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Geography
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भारतीय जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति एवं वर्षा के स्थानिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'अरब सागर शाखा' पश्चिमी घाट से टकराने के कारण पश्चिमी तटीय मैदानों में भारी वर्षा करती है, परंतु पश्चिमी घाट के वृष्टिछाया क्षेत्र (Rain shadow area) में स्थित होने के कारण दक्कन के पठार का आंतरिक भाग इस मानसून से बहुत कम वर्षा प्राप्त करता है।
  2. 2. 'उत्तर-पूर्वी मानसून' या शीतकालीन मानसून मुख्य रूप से तमिलनाडु के तट (कोरोमंडल तट) पर वर्षा कराता है, जिसका प्रमुख कारण इस समय उत्तर-पूर्वी व्यापारिक हवाओं का बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करना और तट के समानांतर चलना है।
  3. 3. भारत में होने वाली कुल मानसूनी वर्षा का अधिकांश भाग 'दैनिक संवहन' (Diurnal Convection) और स्थानीय रूप से उत्पन्न होने वाली 'काल बैसाखी' (Kaal Baisakhi) जैसी तड़ित झंझावातों पर निर्भर करता है, जबकि मानसूनी गर्त की भूमिका इसमें नगण्य होती है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मानसून का 'विच्छेदन' या 'वर्षा में व्यवधान' (Break in Monsoon) वह स्थिति है जब ग्रीष्मकालीन मानसून के दौरान कुछ हफ़्तों तक लगातार वर्षा नहीं होती है, जो मुख्य रूप से मानसूनी गर्त (Monsoon Trough) के अपनी उत्तर की ओर (हिमालय की तलहटी में) खिसक जाने के कारण होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट के पवन-मुखी ढलानों पर भारी वर्षा करती है, जबकि वृष्टिछाया क्षेत्र (जैसे दक्कन का आंतरिक पठार) सूखा रहता है। कथन 2 सही है क्योंकि उत्तर-पूर्वी मानसून (शीतकालीन मानसून) बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरते समय नमी ग्रहण करता है और कोरोमंडल तट (तमिलनाडु) पर शीतकाल में वर्षा करता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि भारत में कुल मानसूनी वर्षा का 75% से अधिक भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिकी और मानसूनी गर्त (Monsoon Trough) के विस्थापन पर निर्भर करता है, न कि केवल स्थानीय संवहन या काल बैसाखी पर। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मानसून का विच्छेदन (Break in Monsoon) मानसूनी गर्त के हिमालय की तलहटी की ओर जाने के कारण होता है, जिससे उत्तर भारत में वर्षा रुक जाती है और पूर्वोत्तर तथा हिमालयी क्षेत्रों में भारी वर्षा होने लगती है। अतः कथन 4 सही है।
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