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Geography
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भारत की जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति में तिब्बत के पठार का अत्यधिक गर्म होना एक महत्वपूर्ण कारक है, जो ग्रीष्मकाल में ऊपरी क्षोभमंडल में एक प्रबल उच्च वायुदाब (Anticyclone) का निर्माण करता है और उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (Easterly Jet Stream) को जन्म देता है।
  2. 2. 'मासिनराम' (Mawsynram) विश्व का सबसे अधिक वर्षा वाला स्थान है, जहाँ होने वाली अत्यधिक वर्षा का मुख्य कारण मेघालय की खासी पहाड़ियों की कीप जैसी (Funnel-shaped) भौगोलिक आकृति है, जो बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्र हवाओं को चारों ओर से रोक लेती है।
  3. 3. एल निनो (El Niño) घटना भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में पेरू के तट पर ठंडी धाराओं के अस्थायी प्रतिस्थापन के रूप में प्रकट होती है, जिसके प्रभाव से भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून कमजोर हो जाता है और देश में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है।
  4. 4. भारतीय मानसून की 'विच्छेदित वर्षा' (Break in Monsoon) की स्थिति मुख्य रूप से उत्तर भारत के मैदानी भागों में उष्णकटिबंधीय अवदाबों (Tropical Depressions) की निरंतर बंगाल की खाड़ी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर लगातार सक्रियता के कारण उत्पन्न होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। ग्रीष्मकाल में तिब्बत के पठार का अत्यधिक गर्म होना भारत में मानसूनी हवाओं को आकर्षित करने के लिए निम्नदाब विकसित करने में मदद करता है और ऊपरी क्षोभमंडल में पूर्वी जेट स्ट्रीम को प्रेरित करता है। मासिनराम (मेघालय) में खासी पहाड़ियों की कीप जैसी स्थलाकृति के कारण बंगाल की खाड़ी की मानसूनी हवाएँ संघनित होकर सर्वाधिक वर्षा करती हैं। एल निनो भारतीय मानसून के लिए प्रतिकूल होता है क्योंकि यह पेरू तट पर गर्म जलधारा के प्रवाह से मानसून को कमजोर करता है। कथन 4 गलत है क्योंकि 'मानसून विच्छेद' (Break in Monsoon) तब होता है जब मानसूनी गर्त (Monsoon Trough) हिमालय की तलहटी की ओर खिसक जाता है या उत्तर भारत में अवदाबों की कमी हो जाती है। अधिक जानकारी के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ।
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