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Geography
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी भूवैज्ञानिक संरचना, और परमाणु तथा अपारंपरिक ऊर्जा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में थोरियम के सबसे बड़े भंडार केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की बालू में पाए जाने वाले 'मोनोजाइट' (Monazite) अयस्क के रूप में मौजूद हैं, जिनका उपयोग देश के तीन-चरण वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के द्वितीय चरण (फास्ट ब्रीड रिएक्टर) में प्लूटोनियम के साथ किया जाता है।
- 2. 'सिंहभूम क्रेटन' (Singhbhum Craton) और झारखंड का जादुगोड़ा क्षेत्र यूरेनियम खनन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन हाल ही में आंध्र प्रदेश के कडप्पा बेसिन के 'तुमलापल्ली' क्षेत्र में खोजे गए यूरेनियम निक्षेप देश के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक माने जाते हैं, जो कार्बोनेट चट्टानों में स्थित हैं।
- 3. भारत में 'लिग्नाइट कोयला' (Lignite Coal) के विशालतम भंडार तमिलनाडु के नेवेली बेसिन में पाए जाते हैं, इसके अलावा राजस्थान के बाड़मेर (पलाना और कपूरड़ी), गुजरात के कच्छ और पुदुचेरी में भी लिग्नाइट के निक्षेप मौजूद हैं, जबकि टर्शरी कोयला मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों तक सीमित है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत का पहला सफल और व्यावसायिक तेल कुआँ वर्ष 1889 में असम के 'डिगबोई' क्षेत्र में खोदा गया था, जो एशिया का सबसे पुराना कार्यरत तेलशोधन और उत्पादन केंद्र भी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सही हैं। प्रथम कथन के अनुसार, भारत में थोरियम का मुख्य स्रोत केरल व अन्य तटीय राज्यों की रेत में मिलने वाला मोनोजाइट है, जो भारत के स्वदेशी तीन-चरण (Three-Stage) परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ है। दूसरे कथन में उल्लिखित आंध्र प्रदेश का तुमलापल्ली (कडप्पा बेसिन) दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में गिना जाता है और यह कार्बोनेट-डोलोमाइट चट्टानों से जुड़ा है। तीसरे कथन के अनुसार, भारत में टर्शरी कोयले के अलावा लिग्नाइट (भूरा कोयला) के प्रमुख भंडार तमिलनाडु (नेवेली) और राजस्थान (बाड़मेर) में केंद्रित हैं। चौथा कथन सही है क्योंकि असम का डिगबोई भारत और एशिया का सबसे पुराना तेल उत्पादक क्षेत्र है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार देश के ऊर्जा और खनिज संसाधनों का यह भूवैज्ञानिक वितरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Related Questions
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भारत की मृदाओं (मिट्टी) के वर्गीकरण, उनके खनिज संगठन, निर्माण प्रक्रियाओं और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीली मृदाओं (Red and Yellow Soils) का लाल रंग मुख्य रूप से रवेदार और कायांतरित चट्टानों में लौह ऑक्साइड (Iron Oxide) के व्यापक प्रसार के कारण होता है, जबकि जल योजन (Hydration) के बाद यही मृदा रासायनिक रूप से पीली दिखाई देती है, और इस मृदा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा ह्यूमस की गंभीर कमी होती है।
2. शुष्क और मरुस्थलीय मृदाओं (Arid and Desert Soils) में घुलनशील लवणों और कैल्शम कार्बोनेट की अधिकता के कारण नीचे की पर्तों में कैंचियों (Kankar) की परत पाई जाती है, जिसके कारण इस मृदा में नीचे की ओर जल का अंतःस्यंदन (Infiltration) पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है और यह कृषि के लिए पूर्णतः अनुपयुक्त होती है।
3. पीटमय और दलदली मृदाओं (Peaty and Marshy Soils) का विकास भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मृत कार्बनिक पदार्थों के जमा होने से होता है, जिसके कारण इन मृदाओं में 40 से 50 प्रतिशत तक घुलनशील ह्यूमस और अत्यधिक मात्रा में क्षारीय लवण पाए जाते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और भारी वर्षा के बीच वैकल्पिक रूप से शुष्क और आर्द्र स्थितियों के दौरान होने वाले तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका का पूर्णक्षय हो जाता है और केवल आयरन व एल्युमिनियम के ऑक्साइड ही शेष बचते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सौर मंडल के ग्रहों, उनके उपग्रहों और क्षुद्रग्रहों की गतिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बृहस्पति का उपग्रह 'गैनीमेड' (Ganymede) हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह है, और इसका आकार बुध ग्रह से भी बड़ा है, तथा इसमें आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र भी पाया जाता है।
