त्वरित लिंक्स
Geography
1 views
महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा की गतिकी और प्रमुख जलसंधियों (Straits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत गहराई लगभग 120 से 200 मीटर तक होती है, और यहाँ सूर्य का प्रकाश प्रचुर मात्रा में पहुँचने के कारण फाइटोप्लांकटन (Phytoplankton) का विकास होता है, जिससे यह क्षेत्र विश्व के सबसे समृद्ध मत्स्यन क्षेत्रों (Fishing Grounds) में गिना जाता है।
- 2. 'दैनिक ज्वार' (Diurnal Tide) वह ज्वार है जिसमें प्रत्येक 24 घंटे और 52 मिनट की अवधि में केवल एक बार उच्च ज्वार और एक बार निम्न ज्वार आता है, जबकि 'अर्ध-दैनिक ज्वार' (Semi-diurnal tide) में यह चक्र प्रत्येक दिन में दो बार दोहराया जाता है।
- 3. 'मलक्का जलसंधि' (Strait of Malacca) सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) और मलय प्रायद्वीप (मलेशिया) के बीच स्थित है, जो प्रशांत महासागर को दक्षिण चीन सागर के माध्यम से हिंद महासागर से जोड़ती है और यह वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अति संवेदनशील और व्यस्त मार्ग है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार वृहद ज्वार (Spring Tide) पूर्णिमा और अमावस्या के दिन उत्पन्न होता है, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक ही सीधी रेखा में (स्युजी की स्थिति) होते हैं, जिसके कारण उनके गुरुत्वाकर्षण बलों का संचयी प्रभाव अधिकतम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 3 और 4 पूरी तरह से सही हैं, जबकि कथन 2 में 'दैनिक ज्वार' की परिभाषा आंशिक रूप से भिन्न हो सकती है क्योंकि चंद्रमा की स्थिति और पृथ्वी के घूर्णन के कारण अधिकांश स्थानों पर अर्ध-दैनिक ज्वार ही प्रमुख रूप से आते हैं, किंतु सामान्यतः दिए गए विकल्पों के अनुसार मानक भौगोलिक संदर्भों में कथन 1, 3 और 4 ही सटीक बैठते हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार महासागरीय उच्चावच और ज्वार-भाटा पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण अंतःक्रियाओं के प्रत्यक्ष परिणाम हैं।
Related Questions
→
विश्व के विभिन्न महाद्वीपों, देशों, प्रमुख राजधानियों और उनकी भू-राजनीतिक सीमा रेखाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टॉरट्वाइज़ लाइन' या 'डुरंड रेखा' (Durand Line) वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्थित है, जिसका निर्धारण ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डुरंड द्वारा 1893 में किया गया था।
2. 'ओडर-नीस रेखा' (Oder-Neisse Line) द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात जर्मनी और पोलैंड के बीच निर्धारित की गई एक अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो ओडर और नीस नदियों के सहारे चलती है।
3. 'ग्रैंड ट्रंक रोड' की तरह 'मेडिसन रेखा' (Mason-Dixon Line) संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर उत्तरी राज्यों (जैसे पेनसिल्वेनिया) और दक्षिणी दासता-समर्थक राज्यों (जैसे मैरीलैंड) के बीच ऐतिहासिक सांस्कृतिक और सामाजिक सीमा रेखा मानी जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार '38वीं समानांतर रेखा' (38th Parallel) उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को विभाजित करने वाली एक सुप्रसिद्ध अक्षांशीय सीमा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत में सिंचाई के स्रोतों, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों और प्रमुख फसलों की भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र (Net Irrigated Area) के स्रोतों में 'नदी नहरों' (Canals) का स्थान प्रथम है, जिसके बाद नलकूपों (Tubewells) और अन्य कुओं का स्थान आता है।
2. 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के अंतर्गत 'हर खेत को पानी' के उद्देश्य के साथ-साथ 'पर ड्राप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) के तहत सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) में वृद्धि होती है।
