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History of India
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गुप्तोत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गुप्त काल में 'श्रेणी' (Guilds) नामक संस्थाएं व्यापारियों और शिल्पकारों के संगठन के रूप में कार्य करती थीं, जिन्हें अपनी खुद की न्यायिक शक्तियां प्राप्त थीं और वे अपने सदस्यों के आचरण का नियमन करती थीं।
  2. 2. फाह्यान (Fa-hsiang) के विवरण के अनुसार, इस काल में भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से वस्तु-विनिमय (Barter System) पर आधारित हो चुकी थी और दैनिक लेन-देन में सोने के सिक्कों का उपयोग आम नागरिकों द्वारा धड़ल्ले से किया जाता था।
  3. 3. गुप्त सम्राटों के शासनकाल में 'भूमि अनुदान' (Land Grants) की प्रथा में व्यापक विस्तार हुआ, जिसके फलस्वरूप सामंती व्यवस्था (Feudalism) के बीज पड़े और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला।
  4. 4. गुप्त काल में संस्कृत भाषा को राजकीय संरक्षण और अत्यधिक प्रोत्साहन प्राप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कालिदास, शूद्रक और वाराहमहिहिर जैसे महान विद्वानों ने इसी काल में अपनी अमूल्य साहित्यिक कृतियों की रचना की थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

गुप्त साम्राज्य (Gupta Empire) के दौरान व्यापार और वाणिज्य के लिए 'श्रेणी' (Guilds) अत्यंत शक्तिशाली संगठन थीं जिन्हें अपने आंतरिक विवादों को सुलझाने का अधिकार था। चीनी यात्री फाह्यान के विवरण से यह पता चलता है कि व्यापार में कौड़ियों का उपयोग दैनिक लेन-देन के लिए बहुतायत में होता था और सोने के सिक्के (दीनार) उच्च वर्गीय लेन-देन या संचय के लिए थे, इसलिए कथन 2 गलत है। इस काल में बड़े पैमाने पर ब्राह्मणों और मंदिरों को भूमि दान दी गई, जिससे सामंतवाद को बढ़ावा मिला। कालिदास जैसे नवरत्न और अन्य साहित्यकार इसी स्वर्ण युग की देन हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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