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Geography
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भारत की मिट्टियों और उनके वितरण, रासायनिक गुणों तथा कृषि संबंधी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'शुष्क और मरुस्थलीय मृदा' (Arid Soils) मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है, जिसमें घुलनशील लवणों और कैल्शम कार्बोनेट की अधिकता होती है, तथा नीचे की परतों में कैंचुओं या कंकड़ की परत (Kankar Layer) पाए जाने के कारण इसमें जल का अंतःस्यंदन (Infiltration) सीमित होता है।
  2. 2. 'पीठ और दलदली मृदा' (Peaty and Marshy Soils) भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में मृत जैविक पदार्थों के संचय से विकसित होती है, जिसमें ह्यूमस की मात्रा 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है और ये मृदाएँ सामान्यतः अम्लीय प्रकृति की होती हैं।
  3. 3. 'लाल और पीली मृदा' में फेरिक ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण उसका रंग लाल होता है, किंतु जब यह मृदा जलयोजित (Hydrated) रूप में पाई जाती है, तब यह पीले रंग की दिखाई देती है और यह प्रायद्वीपीय पठार के उच्च भागों की तुलना में घाटियों में अधिक उपजाऊ होती है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'जलोढ़ मृदा' (Alluvial Soil) भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा (लगभग 43%) कवर करती है, जो देश के उत्तरी मैदानों और नदी घाटियों में विस्तृत है तथा नाइट्रोजन और ह्यूमस की प्रचुरता के कारण धान की खेती के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: शुष्क और मरुस्थलीय मृदा पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है। इसमें कैल्सियम कार्बोनेट की मात्रा बढ़ने के कारण नीचे की परतों में कंकड़ की परत (Kankar Layer) पाई जाती है, जो जल के अंतःस्यंदन को अवरुद्ध करती है। कथन 2 सही है: पीठ और दलदली मृदाएँ भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में भारी मात्रा में मृत जैविक पदार्थों के जमा होने से बनती हैं, जिनमें ह्यूमस की मात्रा 40-50% तक होती है और ये अम्लीय प्रकृति की होती हैं (उदाहरण के लिए केरल का कोट्टायम और अलप्पुषा क्षेत्र)। कथन 3 सही है: लाल और पीली मृदा रवेदार आग्नेय चट्टानों के विखंडन से बनती है। फेरिक ऑक्साइड के कारण यह लाल दिखती है और जलयोजन के बाद पीली हो जाती है; ये निचले और घाटी क्षेत्रों में अधिक उपजाऊ होती हैं। कथन 4 गलत है: यद्यपि जलोढ़ मृदा भारत के सबसे बड़े क्षेत्र (लगभग 43%) पर फैली हुई है और देश के कृषि उत्पादन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, किंतु भारतीय जलोढ़ मृदाओं में **नाइट नाइट्रोजन (Nitrogen) और ह्यूमस की कमी** होती है, हालांकि इनमें पोटाश, फॉस्फोरिक एसिड और चूना प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में मृदा के वर्गीकरण और उनके वितरण का विस्तृत अध्ययन किया गया है। अतः केवल कथन 1, 2 और 3 सही हैं।
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