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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजििस कादिर को नवाब घोषित कर किया था, और उन्होंने ब्रिटिश रेसिडेंसी की घेराबंदी करने वाले विद्रोही सैनिकों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  2. 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद के डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अवध और रोहिल्खंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और अपनी उत्कृष्ट रणनीतिक कौशल के कारण ब्रिटिश सेनाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुए।
  3. 3. हेनरी लॉरेंस, नील और हैवलॉक जैसे ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने लखनऊ की रेसिडेंसी को बचाने के दौरान अपनी जान गंवा दी थी, और अंततः सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजीमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से मार्च 1858 में लखनऊ पर पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया।
  4. 4. पराजय के उपरांत बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा पेंशन देकर लखनऊ में ही महल में रहने की अनुमति प्रदान कर दी गई, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों द्वारा पकड़कर फांसी पर लटका दिया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अत्यधिक वीरता और नेतृत्व का परिचय दिया। बेगम हजरत महल ने अपने नाबालिग बेटे बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर सत्ता संभाली और ब्रिटिश रेसिडेंसी की घेराबंदी की। मौलवी अहमदुल्लाह शाह (जिन्हें 'डंका शाह' कहा जाता था) एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। हेनरी लॉरेंस, नील और हैवलॉक जैसे ब्रिटिश अधिकारी लखनऊ में संघर्ष के दौरान मारे गए थे। अंततः कॉलिन कैंपबेल ने मार्च 1858 में लखनऊ पर कब्जा किया। हालांकि, बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण करने के बजाय नेपाल की ओर प्रस्थान किया और वहीं उनकी मृत्यु हुई, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को धोखे से मार दिया गया था। अतः कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 असत्य है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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