BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
1 views

मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के दार्शनिक विकास तथा उनके प्रमुख संतों के विचारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दक्षिण भारत के अलवार संतों ने जहाँ व्यक्तिगत भक्ति और प्रपत्ति (शरणगति) के मार्ग को लोकप्रिय बनाया, वहीं महिला संत अंडाल को उनकी अनन्य कृष्ण-भक्ति के कारण 'दक्षिण की मीरा' कहा जाता है।
  2. 2. सूफी मत (तसव्वुफ) के चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध संत निजामुद्दीन औलिया ने राजकीय दरबार के प्रभाव से दूर रहने की नीति अपनाई थी और सुल्तानों से मिलने तथा उनके द्वारा दिए जाने वाले अनुदानों को सख्ती से अस्वीकार कर दिया था।
  3. 3. उत्तर भारत में निर्गुण भक्ति धारा के महान संत कबीर दास ने जाति, वर्ण और बाहरी आडंबरों का कड़ा विरोध करते हुए राम और रहीम की एकता पर बल दिया, तथा उनके उपदेश 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित हैं।
  4. 4. वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत ज्ञानेश्वर ने मराठी भाषा में 'भावार्थदीपिका' (ज्ञानेश्वरी) की रचना कर भगवद्गीता के संदेश को आम जनता तक पहुँचाया, और इस संप्रदाय के अनुयायी महाराष्ट्र के पंढरपुर में विठोबा की उपासना करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि दक्षिण भारत के अलवार संतों (विष्णु भक्त) ने प्रपत्ति यानी पूर्ण आत्मसमर्पण के मार्ग पर बल दिया और महिला संत अंडाल को 'दक्षिण की मीरा' कहा जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि हजरत निजामुद्दीन औलिया ने शाही दरबार से दूरी बनाए रखने की बात जरूर कही थी और उनके पास कई सुल्तान आए, लेकिन अन्य चिश्ती संतों की तरह उन्होंने भी राजकीय अनुदानों को लेकर अपने अंदाज में जीवन बिताया; हालांकि शेख निजामुद्दीन औलिया के संदर्भ में कहा जाता है कि उनके मकान में 'दो दरवाजे' थे (अर्थात एक से सुल्तान आते तो दूसरे से फकीर निकल जाते), किंतु उन्होंने कभी भी आधिकारिक सरकारी पद या जागीर स्वीकार नहीं की, परंतु प्रश्न में यह कहना कि उन्होंने सभी सूफियों की तरह कड़ाई से इसका पालन किया और अन्य सिलसिले इसके विपरीत थे, संदर्भगत है। अधिक सूक्ष्म रूप से, कई चिश्ती संत राजकीय संपर्क से बचते थे, लेकिन निजामुद्दीन औलिया के दरबार में शाही लोग आते थे। यहाँ कथन 2 में तकनीकी अशुद्धता यह है कि चिश्ती संत सुल्तानों के प्रभाव से दूर रहने के लिए जाने जाते थे, किंतु औलिया के संबंध में शासकों के साथ उनके तनातनी के किस्से प्रसिद्ध हैं। (नोट: अधिक सटीक रूप से, चिश्ती सिलसिले के कई संत राजकीय अनुदान और दरबार से दूरी रखते थे)। कथन 3 सही है, कबीर दास निर्गुण धारा के प्रमुख संत थे और उनके उपदेश 'बीजक' में संकलित हैं। कथन 4 सही है, संत ज्ञानेश्वर ने 'ज्ञानेश्वरी' की रचना की और वारकरी संप्रदाय पंढरपुर के विट्ठल की पूजा करता है। विकिपीडिया संदर्भ
Share:

Related Questions

भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों (विशेषकर रामभक्ति और कृष्णभक्ति शाखा) तथा उनके दार्शनिक एवं सामाजिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाई और उन्होंने जाति-पाति के बंधनों को अस्वीकार करते हुए अपने शिष्यों में शूद्रों और महिलाओं (जैसे कबीर, रैदास और पद्मावती) को भी सम्मिलित किया था। 2. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धद्वैतवाद' दर्शन का प्रतिपादन किया और पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जिसके अंतर्गत भगवान कृष्ण की बाल-लीला और उनकी अगाध कृपा (पुष्टि) को मोक्ष का एकमात्र साधन माना गया है। 3. चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में 'अचिंत्य भेदाभेदवाद' का सिद्धांत दिया तथा संकीर्तन आंदोलन के माध्यम से जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध करते हुए सभी वर्गों के लोगों को प्रेम और भक्ति के मार्ग पर जोड़ा। 4. मीराबाई ने दादू पंथ के प्रभाव में आकर मेवाड़ को पूरी तरह त्याग दिया था और उन्होंने निर्गुण ब्रह्म की उपासना को ही अपनाते हुए कभी भी कृष्ण को सगुण रूप में नहीं पूजा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक इतिहास और विभिन्न सुल्तानों द्वारा स्थापित नवीन विभागों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दीवान-ए-कोही - मुहम्मद बिन तुगलक (कृषि विभाग) 2. दीवान-ए-अर्ज - अलाउद्दीन खिलजी (सैन्य विभाग) 3. दीवान-ए-बदगान - फ़िरोज़ शाह तुगलक (दास विभाग) 4. दीवान-ए-मुस्तखराज - बलबन (राजस्व बकाया वसूली विभाग) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था। 2. चंपारण जाँच समिति के एक सदस्य के रूप में महात्मा गांधी ने स्वयं ब्रिटिश सरकार के समक्ष यह तर्क दिया था कि बागान मालिकों द्वारा किसानों से वसूले गए अवैध धन का 50 प्रतिशत हिस्सा तत्काल वापस किया जाना चाहिए। 3. असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा पर बल दिया था, तथा इसी आंदोलन के दौरान वकीलों ने अदालतों का त्याग किया और छात्रों ने सरकारी शिक्षण संस्थानों को छोड़ दिया था। 4. चंपारण सत्याग्रह की अपार सफलता के बाद गुरु रवींद्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, जो गांधीजी के जन-आंदोलनों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? अकबर ने मनसबदारी व्यवस्था में सैनिकों के लिए जो "नकद" वेतन की व्यवस्था की थी, उसे क्या कहते थे? 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल प्रेसीडेंसी के सेना मुख्यालय में पुरानी 'ब्राउन बैस' मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में सुअर और गाय की चर्बी से बने ग्रीस के प्रयोग होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी धार्मिक आक्रोश उत्पन्न किया था। 2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश के विरुद्ध खुलकर विद्रोह कर दिया और अपने ब्रिटिश अधिकारियों—सर्जेंट ह्यूग बाथर्स्ट और लेफ्टिनेंट बॉग—पर आक्रमण कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। 3. मंगल पांडे को गिरफ्तार किए जाने के बाद ब्रिटिश सैन्य अदालत (कोर्ट-मार्शल) द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर में उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई, जो आगे चलकर संपूर्ण उत्तर भारत में विद्रोह की चिंगारी का मुख्य तात्कालिक उत्प्रेरक बना। 4. इस घटना के तुरंत बाद मेरठ छावनी में 10 मई 1857 को 3rd लाइट कैवलरी के सिपाहियों ने नए कारतूसों को छूने से इंकार कर दिया, जिन्हें कोर्ट-मार्शल द्वारा कठोर सजा देकर जेल भेज दिया गया था, और इसके विरोध में अगले दिन सैनिकों ने विद्रोह कर दिल्ली की ओर कूच कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.