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Geography
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भारत की प्रमुख झीलों, जलप्रपातों और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'लोकटक झील' पूर्वोत्तर भारत की मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है, जो मणिपुर में स्थित है और इसी झील के अंदर 'केइबुल लामजाओ' नामक विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान स्थित है, जहाँ लुप्तप्राय 'संगाई' हिरण पाया जाता है।
- 2. शरावती नदी पर कर्नाटक में स्थित 'गेरसोप्पा (जोग) जलप्रपात' भारत का सबसे ऊँचा सीधा (Plunge) गिरने वाला जलप्रपात है, और इसी नदी पर जलविद्युत उत्पादन के लिए 'महात्मा गांधी जलविद्युत परियोजना' का निर्माण किया गया है।
- 3. 'सरदार सरोवर परियोजना' नर्मदा नदी पर गुजरात में स्थित एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसका लाभ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान राज्यों को मिलता है, तथा यह परियोजना 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' के कारण पर्यावरणीय विवादों का केंद्र रही थी।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम (मानव निर्मित) झील 'गोविंद बल्लभ पंत सागर' है, जो रिहंद नदी पर रिहंद बांध के निर्माण से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बनी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. लोकटक झील मणिपुर में स्थित है और यह फुमदि (सड़ती वनस्पति और मिट्टी के तैरते हुए द्वीप) तथा केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान के लिए प्रसिद्ध है। 2. शरावती नदी पर स्थित जोग (गेरसोप्पा) जलप्रपात भारत के सबसे प्रसिद्ध और ऊंचे झरनों में से एक है, जहाँ महात्मा गांधी जलविद्युत स्टेशन संचालित है। 3. सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा नदी पर स्थित एक विशाल बहुउद्देशीय परियोजना है जो चार राज्यों को जल और विद्युत आपूर्ति करती है। 4. रिहंद बांध (गोविंद बल्लभ पंत सागर) भारत की सबसे बड़ी मानव निर्मित कृत्रिम झील है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत के जल संसाधन और झीलें देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Related Questions
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पवन प्रणालियों, आर्द्रता, वर्षा के प्रकार और चक्रवात के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रोज़बी तरंगें' (Rossby Waves) क्षोभमंडल के ऊपरी स्तरों और समताप मंडल में प्रवाहित होने वाली लंबी वायुमंडलीय तरंगें हैं, जो पृथ्वी के घूर्णन (कोरिऑलिस प्रभाव) और तापमान प्रवणता के कारण जेट स्ट्रीम के मार्ग में विशाल वक्रों (Meanders) के रूप में उत्पन्न होती हैं।
2. 'अभिसारी वर्षा' (Convectional Rainfall) मुख्य रूप से भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में दैनिक रूप से दोपहर बाद होने वाली वर्षा है, जिसमें गर्म हवा ऊपर उठकर संघनित होती है और कपाशावर्षा मेघ (Cumulonimbus Clouds) गरज और चमक के साथ भारी वर्षा करते हैं।
3. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के केंद्र में 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) स्थित होती है, जो उच्च दाब (High Pressure) का क्षेत्र होती है जहाँ आकाश बिल्कुल साफ और हवा शांत होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों (Temperate Cyclones) का निर्माण ध्रुवीय वाताग्र (Polar Front) के सहारे गर्म और ठंडी वायु राशियों के मिलने से होता है, जिनका आकार अंडाकार या 'V' आकार का होता है और ये पछुआ हवाओं के प्रभाव से पश्चिम से पूर्व की ओर गति करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र और नदियों के मार्ग परिवर्तन (River Capture/Avulsion) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कोसी नदी', जिसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है, अपनी विसर्पी प्रवृत्ति और तीव्र गति से गाद (Silt) जमा करने के कारण पश्चिम से पूर्व की ओर अपने मार्ग में निरंतर पार्श्व विस्थापन (Lateral Migration) करती रही है, और यह अरुण, तमूर तथा सनकोश जैसी सहायक नदियों के साथ मिलकर सप्तकोसी का निर्माण करती है।
2. 'सिंधु नदी प्रणाली' में 'सतलुज', 'ब्यास', 'रावी', 'चिनाव' और 'झेलम' नदियाँ क्रमशः पाकिस्तान के मिठानकोट के पास सिंधु नदी में अपना जल गिराती हैं, और ये सभी नदियाँ हिमालय की पूर्ववर्ती (Antecedent) नदियों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं जो हिमालय के उत्थान से पहले से बह रही हैं।
3. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ मुख्य रूप से 'वृक्षाकार' (Dendritic) अपवाह पैटर्न का अनुसरण करती हैं, किंतु 'नर्मदा' और 'तापी' नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर बहने के कारण 'जालनुमा' (Trellis) या 'समांतर' (Parallel) अपवाह प्रतिरूप का निर्माण करती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में 'त्सांगपो' नाम से बहती है और अरुणाचल प्रदेश में 'दिबांग' तथा 'लोहित' नदियों के मिलने के बाद इसे मुख्य रूप से असम घाटी में 'ब्रह्मपुत्र' के नाम से जाना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें जल वर्षा के साथ-साथ पिघलती हुई बर्फ और ग्लेशियरों से प्राप्त होता है, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी (Seasonal) होती हैं और उनकी जल आपूर्ति पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर करती है।
2. प्रायद्वीपीय नदियाँ अपने विकास के अंतिम चरण में हैं और उन्होंने अपनी घाटियों में आधार तल (Base level) को प्राप्त कर लिया है, जिसके कारण वे विसर्पण (Meandering) जैसी स्थलाकृतियों का निर्माण करती हैं और अपने निचले मार्गों में विस्तृत जलोढ़ मैदानों का सृजन करती हैं।
3. कोसी नदी, जिसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है, अपने मार्ग परिवर्तन और भारी मात्रा में अवसाद (Silt) लाने के लिए कुख्यात है, और यह नदी महान हिमालय से निकलकर सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले गंगा की एक दाहिने तट की सहायक नदी बन जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और उनकी भू-पर्यावरणीय विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ओसियो जलधारा' (Oyashio Current), जिसे कुरीले जलधारा भी कहा जाता है, प्रशांत महासागर के उत्तर-पश्चिम में बहने वाली एक ठंडी जलधारा है, जो कामचटका प्रायद्वीप के सहारे दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है और क्यूरोशियो की गर्म जलधारा से मिलकर विश्व के सबसे समृद्ध मतस्यन (Fishing) क्षेत्रों में से एक का निर्माण करती है।
2. 'अगुलहास जलधारा' (Agulhas Current) हिंद महासागर की एक गर्म जलधारा है, जो अफ्रीका के पूर्वी तट (मोजांबिक चैनल के दक्षिण) के सहारे प्रवाहित होती है और दक्षिण अफ्रीका के तट पर पहुँचकर अटलांटिक महासागर की ठंडी बेगुला धारा में विलीन हो जाती है।
3. 'कैलिफोर्निया जलधारा' (California Current) उत्तरी प्रशांत महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जो उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है और इसके प्रभाव से इस क्षेत्र के तटीय भागों में कोहरा और शुष्क परिस्थितियों का निर्माण होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार एल निनो (El Nino) घटना के दौरान दक्षिण अमेरिकी तट के पास पेरू (हम्बोल्ट) ठंडी जलधारा के स्थान पर एक अस्थायी गर्म जलधारा का प्रवाह शुरू हो जाता है, जिससे वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण और दक्षिण-एशियाई मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं और उनके जल-प्रवाह पैटर्न के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि उन्हें जल वर्षा के अतिरिक्त हिमनदों (Glaciers) के पिघलने से भी प्राप्त होता है, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ अनित्य (Seasonal) या वर्षा-आधारित होती हैं जिनका प्रवाह ग्रीष्मकाल में काफी कम या समाप्त हो जाता है।
2. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ अपने विकास के परिपक्व चरण (Mature stage) में हैं और इन्होंने अपनी घाटियों में आधार तल (Base level) को लगभग प्राप्त कर लिया है, जिसके परिणामस्वरूप ये अपने निचले हिस्सों में अत्यधिक विसर्जन (Meandering) करती हैं और बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं।
3. 'कोसी नदी' को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जो अपना मार्ग बदलने के लिए कुख्यात है और यह नेपाल से निकलकर गंगा नदी में मिलने से पहले एक पूर्ववर्ती (Antecedent) नदी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
4. प्रायद्वीपीय नदियों में 'नर्मदा' और 'तापी' नदियाँ अपवाद स्वरूप पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं और डेल्टा बनाने के बजाय अरब सागर में ज्वारनदमुख (Estuaries) का निर्माण करती हैं, जो भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर प्रवाहित होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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