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General Science
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लंबी नदी?

Detailed Explanation

नील।
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→ सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं के कोशिकांगों (Cell organelles) और कोशिका कंकाल (Cytoskeleton) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) के खुरदरे भाग (RER) पर राइबोसोम की सतह से जुड़ने के लिए 'राइबोफोरिन-I' और 'राइबोफोरिन-II' नामक विशिष्ट ग्लाइकोप्रोटीन पाए जाते हैं, जो प्रोटीन संश्लेषण और उनके परिवहन में सहायता करते हैं। 2. गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus) का 'सिस नेटवर्क' (Cis-face) आमतौर पर परिपक्व या बनाने वाला सिरा (Maturing face) कहलाता है जो केंद्रक की ओर उन्मुख होता है, जबकि 'ट्रांस नेटवर्क' (Trans-face) प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है। 3. सूక్ష్मनलिकाएँ (Microtubules) ट्यूबुलिन प्रोटीन से बने खोखले बेलनाकार तंतु होते हैं, जो कोशिका विभाजन के दौरान तर्कु तंतुओं (Spindle fibers) का निर्माण करते हैं और पक्ष्माभ (Cilia) तथा कशाभिका (Flagella) की '9+2' व्यवस्था में मुख्य संरचनात्मक घटक बनाते हैं। 4. परऑक्सिसोम (Peroxisome) एकल झिल्ली से घिरा कोशिकांग है जिसमें 'कैटेलेज' और 'ऑक्सीडेज' जैसे एंजाइम होते हैं, जो हानिकारक हाइड्रोजन पेरोक्साइड ($H_2O_2$) को जल और ऑक्सीजन में विघटित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के सैद्धांतिक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, और सभी धनावेशित आयन तथा वे यौगिक जिनमें केंद्रीय परमाणु का अष्टक अपूर्ण होता है (जैसे $BF_3$), इस श्रेणी में आते हैं। 2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) अत्यधिक दुर्बल होता है, तथा एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है। 3. जब किसी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट) का जल-अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति अम्लीय होती है और उसका pH मान 7 से कम होता है। 4. शुद्ध जल का स्व-आयनन (Self-ionization) एक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) प्रक्रिया है, जिसके कारण तापमान बढ़ाने पर जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) घट जाता है और शुद्ध जल का pH मान 7 से अधिक हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी परमाणु की आयनन एंथैल्पी (Ionization Enthalpy) वह ऊर्जा है जो गैसीय अवस्था में एक विलगित परमाणु से सबसे ढीले बंधे इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है, और आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण इसका मान सामान्यतः बढ़ता जाता है। 2. 'परमाणु त्रिज्या' (Atomic Radius) के आवर्तिता के अनुसार, किसी आवर्त में क्षार धातुओं (Group 1) का आकार सबसे बड़ा और हैलोजेन (Group 17) का आकार सबसे छोटा होता है, क्योंकि आवर्त में आगे बढ़ने पर नए कक्ष (Shell) जुड़ते हैं जो आकार को बढ़ाते हैं। 3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक) में बाएं से दाएं जाने पर परमाण्विक त्रिज्याओं में परिवर्तन बहुत कम होता है, जिसका मुख्य कारण आंतरिक कक्षकों (जैसे 3d या 4d) के इलेक्ट्रॉनों द्वारा 'परिरक्षण प्रभाव' (Shielding Effect) का नागण्य होना और नाभिकीय आकर्षण का संतुलित रहना है। 4. पॉलिंग पैमाने के अनुसार विद्युतऋणाता (Electronegativity) किसी सहसंयोजक बंध में साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को दर्शाती है, और आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे आने पर मुख्य क्वांटम संख्या बढ़ने के कारण यह घटती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'भर्जन' (Roasting) वह प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा में उसके गलनांक बिंदु से नीचे गर्म किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं और वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं। 2. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite welding) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) के साथ तीव्र अभिक्रिया करके पिघला हुआ लोहा उत्पन्न करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता आयरन से बहुत अधिक होती है। 3. 'जिंकोसाइट' (Zincite) और 'कैलेमीन' (Calamine) दोनों ही जिंक के प्रमुख अयस्क हैं, जिनमें से कैलेमीन एक कार्बोनेट अयस्क है जिसके निष्कर्षण के लिए निस्तापन (Calcination) प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → पदार्थ के सामान्य गुण, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी द्रव की स्वतंत्र सतह पर पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का कारण अणुओं के बीच लगने वाले ससंजक बल (Cohesive force) होते हैं, और जब तापमान में वृद्धि की जाती है, तो द्रव का पृष्ठ तनाव आमतौर पर घट जाता है क्योंकि तापीय ऊर्जा अणुओं के बीच आकर्षण बल को प्रभावी रूप से कम कर देती है। 2. द्रवों में श्यानता (Viscosity) आंतरिक घर्षण के कारण होती है, जहाँ तापमान बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घट जाती है, जबकि गैसों की श्यानता तापमान बढ़ने के साथ बढ़ जाती है। 3. आर्किमिडीज के सिद्धांत (Archimedes' Principle) के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है, और इस बल का केंद्र विस्थापित द्रव के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है जिसे 'उत्प्लावन केंद्र' (Centre of Buoyancy) कहा जाता है। 4. यदि किसी केशिका नली (Capillary tube) को पानी में डुबोया जाता है, तो पानी नली के भीतर ऊपर चढ़ जाता है और इस प्रघटना में नली की त्रिज्या बढ़ने पर केशिका नली में द्रव के चढ़ने की ऊँचाई बढ़ जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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