3. 'गेहूं' एक रबी की फसल है जिसे उगने के समय ठंडी और आद्र जलवायु तथा पकते समय तेज धूप व स्पष्ट आकाश की आवश्यकता होती है, और इसकी सफलता के लिए भारत में 50 से 75 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में नलकूपों और भूजल सिंचाई का सर्वाधिक विस्तार उत्तर भारत के विशाल मैदानों विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में हुआ है, क्योंकि यहाँ की नरम जलोढ़ मृदा और प्रचुर भूजल भंडार इसके अनुकूल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भूकंपीय तरंगों के संचरण, ज्वालामुखी के प्रकार और सुनामी की भौतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गमन कर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें हैं जो केवल ठोस माध्यमों से ही गुजर सकती हैं।
2. शील्ड ज्वालामुखी (Shield Volcanoes) मुख्य रूप से कम श्यानता (Low viscosity) वाले बेसाल्टिक लावा के शांत प्रवाह से बनते हैं, जिसके कारण ये अत्यधिक विस्फोटक होते हैं और इनसे पाइरोक्लास्टिक मलबा बड़े पैमाने पर निकलता है।
3. सुनामी तरंगें गहरे समुद्र में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और बहुत कम आयाम (Amplitude) वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे समुद्र में गुजरने वाले जहाजों को इसका आभास नहीं होता, किंतु तट के पास उथले पानी में पहुँचने पर इनकी गति मंद हो जाती है और तरंग की ऊँचाई (आयाम) में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार महासागरीय तलों पर अचानक होने वाले तीव्र विवर्तनिक विस्थापन या भूस्खलन के कारण पानी का भारी मात्रा में विस्थापन होता है, जो महासागरीय बेसिन में विनाशकारी सुनामी लहरों को जन्म देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के प्रमुख पर्वतीय दर्रों (Passes) और उनकी भौगोलिक अवस्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अघिल दर्रा' (Aghil Pass) काराकोरम श्रेणी के उत्तर में लद्दाख क्षेत्र में स्थित है, जो लद्दाख को चीन के शिनजियांग प्रान्त से जोड़ता है और यह सर्दियों में अत्यधिक हिमपात के कारण बंद रहता है।
2. 'पीर पंजाल दर्रा' (Pir Panjal Pass) पीर पंजाल श्रेणी में स्थित एक ऐतिहासिक दर्रा है, जो जम्मू को कश्मीर घाटी से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है और बनिहाल दर्रे के पूर्व में स्थित है।
3. 'यांग्याप दर्रा' (Yangyap Pass) अरुणाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी छोर पर महान हिमालय श्रेणी में स्थित है, जिससे होकर ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से भारत में प्रवेश करती है।
4. 'ससेंसर ला' (Saser La) दर्रा नुब्रा घाटी को लद्दाख के लेह क्षेत्र से जोड़ने वाला एक प्रमुख उच्च पर्वतीय दर्रा है, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
पृथ्वी की आंतरिक संरचना, सिस्मिक तरंगों (भू-कंपीय तरंगों) और विभिन्न प्रकार की चट्टानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों की भाँति व्यवहार करती हैं और ठोस, तरल तथा गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यमों से ही यात्रा कर सकती हैं।
2. पृथ्वी की क्रोड (Core) का बाहरी भाग तरल अवस्था में है, जिसके कारण वहाँ से गुजरने वाली S-तरंगें विलुप्त हो जाती हैं और P-तरंगों का वेग भी अचानक कम हो जाता है, जिससे क्रोड के चारों ओर एक व्यापक 'छाया क्षेत्र' (Shadow Zone) का निर्माण होता है।
3. बेसाल्ट और ग्रेबो जैसी चट्टानें आंतरिक आग्नेय चट्टानों (Intrusive igneous rocks) के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो पृथ्वी की सतह के बहुत नीचे अत्यधिक गहराई पर धीरे-धीरे ठंडी होने के कारण बड़े और स्पष्ट रवे (Crystals) बनाती हैं।
4. कायांतरित चट्टानें (Metamorphic rocks) अत्यधिक ताप, दाब और रासायनिक सक्रिय द्रवों के प्रभाव से अपने मूल रूप या संरचना में परिवर्तन के परिणामस्वरूप बनती हैं, और इस प्रक्रिया में चूना पत्थर का संगमरमर (Marble) में रूपांतरण इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.