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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुखसियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में ₹3,000 वार्षिक कर के बदले बिना किसी अतिरिक्त चुंगी के व्यापार करने का विशेष अधिकार (दस्तक) प्राप्त हुआ, जिसे कंपनी के अधिकारियों ने अपने निजी व्यापार पर भी दुरुपयोग करना शुरू कर दिया था।
- 2. बंगाल के नवाब अलीवर्दी खान ने यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों की तुलना 'मधुमक्खियों' से करते हुए कहा था कि यदि उन्हें छेड़ा न जाए तो वे शहद देंगी और यदि छेड़ा जाए तो वे काटकर मार डालेंगी।
- 3. वर्ष 1757 के प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दोला की पराजय का मुख्य कारण मीर जाफर, यार लतीफ और राय दुर्लभ जैसे सैन्य कमांडरों की गद्दारी थी, जिसके फलस्वरूप अंग्रेजों ने मीर जाफर को बंगाल का नया नवाब बनाया और इस युद्ध के बाद ही भारत में ब्रिटिश राजनीतिक प्रभुत्व की वास्तविक नींव पड़ी।
- 4. ब्लैक होल त्रासदी (काल कोठरी की घटना) के तुरंत बाद रॉबर्ट क्लाइव और वाटसन ने नवाब सिराजुद्दोला के साथ 'अलीनगर की संधि' पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अंग्रेजों को कलकत्ता की किलेबंदी करने, अपने सिक्के ढालने और युद्ध की क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार मिल गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूरी तरह सत्य हैं। वर्ष 1717 में फर्रुखसियर के फरमान ने ब्रिटिश कंपनी को बंगाल में मुक्त व्यापार का अधिकार दिया, जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है। नवाब अलीवर्दी खान ने यूरोपीय कंपनियों को मधुमक्खी की उपमा दी थी। प्लासी के युद्ध (1757) में सिराजुद्दोला के सेनापतियों के विश्वासघात के कारण उसकी हार हुई और अलीनगर की संधि (फरवरी 1757) के माध्यम से अंग्रेजों को कलकत्ता की किलेबंदी और विशेषाधिकार प्राप्त हुए। विकिपीडिया संदर्भ
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य तथा महात्मा गांधी की राजनीतिक रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी ने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के विरुद्ध सविनय अवज्ञा के सफल प्रयोग के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (जैसे प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार) की नींव रखी, जिसे बाद में चंपारण कृषि अधिनियम, 1918 द्वारा कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया।
2. वर्ष 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का विरोध देशबंधु चित्तरंजन दास ने किया था, परंतु नागपुर के वार्षिक अधिवेशन (दिसंबर 1920) में उन्होंने ही स्वयं असहयोग आंदोलन के मुख्य प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे प्रस्तुत किया था।
3. असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के लिए महात्मा गांधी ने चौरी-चौरा की घटना (फरवरी 1922) के बाद ही तुरंत राष्ट्रव्यापी स्तर पर 'कर न दो' (No-Tax) आंदोलन शुरू करने का निर्देश दे दिया था।
4. खेड़ा सत्याग्रह (1918) के दौरान, जहाँ फसल नष्ट होने के कारण लगान माफी की मांग की गई थी, सरदार वल्लभभाई पटेल और गांधीजी के नेतृत्व में किसानों ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध दृढ़ संकल्प दिखाते हुए अपनी संपत्तियों की कुर्की के बावजूद लगान का भुगतान करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बे' मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड' राइफल को शामिल किया गया था, जिसके कारतूस के खोल को लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था और ऐसी चर्बी के प्रयोग की खबर फैली जो सुअर और गाय की चर्बी से युक्त थी।
2. जनवरी 1857 में दमदम (कोलकाता के समीप) स्थित सैन्य छावनी में तैनात भारतीय सैनिकों ने सबसे पहले नई एनफील्ड राइफल के प्रयोग के खिलाफ आधिकारिक रूप से खुले विद्रोह का झंडा बुलंद किया था।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में अपने वरिष्ठ अंग्रेजी अधिकारियों पर आक्रमण कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी।
4. बैरकपुर की घटना के तुरंत पश्चात, 10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सैनिकों ने खुलेआम बगावत कर दी और दिल्ली की ओर कूच किया, जो इस विद्रोह की शुरुआत बनी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भोंसले (अप्पा साहब) को किस युद्ध में अंग्रेजों ने पराजित किया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह के पास न तो कोई केंद्रीय संगठन और अखिल भारतीय दृष्टिकोण था और न ही कोई सुसंगत भविष्य का राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक एजेंडा था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं ने केवल अपने स्थानीय हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी।
2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ), उन्नत हथियार प्रणालियों और प्रशिक्षित सैन्य कमांडरों की एक संगठित श्रृंखला थी, जबकि विद्रोहियों के पास नेतृत्व में एकता, सैन्य अनुशासन और रणनीतिक समन्वय का पूर्ण अभाव था।
3. भारत के अधिकांश बड़े शासकों, रियासतों और पश्चिमी शिक्षा प्राप्त मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से समर्थन किया था और इसे विदेशी शासन से मुक्ति का एकमात्र साधन माना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनसे संबंधित संस्थाओं तथा उनके वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का पूर्ण बहिष्कार किया तथा उपनिषदों के तार्किक व एकेश्वरवादी दर्शन पर विशेष बल दिया।
2. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज में हुए वैचारिक मतभेदों के परिणामस्वरूप वर्ष 1866 में देवेंद्रनाथ ठाकुर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की थी।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और जन्मजात जाति व्यवस्था, बाल विवाह तथा मूर्तिपूजा का तीव्र खंडन किया।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से 1867 में बॉम्बे में की थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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