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Geography
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा की गतिशीलता और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय बेसिन का सबसे विस्तृत और समतल भाग 'महासागरीय मैदान' (Abyssal Plains) कहलाता है, जो महाद्वीपीय ढाल के ठीक नीचे से शुरू होकर कुल महासागरीय तली का लगभग 40% से अधिक भाग आच्छादित करता है।
- 2. 'दैनिक ज्वार' (Diurnal Tide) वह ज्वार-भाटा प्रणाली है जिसमें किसी स्थान पर एक चंद्र दिवस (24 घंटे 50 मिनट) में दो उच्च ज्वार और दो निम्न ज्वार आते हैं, जो मुख्य रूप से अटलांटिक महासागर के तटीय क्षेत्रों में बहुतायत से देखे जाते हैं।
- 3. 'सुंडा जलसंधि' (Sunda Strait) इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीपों को अलग करती है और हिंद महासागर को जावा सागर से जोड़ती है, जबकि 'मलक्का जलसंधि' सुमात्रा और मलय प्रायद्वीप के बीच स्थित है।
- 4. वृहत ज्वार (Spring Tides) पूर्णिमा और अमावस्या के दिन तब उत्पन्न होते हैं जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में (सिजिजी की स्थिति में) होते हैं, जिससे दोनों का गुरुत्वाकर्षण बल मिलकर संयुक्त प्रभाव डालता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: महासागरीय मैदान (Abyssal Plains) महासागरीय बेसिन के सबसे विस्तृत, गहरे और समतल भाग होते हैं जो महाद्वीपीय उभार (Continental Rise) के नीचे पाए जाते हैं। कथन 2 गलत है: एक चंद्र दिवस में दो उच्च ज्वार और दो निम्न ज्वार आने की स्थिति को 'अर्ध-दैनिक ज्वार' (Semi-diurnal Tide) कहा जाता है, न कि 'दैनिक ज्वार'। दैनिक ज्वार में 24 घंटे 50 मिनट की अवधि में केवल एक उच्च ज्वार और एक निम्न ज्वार आता है। कथन 3 सही है: सुंडा जलसंधि सुमात्रा और जावा द्वीपों के बीच स्थित है जो हिंद महासागर को जावा सागर से जोड़ती है। कथन 4 सही है: पूर्णिमा और अमावस्या के दिन सिजिजी (Syzygy) की स्थिति में सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उच्चतम ज्वार या वृहत ज्वार आते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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हमारे सौर मंडल के क्षुद्रग्रह बेल्ट (Asteroid Belt), बौने ग्रहों और खगोलीय पिंडों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'क्षुद्रग्रह बेल्ट' (Asteroid Belt) मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के बीच स्थित है, जहाँ हजारों छोटे चट्टानी पिंड सूर्य की परिक्रमा करते हैं, और इस क्षेत्र का सबसे बड़ा पिंड 'सेरेस' (Ceres) है जिसे वर्तमान में बौना ग्रह (Dwarf Planet) माना जाता है।
2. नेपच्यून की कक्षा के पार सौर मंडल के बाहरी छोर पर स्थित 'कुइपर बेल्ट' (Kuiper Belt) में बर्फीले पिंडों की प्रधानता होती है, और प्लूटो, हाउमिया तथा माकेमाके इसी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध बौने ग्रह हैं।
3. 'उल्कापिंड' (Meteoroids) जब अंतरिक्ष से तीव्र गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण जलकर चमक उठते हैं और इन्हें 'टूटता तारा' कहा जाता है, तथा जो उल्कापिंड पूरी तरह जल नहीं पाते और पृथ्वी की सतह पर आ गिरते हैं, उन्हें 'उल्कापात' (Meteorites) कहा जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'धूमकेतु' (Comets) जमी हुई गैसों, चट्टानों और धूल से बने खगोलीय पिंड होते हैं जो लंबी और अंडाकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते हैं, तथा सूर्य के पास आने पर उनकी वाष्पीभूत गैसें पीछे की ओर एक लंबी चमकदार पूंछ का निर्माण करती हैं जो सदैव सूर्य से विपरीत दिशा में होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत में पाई जाने वाली 'लैटरलाइट मृदा' (Laterite Soil) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस मृदा का निर्माण उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है।
2. इस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा पर्याप्त होती है, जिससे यह धान की खेती के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है।
3. यह मृदा मुख्य रूप से पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, और असम के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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हमारे सौर मंडल की उत्पत्ति, ग्रहों की आंतरिक संरचना, उपग्रहों की गतिकी और क्षुद्रग्रहों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लाप्लास की निहारिका परिकल्पना' (Nebular Hypothesis) के अनुसार सौर मंडल का निर्माण एक विशाल और धीमी गति से घूमने वाले तप्त गैसीय नेबुला के शीतलन और संकुचन के परिणामस्वरूप हुआ था, जिसके केंद्रीय भाग से सूर्य और बाह्य भागों के पदार्थों से वलय (Rings) के संघनन द्वारा ग्रहों का निर्माण हुआ।
