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General Science
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विद्युत आवेश?

Detailed Explanation

कूलॉम।
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→ विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuits) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक का विद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance) उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा प्रतिरोधकता (Resistivity) का मान चालक के पदार्थ की प्रकृति और उसके तापमान पर निर्भर करता है, किंतु उसके आकार या ज्यामिति पर नहीं। 2. जब कई प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम (Parallel Combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance) संयोजन के प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के न्यूनतम मान से भी कम होता है, और इस व्यवस्था में सभी प्रतिरोधकों के सिरों के बीच विभवांतर का मान भिन्न-भिन्न होता है। 3. किर्चॉफ का प्रथम नियम (Kirchhoff's Current Law या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 4. जब किसी सेल से अधिकतम विद्युत शक्ति प्राप्त करनी हो, तो बाह्य परिपथ का प्रतिरोध सेल के आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance) के बराबर होना चाहिए, जिसे अधिकतम शक्ति स्थानांतरण प्रमेय कहा जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative Properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राऊल्ट के नियम द्वारा निर्धारित होता है तथा विलेय की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है। 2. परासरण दाब (Osmotic Pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जिसे वांट-हॉफ समीकरण $\Pi = iCRT$ द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ 'i' वांट-हॉफ गुणांक है जो वैद्युत अपघट्यों के वियोजन या संगुणन को दर्शाता है। 3. 'समांगी उत्प्रेरण' (Homogeneous Catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक समान भौतिक अवस्था (Phase) में होते हैं, जिसका एक उत्कृष्ट उदाहरण सीसम् कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में नाइट्रिक ऑक्साइड का उपयोग है। 4. 'एंजाइम उत्प्रेरण' अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के होते हैं और उनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता उच्चतम तापमान और अत्यधिक अम्लीय pH मान पर सबसे अधिक प्रभावी होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विद्युत परिपथों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक का विशिष्ट प्रतिरोध (Resistivity) या प्रतिरोधकता उसके पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, किंतु चालक की लंबाई और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करती है। 2. किर्चॉफ का संधि नियम (Current Law - KCL) इस बात का प्रतिनिधित्व करता है कि एक बंद लूप में कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है, जबकि लूप नियम (Voltage Law - KVL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। 3. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है, और यह संतुलन की अवस्था में '$P/Q = R/S$' के सिद्धांत पर कार्य करता है। 4. घरेलू विद्युत परिपथों में सभी उपकरणों को समानांतर क्रम (Parallel Combination) में जोड़ा जाता है ताकि प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर मिल सके और एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरणों के कार्य पर कोई प्रभाव न पड़े। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मानव शरीर में वृहत् पोषक तत्वों (Macronutrients) और सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) के उपापचय तथा जैव-रासायनिक कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन C) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोलेजन (Collagen) प्रोटीन के हाइड्रॉक्सीलेशन के लिए एक आवश्यक सह-एंजाइम के रूप में कार्य करता है, और इसकी कमी से संयोजी ऊतकों की कमजोरी तथा स्कर्वी रोग उत्पन्न होता है। 2. ट्रिप्टोफैन एक आवश्यक अमीनो अम्ल है, जिससे मानव शरीर में 'नियासिन' (विटामिन B3) और 'सेरोटोनिन' न्यूरोट्रांसमीटर का जैव-संश्леषण होता है, तथा इसकी पूर्ण कमी से 'पेलॅग्रा' (Pellagra) रोग हो सकता है। 3. वसा-विलेय विटामिन 'टोकॉफेरॉल' (विटामिन E) एक शक्तिशाली अंतःकोशिकी एंटीऑक्सीडेंट है जो कोशिका झिल्ली में पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स को पेरोक्सीडेशन से बचाता है, और इसकी कमी से पुरुषों में बंध्यापन तथा महिलाओं में गर्भपात की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। 4. कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान 'थायमिन' (विटामिन B1) अपने सक्रिय सह-एंजाइम रूप यानी थायमिन पाइरोफॉस्फेट के रूप में पादप और जंतु कोशिकाओं में पाइरुवेट के एसिटाइल-कोएंजाइम-A में ऑक्सीडेटिव डीकार्बोक्सिलेशन को उत्प्रेरित नहीं करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विलयन के अणुसंख्यक गुणों और उत्प्रेरण (Catalysis) के रासायनिक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी तनु विलयन का परासरण दाब ($P$) उस विलयन की मोलर सांद्रता और परम तापमान के गुणनफल के समानुपाती होता है, जो 'वांट हॉफ समीकरण' (van 't Hoff equation) द्वारा व्यक्त किया जाता है और यह एक अणुसंख्यक गुण है। 2. जब किसी वैद्युत अपघट्य जैसे $NaCl$ को जल में घोला जाता है, तो इसके वियोजन के कारण वांट हॉफ गुणांक ($i$) का प्रायोगिक मान 1 से कम प्राप्त होता है, क्योंकि आयन आपस में मिलकर युग्म बना लेते हैं। 3. जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक ($TiCl_4$ और $Al(C_2H_5)_3$ का मिश्रण) का उपयोग उच्च घनत्व पॉलीथीन (HDPE) के संश्लेषण में 'विषमांग उत्प्रेरण' के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में किया जाता है। 4. एंजाइम उत्प्रेरण की 'प्रेरित फिट परिकल्पना' (Induced Fit Hypothesis) यह दर्शाती है कि एंजाइम का सक्रिय स्थल कठोर और अपरिवर्तनीय होता है, जिसमें सबस्ट्रेट के जुड़ने पर भी उसकी संरचना में कोई बदलाव नहीं आता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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