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History of India
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गदर पार्टी और क्रांतिकारी राष्ट्रवाद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लाला हरदयाल ने वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' की स्थापना की थी, जिसके द्वारा निकाले जाने वाले साप्ताहिक पत्र 'गदर' का पहला अंक मुख्यतः उर्दू में प्रकाशित हुआ था।
- 2. कामागाटा मारू प्रकरण (1914) के दौरान गुरुदत्त सिंह द्वारा किराए पर लिए गए जापानी जहाज को कनाडा के वेंकूवर बंदरगाह पर रोक लिया गया था, और वापसी पर जब यह जहाज बजबज (कलकत्ता) पहुंचा, तो ब्रिटिश पुलिस के साथ हुई झड़प में कई यात्री मारे गए थे।
- 3. गदर पार्टी के क्रांतिकारियों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में तैनात भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह भड़काने और 'युगांतर आश्रम' के माध्यम से सशस्त्र क्रांति की योजना बनाई थी, जिसे 'गदर षड्यंत्र' कहा जाता है।
- 4. वर्ष 1915 में लाहौर षड्यंत्र केस के दौरान रास बिहारी बोस को गिरफ्तार कर अंग्रेजों द्वारा फांसी दे दी गई थी, जिसके बाद गदर आंदोलन का नेतृत्व पूरी तरह से समाप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि 'गदर' समाचार पत्र का पहला अंक 1 नवंबर 1913 को सैन फ्रांसिस्को से मुख्य रूप से **उर्दू** में नहीं बल्कि **गुरुमुखी (पंजाबी)** में प्रकाशित हुआ था, जिसे बाद में हिंदी, गुजराती और पश्तो में भी निकाला गया। कथन 2 सत्य है; कामागाटा मारू जापानी जहाज को वेंकूवर में प्रवेश नहीं दिया गया और वापसी पर बजबज बंदरगाह पर पुलिस संघर्ष में कई गदर समर्थक शहीद हुए। कथन 3 सत्य है कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर पार्टी के नेताओं ने सैनिकों में असंतोष फैलाकर सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाई थी जिसे गदर षड्यंत्र कहा जाता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि लाहौर षड्यंत्र केस के बाद रास बिहारी बोस अंग्रेजों की पकड़ से बचकर जापान चले गए थे, उन्हें फांसी नहीं दी गई थी। इस आंदोलन के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और आजाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना हुई थी, जिनमें बलिया (चित्तू पाण्डू के नेतृत्व में), ताम्रलि्क (बंगाल) और सतारा (प्रति सरकार) सबसे प्रमुख थीं, जहाँ समानांतर प्रशासन चलाया गया।
2. जापान की सहायता से गठित प्रथम 'आजाद हिंद फौज' (INA) की स्थापना का मूल विचार और इसका औपचारिक गठन रास बिहारी बोस के प्रयासों से टोक्यो सम्मेलन और बैंकॉक सम्मेलन के दौरान किया गया था, न कि सीधे तौर पर सुभाष चंद्र बोस द्वारा।
3. जब सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से दक्षिण-पूर्व एशिया (सिंगापुर) की यात्रा की और रास बिहारी बोस से कमान अपने हाथ में ली, तब उन्होंने 'दिल्लीचलो' और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा' का प्रसिद्ध नारा देकर आईएनए को एक नई सैन्य ऊर्जा प्रदान की।
4. भारत छोड़ो आंदोलन और आजाद हिंद फौज दोनों ने मिलकर ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिला दिया था, तथा वर्ष 1945 के अंत में लाल किले (Red Fort Trials) में INA के अधिकारियों—शाहनवाज खान, प्रेम सहगल और गुरदयाल सिंह ढिल्लों—पर चले मुकदमे के दौरान देश में अभूतपूर्व राष्ट्रवादी एकता देखने को मिली थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अकबर के काल में "मीर बख्शी" किस विभाग का प्रधान होता था?
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में लोहे के व्यापक ज्ञान (जिसे 'कृष्ण अयस' कहा गया है) के कारण कृषि अर्थव्यवस्था अत्यधिक उन्नत हो गई थी, जिसके फलस्वरूप स्थायी बस्तियों का तेजी से विकास हुआ।
2. उत्तर वैदिक काल में 'गोत्र' संस्था का प्रादुर्भाव हुआ, जिसका मूल अर्थ वह स्थान था जहाँ समूचे कुल का गोधन पाला जाता था, किंतु बाद में इसका संबंध एक ही मूल पुरुष से उत्पन्न लोगों के रक्त-संबंध से जुड़ गया।
3. ऋग्वैदिक काल में राजा की शक्ति पर नियंत्रण रखने के लिए 'सभा' और 'समिति' नामक संस्थाएँ सक्रिय थीं, जिनमें 'समिति' केंद्रीय राजनीतिक सभा थी जिसमें आम जनता (विश) भाग लेती थी और राजा के निर्वाचन में भी भूमिका निभाती थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह के पास न तो कोई सुनियोजित अखिल भारतीय राजनीतिक दृष्टिकोण था और न ही भविष्य के आधुनिक प्रशासनिक व सामाजिक ढांचे का कोई स्पष्ट वैकल्पिक खाका, जिसके कारण यह विशुद्ध रूप से सत्ता के विकेंद्रीकृत और पारंपरिक ताकतों का संघर्ष बनकर रह गया।
2. यद्यपि मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को प्रतीकात्मक रूप से भारत का सम्राट घोषित किया गया था, किंतु विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों (जैसे झाँसी, कानपुर, लखनऊ और आरा) के विद्रोही नेताओं के बीच किसी भी प्रकार के केंद्रीय समन्वय, दीर्घकालिक सैन्य योजना और रणनीतिक एकता का पूर्ण अभाव था।
3. अधिकांश आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग, पश्चिम-शिक्षित बुद्धिजीवियों तथा अधिकांश देशी रियासतों के शासकों (जैसे हैदराबाद के निजाम, सिंधिया, होलकर और नेपाल के राणा) ने ब्रिटिश सत्ता के साथ निष्ठा बनाए रखी और विद्रोहियों के दमन में अंग्रेजों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय सहायता प्रदान की।
4. विद्रोह का भौगोलिक और सामाजिक प्रसार मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तथा पारंपरिक सैनिकों तक ही सीमित रहा, जबकि दक्षिण भारत, पंजाब और पश्चिमी भारत का अधिकांश भाग या तो शांत रहा या अंग्रेजों के प्रति वफादार बना रहा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पुरंदर की संधि के तहत शिवाजी महाराज को अपने कितने किले मुगलों को सौंपने पड़े थे?
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