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General Science
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नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) और रेडियोएक्टिव क्षय की प्रक्रियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला (Proton-Proton chain) द्वारा हाइड्रोजन का हीलियम में संलयन है, जिसके लिए अत्यंत उच्च तापमान और दाब की आवश्यकता होती है ताकि नाभिकों के बीच के कूलामी प्रतिकर्षक बल को पार किया जा सके।
  2. 2. अल्फा-क्षय (Alpha decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाला अल्फा कण वास्तव में एक हीलियम नाभिक ($^4_2He$) होता है, और इस प्रक्रिया में जनक नाभिक का परमाणु क्रमांक 2 तथा द्रव्यमान संख्या 4 से घट जाती है।
  3. 3. गामा-क्षय (Gamma decay) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें रेडियोएक्टिव नाभिक द्वारा अल्फा या बीटा कणों का उत्सर्जन किया जाता है, जिससे नाभिक की द्रव्यमान संख्या में परिवर्तन होता है और यह हमेशा एक नए रासायनिक तत्व में परिवर्तित हो जाता है।
  4. 4. न्यूट्रॉन-प्रोटॉन अनुपात ($n/p$) के असंतुलन को संतुलित करने के लिए, न्यूट्रॉन-समृद्ध नाभिक बीटा-माइनस ($eta^-$) क्षय प्रदर्शित करते हैं, जिसमें एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और एक एंटी-न्यूट्रिनो में रूपांतरित होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत हाइड्रोजन का हीलियम में नाभिकीय संलयन है, जिसे विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार अत्यधिक उच्च तापमान और दाब की आवश्यकता होती है। कथन 2 सही है क्योंकि अल्फा क्षय में हीलियम नाभिक का उत्सर्जन होता है जिससे परमाणु क्रमांक में 2 और द्रव्यमान संख्या में 4 की कमी आती है। कथन 3 गलत है क्योंकि गामा-क्षय एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें केवल उच्च ऊर्जा वाले फोटॉनों (विद्युतचुंबकीय विकिरण) का उत्सर्जन होता है, जिससे न तो परमाणु क्रमांक बदलता है और न ही द्रव्यमान संख्या; यह केवल उत्तेजित नाभिक की ऊर्जा को कम करता है, अतः नया रासायनिक तत्व नहीं बनता। कथन 4 सही है क्योंकि न्यूट्रॉन-समृद्ध नाभिक में न्यूट्रॉन टूटकर प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन ($eta^-$ कण) और एंटी-न्यूट्रिनो बनाता है।
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