त्वरित लिंक्स
Geography
21 views
भारत की जलवायु और मानसून की उत्पत्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ग्रीष्मकाल में उत्तर-भारत के मैदानों और थार मरुस्थल में अत्यधिक ताप के कारण 'मानसूनी गर्त' (Monsoon Trough) का निर्माण होता है, जो अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का ही उत्तर की ओर खिसका हुआ रूप है।
- 2. तिब्बत का पठार ग्रीष्मकाल में एक विशाल 'ऊष्मीय इंजन' (Thermal Engine) के रूप में कार्य करता है, जो उच्च तापमान के कारण ऊपर उठती गर्म हवाओं से क्षोभमंडल के ऊपरी स्तर पर उच्च दाब का क्षेत्र बनाता है, जिससे जेट स्ट्रीम के विस्थापन में सहायता मिलती है।
- 3. 'मैस्कैरेन उच्च' (Mascarene High) मेडागास्कर के पूर्व में हिंद महासागर के दक्षिण में स्थित एक उच्च दाब क्षेत्र है, जिसकी तीव्रता सीधे तौर पर दक्षिण-पश्चिमी मानसून की ग्रीष्मकालीन हवाओं को भारतीय उपमहाद्वीप की ओर धकेलने के लिए उत्तरदायी होती है।
- 4. एल निनो (El Niño) और दक्षिणी दोलन (ENSO) की सकारात्मक अवस्था भारतीय मानसून को अत्यधिक मजबूत करती है और इसके प्रभाव से भारत में सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा दर्ज की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। ग्रीष्मकाल में उत्तर भारत के मैदानों में अत्यधिक तापन के कारण निम्न दाब का क्षेत्र बनता है जिसे मानसूनी गर्त कहते हैं, और यह वस्तुतः उत्तर की ओर विस्थापित ITCZ है। तिब्बत का पठार ग्रीष्मकाल में गर्म होकर ऊपरी क्षोभमंडल में प्रति-चक्रवात और उच्च दाब क्षेत्र बनाता है। दक्षिणी हिंद महासागर में मेडागास्कर के पास स्थित 'मैस्कैरेन उच्च' की उपस्थिति दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं को शक्तिशाली बनाती है। हालांकि, कथन 4 गलत है क्योंकि 'एल निनो' (El Niño) की स्थिति प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय जल को गर्म करती है, जिससे भारतीय मानसून कमजोर होता है और सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है (जबकि 'ला निना' मानसूनी वर्षा को मजबूत करता है)। भारतीय मानसून की क्रियाविधि के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
भारत के भौगोलिक विस्तार, भू-आदेशीय स्थिति और समय क्षेत्र (Time Zones) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का मुख्य भूभागीय अक्षांशीय विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर तथा देशांतरिय विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व है, जिसके कारण इसके कुल अक्षांशीय और देशांतरिय सीमा विस्तार का अंतर लगभग 30 डिग्री है।
2. भारतीय मानक समय (IST) रेखा 82°30' पूर्वी देशांतर है, जो ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है और यह रेखा देश के कुल 6 राज्यों से होकर गुजरती है।
3. कर्क रेखा (23°30' उत्तर अक्षांश) भारत को लगभग दो बराबर भागों में विभाजित करती है और यह कुल 8 राज्यों से गुजरती है, जिसमें अगरतला (त्रिपुरा) और रांची (झारखंड) इस रेखा के सर्वाधिक समीप स्थित राजधानियाँ हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की पूर्व-पश्चिम लंबाई (लगभग 2,933 किमी) उत्तर-दक्षिण लंबाई (लगभग 3,214 किमी) से कम है, और देश का कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है जो विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 2.4 प्रतिशत है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के प्रमुख हिमालयी और प्रायद्वीपीय पर्वतीय क्षेत्रों, पर्वत श्रेणियों तथा उनमें स्थित घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'काराकोरम श्रेणी' (Karakoram Range) को 'उच्च एशिया की रीढ़' कहा जाता है, जिसमें भारत की सबसे ऊँची चोटी K2 (गॉडविन ऑस्टिन) स्थित है और यहीं पर ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर विश्व का सबसे बड़ा 'सियाचिन हिमनद' पाया जाता है।
2. 'पीर पंजाल श्रेणी' (Pir Panjal Range) लघु हिमालय (Himachal Himalaya) की सबसे लंबी और सबसे महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला है, जो कश्मीर घाटी को जम्मू क्षेत्र से अलग करती है और इसी श्रेणी में 'बनिहाल दर्रा' स्थित है जो जवाहर सुरंग के माध्यम से सड़क संपर्क प्रदान करता है।
3. 'कुल्लू घाटी' (Kullu Valley) धौलाधार और पीर पंजाल श्रेणियों के बीच व्यास नदी द्वारा निर्मित एक खूबसूरत अनुदैर्ध्य (Longitudinal) घाटी है, जिसे 'देवों की घाटी' (Valley of Gods) के नाम से भी जाना जाता है।
