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History of India
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भारतीय स्वतंत्रता और माउंटबेटन योजना (1947) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली द्वारा 20 फरवरी 1947 को हाउस ऑफ कॉमन्स में की गई ऐतिहासिक घोषणा के अनुसार, अंग्रेजों द्वारा भारत को सत्ता हस्तांतरित करने की अंतिम तिथि 30 जून 1948 निर्धारित की गई थी।
- 2. लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा 3 जून 1947 को प्रस्तुत की गई विभाजन योजना के तहत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों को अलग-अलग बैठकर प्रांत के विभाजन पर निर्णय लेने का प्रावधान किया गया था।
- 3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (Indian Independence Act 1947) को ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित किया गया, जिसके प्रावधानों के अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन अस्तित्व में आए, तथा लॉर्ड माउंटबेटन को दोनों नए राष्ट्रों का संयुक्त गवर्नर-जनरल नियुक्त किया गया था।
- 4. पंजाब और बंगाल में सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में गठित 'सीमा आयोग' (Boundary Commissions) ने अपनी रिपोर्ट स्वतंत्रता प्राप्ति से ठीक पूर्व 14 अगस्त 1947 को सौंप दी थी, जिसे उसी दिन सार्वजनिक कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारतीय स्वतंत्रता और विभाजन की पृष्ठभूमि में लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा प्रस्तुत माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) मील का पत्थर साबित हुई। कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सही हैं क्योंकि क्लेमेंट एटली ने 30 जून 1948 की समय-सीमा तय की थी, पंजाब-बंगाल में विधानसभाओं के विभाजन का प्रावधान था, और लॉर्ड माउंटबेटन प्रारंभिक रूप से भारत तथा पाकिस्तान दोनों स्वतंत्र डोमिनियन के مشترका (संयुक्त) गवर्नर-जनरल बने थे। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि रेडक्लिफ आयोग ने अपनी सीमा निर्धारण रिपोर्ट 12-13 अगस्त 1947 को ही तैयार कर ली थी, किंतु इसे 15 अगस्त 1947 के स्वतंत्रता दिवस के तुरंत बाद (16 अगस्त 1947 को) सार्वजनिक किया गया था, ताकि स्वतंत्रता समारोहों में कोई व्यवधान न आए।
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1857 के महान विद्रोह के संदर्भ में प्रसिद्ध इतिहासकारों और उनके द्वारा दिए गए मतों या कथनों के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सर जॉन लॉरेन्स और सी. सी. रीस - यह विद्रोह पूर्णतः देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सैनिकों का एक ऐसा विद्रोह था जिसका कोई सुसंगत उद्देश्य नहीं था।
2. टी.आर. होम्स - यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता' के बीच का संघर्ष था।
3. वी.डी. सावरकर - यह सुनियोजित प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम था।
4. जे. आउट्राम और डब्ल्यू. टेलर - यह विद्रोह अंग्रेजों के विरुद्ध हिंदू-मुस्लिम षड्यंत्र का परिणाम था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास, राजस्व प्रणालियों और सैन्य सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत स्थापित 'दीवान-ए-मुस्तकखराज' नामक नए विभाग का प्रमुख कार्य भू-राजस्व के बकाया, भ्रष्टाचार और घपलों की जाँच करना था, जबकि मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा कृषि के विकास के लिए स्थापित 'दीवान-ए-कोही' विभाग का मुख्य उद्देश्य सीधे किसानों को आर्थिक सहायता देकर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना था।
2. इल्तुतमिश द्वारा प्रारंभ की गई 'इक्ता व्यवस्था' को फिरोजशाह तुगलक ने वंशानुगत बना दिया और सैनिकों को नकद वेतन देने के स्थान पर 'वज्ह' (इक्ता की आय) देने की प्रथा को समाप्त कर दिया, जिससे सल्तनत में जागीरदारी प्रथा के प्रारंभिक बीज पड़े।
3. सल्तनत काल में भू-राजस्व निर्धारण की विभिन्न पद्धतियों में 'बटाई' (या गल्लाबाख्ची), 'कंकूट' (अनुमान पर आधारित) और 'नासक' (मुक्ताई) प्रणालियाँ प्रचलित थीं, जिनमें से 'नासक' पद्धति के अंतर्गत किसानों से पिछली पैदावार के आधार पर अनुमान लगाकर कर तय किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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विजयनगर साम्राज्य के पतन का मुख्य कारण माना जाने वाला "तालिकोटा का युद्ध" (राक्षस-तांगड़ी) कब हुआ था?
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ब्रिटिश शासनकाल के दौरान लागू की गई भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (इस्तमरारी प्रबंध) के अंतर्गत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया, जिससे किसानों की स्थिति पट्टेदार या किराएदार तक सीमित हो गई और 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) के तहत नियत तिथि पर राजस्व न देने पर उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसानों (रयतों) के बीच सीधा समझौता था, जिसमें भू-राजस्व का निर्धारण भूमि की उर्वरा शक्ति के आधार पर किया जाता था और लगान की दरें पूरी तरह स्थायी एवं अपरिवर्तनीय थीं।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी और रॉबर्ट मार्टिन बर्ड द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के क्षेत्रों में विकसित 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों के स्थान पर पूरे गाँव (महाल या ग्राम समुदाय) को भू-राजस्व भुगतान के लिए सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाया गया था।
4. इन तीनों प्रमुख भू-राजस्व व्यवस्थाओं में से केवल 'स्थाई बंदोबस्त' के क्षेत्र में ही ब्रिटिश नीतियों के कारण कृषि का वाणिज्यीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अत्यधिक ठहराव एवं क्षरण देखा गया, जबकि रयतवारी और महालवारी क्षेत्रों में किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद समृद्ध हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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