2. 'काइटर बेल्ट' (Kuiper Belt) नेपच्यून की कक्षा के पार सूर्य की परिक्रमा करने वाले बर्फीले पिंडों और धूमकेतुओं का एक विस्तृत क्षेत्र है, जिसमें स्थित 'प्लूटो' को अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा वर्ष 2006 में बौने ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
3. क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt) मुख्य रूप से बृहस्पति और शनि ग्रहों की कक्षाओं के मध्य स्थित है, जहाँ हज़ारों छोटे चट्टानी पिंड सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत की जनगणना 2011 और जनसंख्या वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत के 'उत्तर प्रदेश' राज्य में देश की कुल जनसंख्या का सर्वाधिक प्रतिशत (लगभग 16.5%) निवास करता है, जबकि क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद राजस्थान का स्थान जनसंख्या के मामले में सातवां है।
2. भारत में जनसंख्या घनत्व (Population Density) लगातार बढ़ रहा है; वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राष्ट्रीय औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर दर्ज किया गया था, जिसमें 'बिहार' राज्य का जनसंख्या घनत्व सभी राज्यों में सर्वाधिक (1,106 व्यक्ति/वर्ग किमी) था।
3. 'दशकीय वृद्धि दर' (Decennial Growth Rate) के मामले में वर्ष 2001-2011 के दौरान देश की जनसंख्या में 17.64% की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसमें पूर्वोत्तर के राज्य 'मेघालय' में सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर (27.9%) दर्ज की गई थी।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना के वक्त भारत की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों (Scheduled Castes) का हिस्सा लगभग 16.6% और अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) का हिस्सा लगभग 8.6% था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों और प्रमुख फसलों के पैटर्न के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के अंतर्गत 'हर खेत को पानी' और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और फव्वारा सिंचाई) को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे जल-उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
2. भारत में 'झूम कृषि' (Jhum Cultivation) जिसे 'स्थानांतरित कृषि' (Shifting Cultivation) भी कहा जाता है, मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों के पहाड़ी क्षेत्रों में अपनाई जाती है, जो मृदा की उर्वरता को दीर्घकाल तक बनाए रखने के लिए सबसे वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल स्थायी कृषि पद्धति मानी जाती है।
3. 'धान की सीधी बुवाई' (Direct Seeded Rice - DSR) पारंपरिक रूप से की जाने वाली रोपाई (Puddling) विधि की तुलना में भूजल के अत्यधिक दोहन को कम करती है, श्रम की लागत को घटाती है और मीथेन गैस के वैश्विक उत्सर्जन में भी कमी लाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'रबी' फसलों की बुवाई शीतकाल के आरंभ (अक्टूबर-नवंबर) में की जाती है और इनकी कटाई वसंत ऋतु या ग्रीष्मकाल के आगमन (मार्च-अप्रैल) पर संपन्न होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत में सिंचाई अवसंरचना, कृषि पद्धतियों और बहु-फसलीय प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के 'सकल सिंचित क्षेत्र' (Gross Irrigated Area) में कुओं और नलकूपों (Wells and Tube wells) का हिस्सा सर्वाधिक है, जिसके बाद दूसरा प्रमुख स्थान नहरों (Canals) का आता है, और कुल सिंचित क्षेत्र के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य देश में शीर्ष स्थान पर है।
2. 'धान की गहनता प्रणाली' (System of Rice Intensification - SRI) पारंपरिक रोपाई विधि की तुलना में अधिक जल की खपत करती है, क्योंकि इसमें पौधों को लगातार पानी से भरे खेतों में रखना अनिवार्य होता है।
3. 'जीरो टिलेज' (Zero Tillage) या शून्य जुताई कृषि तकनीक मृदा के स्वास्थ्य और नमी के संरक्षण में अत्यधिक प्रभावी है, क्योंकि इसमें खेत की पारंपरिक जुताई किए बिना और पिछली फसल के अवशेषों को जलाए बिना सीधे ही सीड-ड्रिल मशीन से नई फसल की बुवाई की जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना' (PMKSY) के 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) घटक का मुख्य उद्देश्य जल के उपयोग की दक्षता में सुधार करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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