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General Science
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क्वांटम टनलिंग किस प्रभाव के कारण होती है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कणों की तरंग प्रकृति के कारण वे ऊर्जा अवरोध को पार कर सकते हैं।
Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रक्त समूह 'AB' को सार्वभौमिक ग्राही (Universal Recipient) कहा जाता है क्योंकि इसकी लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर एंटीजन A और एंटीजन B दोनों उपस्थित होते हैं, किंतु इसके रुधिर प्लाज्मा में कोई भी प्राकृतिक एंटीबॉडी ('anti-A' या 'anti-B') उपस्थित नहीं होती है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood Group या $O_h$) सबसे पहले 1952 में मुंबई में खोजा गया था, जिसके व्यक्तियों की RBC पर 'H' एंटीजन भी अनुपस्थित होता है क्योंकि इनमें H-जीन (FUT1) का उत्परिवर्तन होता है, और ऐसे व्यक्ति केवल 'बॉम्बे फेनोटाइप' वाले व्यक्ति से ही रक्त ले सकते हैं।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस (Erythroblastosis fetalis) मुख्य रूप से तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh+) माता और Rh-ऋणात्मक (Rh-) पिता का गर्भधारण होता है, जिससे पहले बच्चे के जन्म के समय भ्रूण का Rh+ रक्त माता के परिसंचरण में प्रवेश करके घातक एग्लूटीनेशन पैदा करता है।
4. रुधिर प्लाज्मा में उपस्थित प्राकृतिक एंटीबॉडी (एग्लुटीनिन) 'anti-A' और 'anti-B' मुख्य रूप से IgM प्रकार के इम्युनोग्लोबुलिन होते हैं, जो आकार में बड़े होने के कारण प्लेसेंटा की बाधा को पार नहीं कर पाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटने तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है।
2. संक्रमण तत्वों (d-block elements) में आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्याओं में लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के प्रभाव के कारण अपेक्षित क्रमिक कमी नहीं दिखाई देती है, जिससे 5d श्रेणी के तत्वों का आकार लगभग उनकी ठीक ऊपर की 4d श्रेणी के तत्वों के समान हो जाता है।
3. फ्लोरिन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) पॉलिंग पैमाने पर संपूर्ण आवर्त सारणी में सर्वाधिक होती है, किंतु इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में थोड़ा कम होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरिन के छोटे आकार के कारण होने वाला अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic Repulsion) है।
4. किसी तत्व की आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) को प्रभावित करने वाले कारकों में मुख्य रूप से परमाणु का आकार, नाभिकीय आवेश, आवरण प्रभाव (Shielding Effect) और अर्ध-पूरित (Half-filled) तथा पूर्ण-पूरित (Fully-filled) कक्षकों का स्थायित्व शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं के निष्कर्षण (Metallurgical Processes), संक्षारण (Corrosion) और उनके रासायनिक यौगिकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कॉपर पाइराइट्स ($CuFeS_2$) के प्रगालन (Smelting) के दौरान बनने वाला 'मैट' (Matte) मुख्य रूप से क्यूप्रस सल्फाइड ($Cu_2S$) और फेरस सल्फाइड ($FeS$) का मिश्रण होता है, जिसमें से आयरन की अशुद्धियों को हटाने के लिए सिलिका ($SiO_2$) को गलनक (Flux) के रूप में मिलाया जाता है।
2. 'थर्माइट वेल्डिंग' (Thermite Welding) में फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) का अपचयन एल्युमिनियम चूर्ण द्वारा किया जाता है, जो एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया है और इसमें पिघला हुआ लोहा रेल की पटरियों की दरारों को भरने के काम आता है।
3. लोहे पर जंग लगने की रासायनिक परिघटना एक विद्युत-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें एनोड पर लोहे का ऑक्सीकरण होकर $Fe^{2+}$ आयन बनते हैं, जबकि कैथोड पर ऑक्सीजन का अपचयन होता है और इसके निवारण के लिए 'गेल्वेनीकरण' प्रक्रिया के तहत लोहे के ऊपर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाई जाती है।
4. सान्द्र नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) एल्युमिनियम धातु के साथ अभिक्रिया करके उसकी सतह पर एल्युमिनियम ऑक्साइड की एक निष्क्रिय (Passive) परत का निर्माण करता है, जिसके कारण एल्युमिनियम के बर्तन में नाइट्रिक अम्ल का भंडारण नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भौतिक राशियों, मात्रकों और मापन (Units and Measurement) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारसेक (Parsec) खगोलीय दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई है, जो उस चाप की दूरी को निरूपित करती है जो किसी वृत्त के केंद्र पर 1 आर्कसेकंड (1 arcsecond) का कोण अंतरित करता है जब चाप की लंबाई 1 खगोलीय इकाई (AU) होती है।
2. स्टीरेडियन (Steradian) एक व्युत्पन्न मात्रक है जो समतल कोण (Plane angle) को मापने के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि रेडियन एक पूरक मात्रक (Supplementary unit) है जिसका उपयोग ठोस कोण (Solid angle) को मापने के लिए किया जाता है।
3. प्लांक नियतांक ($h$) का विमीय सूत्र वही होता है जो कोणीय संवेग (Angular momentum) का होता है, और दोनों का SI मात्रक जूल-सेकंड ($J\cdot s$) है।
4. प्रकाश वर्ष (Light-year) समय का नहीं बल्कि दूरी का मात्रक है, और 1 प्रकाश वर्ष लगभग $9.46 \times 10^{15}$ मीटर के बराबर होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण की क्रियाविधि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलयन का 'वाष्प दाब का अवनमन' (Lowering of vapour pressure) और 'हिमांक का अवनमन' (Depression of freezing point) दोनों ही अणुसंख्यक गुण हैं, जो विलेय के कणों की प्रकृति पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी संख्या पर।
2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के जलीय विलयन में वियोजन (Dissociation) होने पर 1 से अधिक होता है, क्योंकि इस प्रक्रिया से विलयन में कणों की कुल संख्या बढ़ जाती है।
3. 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्थाओं में होते हैं, और हेबर विधि द्वारा अमोनिया के निर्माण में प्रयुक्त सूक्ष्म विभाजित लोहा (Fe) इस प्रकार के उत्प्रेरण का एक प्रमुख उदाहरण है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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