूलक (Free radical) प्रतिस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करते हैं।
  4. 4. कोल्बे की विद्युत अपघटनी विधि (Kolbe's electrolytic method) द्वारा सोडियम या पोटेशियम कार्बोक्सिलेट के जलीय विलयन का विद्युत अपघटन करने पर एनोड पर केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन और ऐल्काइन) प्राप्त होते हैं, जबकि कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

इस प्रश्न में दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है। कोल्बे की विद्युत अपघटनी विधि (Kolbe's electrolysis) में कार्बोक्सिलेट लवण के जलीय विलयन के विद्युत अपघटन से एनोड पर सममितीय एल्केन ($C_2H_6, C_4H_{10}$ आदि) प्राप्त होते हैं, न कि केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन। एल्केन्स संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जो एकल बंध से जुड़े होते हैं। कार्बनिक रसायन विज्ञान के अंतर्गत हाइड्रोकार्बन और ईंधनों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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