4. 'साइलेंट वैली' (Silent Valley) या शांत घाटी पश्चिमी घाट की नीलगिरी पहाड़ियों में स्थित एक उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षावन है, जो कुद्रेमुख पर्वत के ठीक उत्तर में स्थित है और यहाँ 'कुंतीपुझा' नदी प्रवाहित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत में कृषि पद्धतियों, फसल विविधीकरण और कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'राष्ट्रीय कृषि आयोग' (National Commission on Agriculture) द्वारा भारत को कुल 15 मुख्य कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो मुख्य रूप से मृदा के प्रकार, जलवायु, वर्षा और तापमान की विशेषताओं पर आधारित हैं।
2. 'बहु-फसलीय प्रणाली' (Multiple Cropping) के अंतर्गत एक ही कृषि वर्ष में एक ही खेत में एक के बाद एक दो या दो से अधिक फसलें उगाई जाती हैं, जो विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अधिक सफल होती हैं जहाँ सिंचाई के विश्वसनीय साधन और वर्षभर अनुकूल तापमान उपलब्ध रहता है।
3. भारत में 'धान की सीधी बुवाई' (Direct Seeded Rice - DSR) पारंपरिक पुड्डलिंग (Puddling) विधि की तुलना में भूजल निष्कर्षण को कम करती है, मीथेन गैस के उत्सर्जन को घटाती है और श्रम की आवश्यकता को भी काफी हद तक कम करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'रबी' की फसलों की बुवाई अक्टूबर-नवंबर के दौरान शीतकाल के आरंभ में की जाती है और इनकी कटाई मार्च-अप्रैल के महीने में की जाती है, जिन्हें बढ़ने के समय ठंडे मौसम और पकने के समय चमकीली धूप की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सौर मंडल के बाह्य ग्रहों (Jovian Planets), उनके उपग्रहों और क्षुद्रग्रह बेल्ट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बृहस्पति का उपग्रह 'आयो' (Io) सौर मंडल का सबसे अधिक भूगर्भीय रूप से सक्रिय पिंड है, जिसकी सतह पर दर्जनों सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं और इसका मुख्य कारण बृहस्पति तथा अन्य गैलीलियन उपग्रहों के बीच उत्पन्न होने वाला ज्वारीय घर्षण (Tidal Heating) है।
2. 'कॉइपर बेल्ट' (Kuiper Belt) नेपच्यून की कक्षा के परे सूर्य की परिक्रमा करने वाले बर्फीले पिंडों और प्लूटो जैसे बौने ग्रहों का एक विस्तृत क्षेत्र है, जो सौर मंडल के निर्माण के अवशेषों को प्रदर्शित करता है।
3. शनि ग्रह का घनत्व सौर मंडल के सभी ग्रहों में सबसे कम है, इतना कम कि यदि इसे किसी विशाल महासागर में रखा जाए तो यह पानी पर तैरने लगेगा।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार क्षुद्रग्रह बेल्ट (Asteroid Belt) मंगल और शनि ग्रहों के बीच स्थित है, जहाँ हज़ारों छोटे चट्टानी पिंड सूर्य की परिक्रमा करते हैं और यह क्षेत्र आंतरिक स्थलीय ग्रहों को बाह्य गैस दिग्गजों से अलग करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत की मृदा प्रणालियों के वर्गीकरण, उनके खनिज संगठन और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'शुष्क और मरुस्थलीय मृदा' (Arid and Desert Soils) मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है, जहाँ उच्च तापमान और तीव्र वाष्पीकरण के कारण मृदा में ह्यूमस और नमी की मात्रा नगण्य होती है, तथा इसमें कैल्शस (Calcium Carbonate) की अधिकता के कारण नीचे की परतों में 'कंकड़' की परत का निर्माण होता है।
2. 'पीठीय और जैविक मृदा' (Peaty and Marshy Soils) उन क्षेत्रों में विकसित होती है जहाँ भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता के कारण बड़े पैमाने पर वनस्पति सड़ती-गलती है, और इस मृदा में ह्यूमस की मात्रा 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है, जो मुख्य रूप से केरल के कोट्टायम और अलप्पुझा जिलों में 'कारी' (Kari) मृदा के रूप में पाई जाती है।
3. 'लाल मृदा' का विकास प्राचीन रवेदार (Crystalline) और कायांतरित चट्टानों पर होता है, जिसमें फेरिक ऑक्साइड्स की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है, और यह मृदा दक्कन पठार के पूर्वी और दक्षिणी भागों में तथा ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में प्रचुरता से पाई जाती है, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और ह्यूमस की पर्याप्त अधिकता होती है।
4. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश की मृदाओं को उनकी आनुवंशिक विशेषताओं और गुणों के आधार पर कुल आठ प्रमुख समूहों में वर्गीकृत किया है, जिसमें क्षेत्रफल की दृष्टि से 'जलोढ़ मृदा' (Alluvial Soils) का विस्तार सबसे अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.