2. शनि का सबसे बड़ा उपग्रह 'टाइटन' (Titan) हमारे सौर मंडल का एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिसका अपना सघन वायुमंडल (मुख्य रूप से नाइट्रोजन से युक्त) है और इसकी सतह पर तरल मीथेन तथा इथेन के विशाल झील एवं समुद्र पाए जाते हैं।
3. क्षुद्रग्रह बेल्ट (Asteroid Belt) में स्थित 'वेस्ता' (Vesta) और 'पल्लास' (Pallas) जैसे बड़े क्षुद्रग्रहों को 'बौना ग्रह' (Dwarf Planet) का आधिकारिक दर्जा प्राप्त है, और इनकी कक्षाएँ मुख्य रूप से नेपच्यून ग्रह के बाहर स्थित कुइपर बेल्ट तक फैली हुई हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'औपोर्ट क्लाउड' (Oort Cloud) हमारे सौर मंडल की बाहरी सीमा पर स्थित बर्फीले और धूमकेतुनुमा पिंडों का एक गोलाकार आवरण है, जिसे दीर्घकालिक धूमकेतुओं (Long-period comets) का उद्गम स्थल माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की मृदा प्रणालियों (Soil Systems), उनके खनिज संघटन तथा भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रेगुर मिट्टी' (Regur Soil), जिसे काली कपास मृदा भी कहा जाता है, का निर्माण बेसाल्टिक लावा के विखंडन से हुआ है और इसमें 'मोंटमोरिलोनाइट' (Montmorillonite) खनिज की उपस्थिति के कारण उच्च आर्द्रता अवशोषण तथा शुष्क मौसम में गहरी दरारें पड़ने का विशेष गुण ('स्वयं-जुताई' का स्वभाव) पाया जाता है।
2. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soil) का विकास उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) प्रक्रिया के परिणामस्वरुप होता है, जिसमें सिलिका जैसे घुलनशील तत्वों के बह जाने के कारण आयरन और एल्युमीनियम के ऑक्साइड प्रचुर मात्रा में शेष बच जाते हैं, और यह मृदा सामान्यतः अम्लीय प्रकृति की होने के कारण चाय, कॉफी तथा काजू के बागानी कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है।
3. 'क्षारीय एवं रेह मृदा' (Alkaline and Saline Soil), जिसे 'कल्लर' या 'उर' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से उन शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में विकसित होती है जहाँ नहरों के अत्यधिक सिंचाई उपयोग और जल निकास (Drainage) की उचित व्यवस्था न होने के कारण केशिका क्रिया (Capillary Action) द्वारा सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवण धरातल पर निक्षेपित हो जाते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 43% हिस्सा आच्छादित करती है, जो मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत की डेल्टा घाटियों तक ही सीमित है और इसमें नाइट्रोजन तथा फास्फोरस की प्रचुरता पाई जाती है, जबकि पोटाश और चूने की भारी कमी होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भूकंप, ज्वालामुखी उद्गार और सुनामी की विवर्तनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पैच्यूरी-फॉल्ट' (Patch-fault) जैसी स्थानीय भ्रंश प्रणालियों में चट्टानों के अचानक टूटने से भूकंप का उद्गम होता है, और उद्गम केंद्र (Focus) के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को 'अधिकरण' (Epicenter) कहा जाता है, जहाँ सबसे पहले भूकंपीय तरंगें पहुँचती हैं।
2. 'हॉटस्पॉट' (Hotspot) ज्वालामुखी वे होते हैं जो प्लेटों की सीमाओं पर स्थित होने के बजाय विवर्तनिक प्लेटों के मध्य में मेंटल प्लूम (Mantle Plume) के ऊपर बनते हैं, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण हवाई द्वीप समूह (Hawaiian Islands) है।
3. सुनामी तरंगें गहरे समुद्र में अत्यंत कम तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और विशाल आयाम (Amplitude) वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे समुद्र में जहाजों को इसका तीव्र अहसास होता है, परंतु तट के पास उथले पानी में पहुँचने पर इनकी गति बढ़ जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार सुनामी मुख्य रूप से समुद्र के नीचे तीव्र भूकंप आने, बड़े भूस्खलन या ज्वालामुखी विस्फोट के कारण महासागरीय जल के अचानक और बड़े पैमाने पर विस्थापित होने से उत्पन्न होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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