BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
21 views

गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और भूमि अनुदान व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गुप्त काल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का छठा भाग (षडभाग) से लेकर एक-चौथाई भाग तक होती थी, जिसे 'उद्रंग' और 'उपरिकर' जैसे विभिन्न करों के माध्यम से वसूला जाता था, जहाँ 'उपरिकर' संभवतः स्थायी कृषकों पर लगाया जाने वाला एक अतिरिक्त कर था।
  2. 2. इस काल में राजाओं और प्रशासनिक अधिकारियों को नगद वेतन देने की प्रथा लगभग समाप्त हो गई थी, जिसके स्थान पर धार्मिक एवं प्रशासनिक सेवाओं के बदले बड़े पैमाने पर कर-मुक्त भूमि अनुदान (अग्रहार) देने की प्रथा शुरू हुई, जिससे सामंतवाद के बीज पड़े।
  3. 3. गुप्त साम्राज्य में भूमि की खरीद-फरोख्त और दान से संबंधित प्रशासनिक कार्यों का विवरण देने के लिए 'पुण्ड्रवर्धन भुक्ति' (वर्तमान बंगाल) से प्राप्त दामोदरपुर और बैग्राम ताम्रपत्र अभिलेख अत्यंत महत्वपूर्ण प्रमाण हैं, जो स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हैं।
  4. 4. गुप्त काल की मुद्रा प्रणाली में सोने के सिक्कों को 'दीनद्र' (दीनार) कहा जाता था, जो मुख्य रूप से व्यापारिक विनिमय और लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बहुतायत से प्रयोग होते थे, तथा स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद गुप्त सिक्कों में सोने की शुद्धता में निरंतर वृद्धि देखी गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

गुप्तकाल भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है, जिसमें राजनीतिक एकीकरण के साथ-साथ प्रशासनिक और आर्थिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। कथन 1 सही है क्योंकि इस काल में भू-राजस्व उपज का 1/6 से 1/4 भाग होता था और 'उद्रंग' तथा 'उपरिकर' प्रमुख कर थे। कथन 2 गलत है क्योंकि गुप्त काल में अधिकारियों को नगद वेतन देने की प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी, हालांकि भूमि अनुदान देने की प्रथा में भारी वृद्धि अवश्य हुई थी। कथन 3 सही है क्योंकि पुण्ड्रवर्धन भुक्ति से प्राप्त दामोदरपुर, बैग्राम और पहारपुर ताम्रपत्र भूमि अनुदान और स्थानीय प्रशासनिक निकायों (अधिकरण) की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी देते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि स्कंदगुप्त के उपरान्त गुप्त शासकों के स्वर्ण सिक्कों (दीनार) में सोने की शुद्धता में निरंतर कमी (खराव) आई, न कि वृद्धि, जो आर्थिक संकट या व्यापारिक पतन का संकेत देती है। इस काल के बारे में अधिक जानने के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ।
Share:

Related Questions

→ दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार समस्त कृषि योग्य भूमि की पैमाइश करवाकर भू-राजस्व को बढ़ाकर उपज का आधा (50%) भाग कर दिया था और बिचौलियों (खूत्, मुकद्दम और चौधरी) के विशेषाधिकारों को समाप्त कर उन पर सामान्य कृषकों की तरह कर आरोपित किए थे। 2. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के कुप्रभावों से निपटने और कृषि को पुनर्जीवित करने के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नया कृषि विभाग स्थापित किया था, जिसके तहत किसानों को 'सोंधार' (कृषि ऋण) प्रदान किए गए थे। 3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में सिंचाई व्यवस्था को उन्नत करने के लिए नहरों का एक विस्तृत जाल बिछाया, जिसमें यमुना से हिसार तक जाने वाली 'उलूग खानी' और सतलज से घग्गर तक जाने वाली नहरें शामिल थीं, और उसने किसानों से इन नहरों के उपयोग के बदले 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) वसूल किया जो कुल उपज का 1/10 भाग था। 4. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने सल्तनत की शक्ति को पुनर्गठन करने के लिए केंद्रीय राजतंत्र को अत्यधिक शक्तिशाली बनाया और सुल्तान के पद की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए अफगान सरदारों के साथ 'मस्नद-ए-आली' की सामंती समानता की नीति को पूर्णतः समाप्त कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, भू-राजस्व प्रणालियों और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (या जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और उसके औसत मूल्य के आधार पर लगान का निर्धारण किया जाता था, जिसमें 'पोलज' सर्वाधिक उपजाऊ भूमि थी जिस पर प्रतिवर्ष खेती की जाती थी। 2. शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान मुगल मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत बिना किसी जात रैंक को बढ़ाए घुड़सवारों (सवार रैंक) की संख्या दोगुनी करने की अनुमति दी गई थी। 3. औरंगजेब की धार्मिक और प्रशासनिक नीतियों के अंतर्गत संगीत पर राजकीय प्रतिबंध लगा दिया गया, चित्रकला को शाही संरक्षण से वंचित कर दिया गया, तथा उसने अपने शासन के शुरुआती वर्षों में ही हिन्दू प्रजा पर पुनः 'जजिया कर' आरोपित कर दिया था। 4. बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुजुके बाबरी' (बाबरनामा) की रचना मूल रूप से फारसी भाषा में की थी, जिसे बाद में उसके पौत्र अकबर के शासनकाल में अब्दुल रहीम खानखाना ने तुर्की भाषा में अनुवादित किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुबारक खिलजी की हत्या किसने की थी जो बाद में स्वयं सुल्तान बना? → मुगल प्रशासन में "सवानिह-निगार" किस प्रकार का अधिकारी होता था? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के संचालन और उनके दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदullah शाह ने किया था, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता है, तथा ब्रिटिश सेनापति जनरल कैंपबेल ने अत्यधिक संघर्ष के बाद फैजाबाद पर पुनः अधिकार किया था। 2. रोहिलखंड की राजधानी बरेली में खान बहादुर खान ने रोहिला सेना का नेतृत्व करते हुए अपने आपको नवाब घोषित किया था, किंतु बाद में सर कॉलिन कैंपबेल और ब्रिटिश सेना ने बरेली पर अधिकार कर लिया और खान बहादुर खान को नेपाल भागने पर विवश कर दिया, जहाँ उन्हें अंततः पकड़कर फाँसी दे दी गई। 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जहाँ उन्होंने भव्य तरीके से स्वतंत्रता की घोषणा की, किंतु कर्नल नील (Colonel Neil) ने अत्यंत क्रूरता के साथ इलाहाबाद में इस विद्रोह को कुचल दिया और मौलवी लियाकत अली को गिरफ्तार कर लिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.