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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और ब्रिटिश सत्ता के विस्तार के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को वर्ष 1600 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा एक शाही चार्टर (राजकीय अधिकार पत्र) प्रदान किया गया था, जिसके तहत उसे पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने का एकाधिकार अनिश्चित काल के लिए बिना किसी शर्त के प्राप्त हो गया था।
- 2. वर्ष 1615 में किंग जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में भारत आए सर थॉमस रो ने मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार में उपस्थित होकर अंग्रेजों के लिए सूरत में कारखाना स्थापित करने और पूरे मुगल साम्राज्य में व्यापारिक छूट प्राप्त करने का शाही फरमान हासिल किया था।
- 3. कर्नाटक के प्रथम युद्ध (1746-48) के दौरान सेंट थॉम का युद्ध (Battle of Mylapore) विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें फ्रांसीसी सेना ने अनवरुद्दीन (नवाब ऑफ़ कर्नाटक) की विशाल सेना को पराजित कर यह साबित कर दिया कि प्रशिक्षित यूरोपीय सैनिक भारतीय शासकों की पारंपरिक और भारी-भरकम सेनाओं पर भारी पड़ सकते हैं।
- 4. वर्ष 1757 के प्लासी के युद्ध के पश्चात ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल के तत्कालीन नवाब मीर कासिम द्वारा वर्धमान, मिदनापुर और चटगांव जैसे समृद्ध जिलों की जमींदारी (राजस्व अधिकार) स्थायी रूप से सौंप दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा 31 दिसंबर 1600 को दिए गए प्रारंभिक चार्टर में कंपनी को केवल 15 वर्षों के लिए व्यापारिक एकाधिकार दिया गया था, जिसे बाद में ब्रिटिश संसद द्वारा समय-समय पर संशोधित और नवीनीकृत किया गया था। कथन 2 सत्य है; सर थॉमस रो 1615 में जहाँगीर के दरबार में आया था और उसने अंग्रेजों के व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की थी। कथन 3 सत्य है, सेंट थॉम का युद्ध (1746) कर्नाटक के प्रथम युद्ध का हिस्सा था जिसमें फ्रांसीसी सेना ने महé के नेतृत्व में नवरुद्दीन की सेना को हराया था। कथन 4 असत्य है क्योंकि वर्धमान, मिदनापुर और चटगांव की जमींदारी मीर जाफर द्वारा नहीं, बल्कि उसके उत्तराधिकारी मीर कासिम द्वारा वर्ष 1760 में अंग्रेजों को दी गई थी। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के आर्थिक प्रभावों और उनकी प्रशासनिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी मान लिया गया था, जिससे किसानों की स्थिति पट्टेदार या किराएदार बनकर रह गई और कृषि में कोई दीर्घकालिक पूंजी निवेश नहीं हुआ, जिसे 'कृषि का वाणिज्यीकरण' कहा जाता है।
2. थॉमस मुनरो द्वारा मुख्य रूप से मद्रास प्रेसीडेंसी में लागू की गई रयतवारी व्यवस्था (Ryotwari System) में ब्रिटिश सरकार और व्यक्तिगत किसानों (रयतों) के मध्य सीधा संबंध था, किंतु अत्यधिक उच्च लगान दरों और अकाल या सूखे के समय भी राजस्व की कठोर वसूली के कारण किसान भारी ऋणजाल (Debt trap) में फंस गए थे।
3. महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System) के अंतर्गत भू-राजस्व निर्धारण और भुगतान की इकाई व्यक्तिगत किसान न होकर संपूर्ण गाँव या महलों (ग्राम समूह) होता था, जहाँ पूरा ग्रामीण समुदाय सामूहिक रूप से राजस्व अदायगी के लिए उत्तरदायी था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध किया, किंतु उसने वेदों की अचूकता या infallibility के सिद्धांत को कभी स्वीकार नहीं किया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और मध्यकालीन पौराणिक ग्रंथों को हिंदू धर्म की वास्तविक नींव माना।
3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के उपरांत, देवेन्द्रनाथ टैगोर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जो मूल ब्रह्म समाज की तुलना में अधिक रूढ़िवादी और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के प्रति उदार था।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलित उद्धार को बढ़ावा देना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आजाद हिंद फौज' (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों एवं रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बॉग्ड कांग्रेस अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के बाद, महात्मा गांधी ने 'करेंगे या मरेंगे' (Do or Die) का आह्वान किया, और इस आंदोलन की एक प्रमुख विशेषता देश के विभिन्न हिस्सों (जैसे बलिया, ताम्रलिप्त और सतारा) में समानांतर सरकारों (Parallel Governments) की स्थापना थी।
2. जापान की सहायता से पुनर्गठित इंडियन नेशनल आर्मी (INA) का सर्वोच्च नेतृत्व संभालते हुए सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में वर्ष 1943 में 'आर्जि हुकूमत-ए-आजाद हिंद' (स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार) की स्थापना की थी, जिसे धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई थी।
3. सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर से रेडियो प्रसारण के दौरान महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहा था, और साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष ही एकमात्र और अंतिम विकल्प है।
4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा लाल किले (Red Fort Trials) में चलाए गए ऐतिहासिक मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों की मुख्य समिति के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे, जबकि इस बचाव दल में तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रसिद्ध विधिवेत्ता भी शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बुलंद दरवाजा किसने बनवाया?
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फतेहपुर सीकरी की राजधानी कब बनी?
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