त्वरित लिंक्स
History of India
16 views
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह के दमन और उनके नेतृत्वकर्ताओं के मिलान के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. दिल्ली - जॉन निकलसन और हडसन
- 2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस
- 3. झाँसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज
- 4.
कानपुर - मेजर जनरल विलियम हैवलॉक उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अपने कई अनुभवी और क्रूर सैन्य अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में भेजा था। दिल्ली में विद्रोह का दमन जॉन निकलसन और मेजर विलियम हडसन ने किया था (निकलसन दिल्ली पर पुनः अधिकार करते समय गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी मृत्यु हो गई थी)। लखनऊ में विद्रोह का दमन करने वालों में हेनरी लॉरेंस (प्रारंभ में मारे गए), जेम्स आउट्राम, हेवलॉक और अंततः सर कॉलिन कैंपबेल शामिल थे। झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के विरुद्ध ब्रिटिश सेना का नेतृत्व विकिपीडिया संदर्भ (सर ह्यूरोज) ने किया था, जिसने झाँसी की रानी की वीरता से प्रभावित होकर कहा था कि 'वह विद्रोहियों में सोई हुई एकमात्र मर्द थी'। कानपुर में विद्रोह का दमन करने वाले प्रमुख अधिकारी सर कॉलिन कैंपबेल और हैवलॉक थे, न कि केवल हैवलॉक। अतः युग्म 1, 2 और 3 सही सुमेलित हैं।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश देशी रियाسतों के शासकों और सामंतों में एक अखिल भारतीय दृष्टिकोण और केंद्रीय योजना का पूर्ण अभाव था, तथा वे अंग्रेजों के विरुद्ध एकीकृत होकर लड़ने के बजाय केवल अपने खोए हुए क्षेत्रों और अधिकारों को पुनः प्राप्त करने तक सीमित रहे।
2. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा औपचारिक रूप से भारत का सम्राट घोषित तो किया गया था, किंतु वृद्ध और प्रभावहीन होने के कारण वे विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले विद्रोही सैनिकों और सेनापतियों के बीच आवश्यक सैन्य समन्वय स्थापित करने में पूर्णतः असमर्थ रहे।
3. आधुनिक सैन्य उपकरणों, संचार के साधनों (टेलीग्राफ और रेलवे) तथा प्रशिक्षित सैनिकों की कमी के कारण विद्रोही अंग्रेज सेना की संगठित सामरिक शक्ति और आधुनिक हथियारों का लंबे समय तक मुकाबला नहीं कर सके।
4. विद्रोह के दौरान अधिकांश शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और आधुनिक पश्चिमी शिक्षा प्राप्त भारतीयों ने क्रांतिकारियों की वैचारिक और आर्थिक सहायता की, क्योंकि वे ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण से पूरी तरह तंग आ चुके थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से संस्कृत के उच्च वर्गीय एकाधिकार को चुनौती देते हुए स्थानीय तमिल भाषा को भक्ति प्रचार का मुख्य माध्यम बनाया।
2. सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा भारत में स्थापित 'चिश्ती सिलसिले' ने राज्य की सत्ता से पूर्ण अलगाव और सख्त वैराग्य की नीति अपनाते हुए किसी भी प्रकार के राजकीय अनुदान, जागीर या उपहार को लेने से स्पष्ट इंकार कर दिया था, जबकि सुहरवर्दी सिलसिले ने राजाओं से आर्थिक सहायता स्वीकार की थी।
3. निर्गुण भक्ति धारा के महान संत कबीर ने जाति व्यवस्था, बाह्य आडंबरों और मूर्तिपूजा का कड़ा विरोध करते हुए हिन्दू और मुस्लिम दोनों संप्रदायों के रूढ़िवादी तत्वों पर तीखा प्रहार किया, और उनकी साखियों व पदों का मुख्य संकलन उनके शिष्य धर्मदास द्वारा 'बीजक' के रूप में किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान व्यवस्था (Land Grants) और प्रशासनिक शब्दावली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में राजा द्वारा ब्राह्मणों, मंदिरों और अधिकारियों को दिए जाने वाले भूमि अनुदानों को 'अग्रहार' या 'ब्रह्मदेय' कहा जाता था, जिसके तहत अनुदान प्राप्तकर्ताओं को प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार भी सौंप दिए गए, जिससे सामंती प्रवृत्तियों (Feudal tendencies) के बीज पड़े।
2. इस काल में भूमि की माप और उसके वर्गीकरण के लिए 'क्षेत्र' (खेती योग्य भूमि), 'वापस' (निवास योग्य भूमि), 'अप्राहत' (जंगल या बिना जोती गई भूमि) और 'गोपथ' (चारागाह भूमि) जैसी श्रेणियों का उल्लेख मिलता है, तथा भूमि के क्रय-विक्रय की अनुमति केवल स्थानीय पंचायतों या नगरश्रेठियों द्वारा दी जाती थी।
3. गुप्त राजवंश के शासकों द्वारा जारी किए गए सोने के सिक्कों को 'दीनार' कहा जाता था, जो कुषाणों की तुलना में अधिक शुद्ध थे, किंतु स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद से जारी किए गए स्वर्ण सिक्कों में सोने की मात्रा में भारी गिरावट और मिलावट (Debasement of currency) स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
4. गुप्त प्रशासन में प्रांतीय शासकों को 'उपरिक' कहा जाता था, जो सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी होते थे, तथा जिला प्रशासन के प्रमुख अधिकारी को 'विषयपति' कहा जाता था जो स्थानीय नगर निकायों और कुलीन वर्गों के सहयोग से प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
गुप्तकालीन प्रशासन, राजस्व प्रणाली तथा आर्थिक जीवन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भूमि की माप और उसके वर्गीकरण के लिए 'क्षेत्र' (कृषि योग्य भूमि), 'वापस' या 'वाप्र' (माप की इकाई), और 'अखिल' (बिना जोती गई या परती भूमि) जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता था।
2. गुप्त सम्राटों के शासनकाल में राजा को मिलने वाला भू-राजस्व (कर) सामान्यतः उपज का 1/6 से 1/4 भाग होता था, जिसे 'भाग' या 'भोग' कहा जाता था, जबकि संकटकालीन स्थिति में 'हिरण्य' (नकद कर) और 'उद्रंग' (स्थाई कर) वसूले जाते थे।
3. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में आंतरिक और बाह्य व्यापार दोनों का उल्लेख मिलता है, जहाँ पश्चिमी रोमन साम्राज्य के पतन के बाद भारतीय व्यापारियों ने दक्षिण-पूर्व एशिया (सुवर्णद्वीप) के साथ समुद्री व्यापार को अधिक बढ़ावा दिया, जिससे ताम्रलिप्ती और भृगुकच्छ (बरूच) प्रमुख बंदरगाह के रूप में उभरे।
4. गुप्त साम्राज्य में पुलिस और आंतरिक सुरक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को 'महादंडनायक' कहा जाता था, तथा न्याय प्रशासन अत्यंत कठोर था जिसमें गुप्तचर विभाग के अधिकारियों को 'दूताभिसारिका' कहा जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.