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History of India
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वैदिक काल और वैदिक साहित्य की प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक गतिविधियों तथा दार्शनिक पहलुओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में राजा को 'गोपा जनस्य' (कबीले का रक्षक) कहा जाता था, और उसे स्वेच्छा से जनता द्वारा कर (बलि) दिया जाता था, जबकि उत्तर वैदिक काल में नियमित करों का संग्रह करने के लिए 'भागदुध' नामक अधिकारी की नियुक्ति होने लगी।
- 2. उत्तर वैदिक काल में लोहे (जिसे 'श्याम अयस' कहा गया है) की खोज के बाद कृषि अर्थव्यवस्था का तीव्र विस्तार हुआ, तथा इसी काल में शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं (जुताई, बुवाई, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत विवरण मिलता है।
- 3. ऋग्वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर अत्यंत कठोर थी, जिसमें ब्राह्मणों और क्षत्रियों को समाज के शीर्ष पर रखते हुए शूद्रों को संपत्ति रखने और शिक्षा प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त था।
- 4. वैदिक साहित्य में 'अघ्न्या' शब्द का प्रयोग ऐसी गाय के लिए किया जाता था जिसका वध करना वर्जित था, और ऋग्वेद में सबसे अधिक बार प्रयुक्त नदी 'सिंधु' थी, जबकि सबसे पवित्र नदी 'नदितमा' सरस्वती को माना गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ऋग्वैदिक काल में राजा 'गोपा जनस्य' होता था और 'बलि' एक ऐच्छिक कर था, जबकि उत्तर वैदिक काल में अर्थव्यवस्था के स्थायित्व के साथ 'भागदुध' जैसे कर संग्रहकर्ता अधिकारियों का उदय हुआ। कथन 2 सही है; उत्तर वैदिक काल में लोहे (श्याम अयस) के प्रयोग से कृषि प्रधान संस्कृति विकसित हुई और शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों प्रमुख क्रियाओं का विस्तृत उल्लेख मिलता है। कथन 3 गलत है क्योंकि ऋग्वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था मूलतः कर्म पर आधारित थी और उतनी कठोर नहीं थी; प्रारंभिक वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्मगत नहीं थी तथा शूद्रों पर अत्यधिक प्रतिबंध उत्तर वैदिक काल के उत्तरार्ध में आरोपित हुए। कथन 4 सही है, ऋग्वेद में 'अघ्न्या' (न मारे जाने योग्य) गाय को कहा गया है, सिंधु नदी का सबसे अधिक बार उल्लेख है तथा सरस्वती को 'नदितमा' (सबसे पवित्र नदी) माना गया है।
Related Questions
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, सैन्य एवं राजस्व सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की स्थाई व्यवस्था की तथा घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया दर्ज करने की प्रथा को कड़ाई से लागू किया, साथ ही उसने साम्राज्य में खाद्यान्न की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 'शहना-ए-मंडी' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी (दलताबाद) स्थानांतरित की और राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर तांबे और कांसे की 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) चलाई, जो अपने समय में पूर्ण रूप से सफल और अत्यधिक लाभप्रद सिद्ध हुई।
3. फिरोजशाह तुगलक ने किसानों पर सिंचाई संकट को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाया तथा शरियत के नियमों के विरुद्ध जाकर सभी प्रकार के अतिरिक्त करों को समाप्त करते हुए केवल कुरान द्वारा स्वीकृत चार करों—खराज, जकात, जजिया और खुम्स—को ही वैध करार दिया।
4. इltutmish (इल्तुतमिश) ने अपने शासनकाल में 'इकता प्रणाली' को संस्थागत रूप दिया, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों और अमीरों को नकद वेतन देने के स्थान पर राजस्व एकत्र करने के लिए भूमि के टुकड़े (इकता) प्रदान किए जाते थे, और शुरुआती दौर में ये इक्ता वंशानुगत नहीं होते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ऋग्वैदिक काल और उत्तर-वैदिक काल के धार्मिक जीवन, संस्कारों तथा दार्शनिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में प्रकृति की शक्तियों का मानवीकरण कर अनेक देवी-देवताओं की कल्पना की गई थी, जिनमें इंद्र को 'पुरंदर' (किले तोड़ने वाला) माना गया तथा अग्नि को मनुष्य और देवताओं के बीच मध्यस्थ के रूप में पूजा जाता था।
2. ऋग्वैदिक काल में मूर्तिपूजा का प्रचलन बड़े पैमाने पर था और प्रत्येक कबीले के लिए मंदिरों का निर्माण अनिवार्य रूप से किया जाता था, जहाँ देवताओं की भव्य प्रतिमाएँ स्थापित की जाती थीं।
3. उत्तर-वैदिक काल में ऋग्वैदिक काल के प्रमुख देवताओं (इंद्र और अग्नि) का महत्व कम हो गया, और उनके स्थान पर प्रजापति (सृष्टिकर्ता), रुद्र (शिव) और विष्णु सर्वोच्च देवताओं के रूप में स्थापित हो गए।
4. उत्तर-वैदिक काल के अंतिम चरण में रची गई उपनिषदों में कर्मकांड और यज्ञीय अनुष्ठानों की कठोरता का समर्थन करते हुए मोक्ष प्राप्ति का एकमात्र साधन केवल अश्वमेघ और राजसूय यज्ञों को ही बताया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. अंग महाजनपद: इसकी राजधानी चंपा थी और बिम्बिसार के काल में इसे मगध साम्राज्य में मिला लिया गया था।
2. वत्स महाजनपद: इसकी राजधानी कौशाम्बी थी तथा इसके शासक उदयन (उदयीन) थे, जिनके प्रेम प्रसंग की कथाओं का वर्णन कालिदास के नाटक 'मेघदूत' में मिलता है।
3. अवंती महाजनपद: यह दो भागों में विभाजित था—उत्तरी अवंती की राजधानी उज्जैन और दक्षिणी अवंती की राजधानी माहिष्मती थी।
4. मल्ल महाजनपद: यह एक राजतंत्रात्मक शासन प्रणाली वाला महाजनपद था, जहाँ महात्मा बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था, गुप्तचर तंत्र और अशोक के शासनकाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में मौर्य प्रशासन के सर्वोच्च सत्रह अधिकारियों या विभागों को 'तीर्थ' कहा गया है, जिनकी नियुक्ति से पहले उनके चरित्र की शुद्धता की जाँच के लिए 'उपधा परीक्षण' किया जाता था।
2. मौर्यकालीन गुप्तचर प्रणाली में भ्रमण करने वाले गुप्तचरों को 'संस्था' कहा जाता था, जबकि एक ही स्थान पर संस्थागत रूप से रहकर कार्य करने वाले गुप्तचरों को 'संचारा' की श्रेणी में रखा गया था।
3. अशोक के धम्म महामात्रों की नियुक्ति उसके राज्याभिषेक के 14वें वर्ष में की गई थी, जिनका मुख्य कार्य विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच सद्भाव बढ़ाना और जनता के नैतिक व आध्यात्मिक जीवन की देखरेख करना था।
4. मौर्य प्रशासन में 'सीताध्यक्ष' राजकीय कृषि भूमि के प्रबंधन और कृषि कार्यों की देखरेख करने वाला प्रमुख अधिकारी होता था, जबकि राज्य द्वारा संचालित व्यापार और वाणिज्य के नियंत्रण का कार्य 'पण्यध्यक्ष' के अधीन था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पुरंदर की संधि के तहत शिवाजी महाराज को अपने कितने किले मुगलों को सौंपने पड़े थे?
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