BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
1 views

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारतीय समाज-सुधार आंदोलनों के दार्शनिक और संस्थागत विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्मजात जाति व्यवस्था का कड़ा खंडन किया, तथा शुद्धि आंदोलन के माध्यम से उन हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में लौटने का मार्ग प्रशस्त किया जिन्होंने किन्हीं कारणों से अन्य धर्म अपना लिया था।
  2. 2. केशव चंद्र सेन के वैचारिक हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप ब्रह्म समाज में उत्पन्न वैचारिक मतभेदों के बाद, वर्ष 1878 में आनंद मोहन बोस और केशव चंद्र सेन ने मिलकर 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जो रूढ़िवादिता और बाल विवाह के विरोध में अत्यधिक सक्रिय रहा।
  3. 3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा समाज के वंचित वर्गों में शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रसार करना था।
  4. 4. प्रार्थना समाज की स्थापना मुंबई (बॉम्बे) में आत्माराम पांडुरंग द्वारा वर्ष 1867 में की गई थी, जिसे महागोविन्द रानडे और आर.जी. भंडारकर जैसे महान सुधारकों का समर्थन प्राप्त हुआ, और इस संस्था का मुख्य ध्यान धार्मिक सुधारों की तुलना में सामाजिक सुधारों (जैसे अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा) पर अधिक केंद्रित था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की और वेदों की सर्वोच्चता स्थापित करते हुए मूर्तिपूजा व जाति व्यवस्था का विरोध किया तथा शुद्धि आंदोलन चलाया। कथन 2 गलत है क्योंकि केशव चंद्र सेन के अल्पवयस्क पुत्री के विवाह के कारण ब्रह्म समाज में विभाजन हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप 1878 में आनंद मोहन बोस, शिवनाथ शास्त्री और द्वारकानाथ गांगुली ने 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की थी, न कि केशव चंद्र सेन ने (केशव चंद्र सेन ने 'भारतीय ब्रह्म समाज' की स्थापना की थी)। कथन 3 सही है, ज्योतिराव फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। कथन 4 भी सही है, प्रार्थना समाज (1867) का मुख्य जोर सामाजिक सुधारों पर था। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

शाहजहाँ के किस पुत्र ने उपनिषदों का फारसी अनुवाद "सिर-ए-अकबर" के नाम से किया था? 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह द्वारा चलाए गए संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अप्रैल 1858 में वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सेनापति कैप्टन ली ग्रांड को आज़मगढ़ के पास बुरी तरह पराजित किया था, हालांकि इसी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद 26 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर में उनका निधन हो गया था। 2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध (छापेमार युद्ध) जारी रखा और शाहाबाद के क्षेत्र में एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था एवं सरकार की स्थापना की थी। 3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारी मेजर विंसेंट आयर और जनरल डगलस ने भारी सैन्य बल का प्रयोग किया, तथा अमर सिंह को पकड़ने में मदद करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने उन पर भारी इनाम भी घोषित किया था। 4. अमर सिंह को अंततः ब्रिटिश सेना द्वारा युद्ध के मैदान में ही मार गिराया गया था, जिसके बाद बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम लौ हमेशा के लिए बुझ गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? टोडरमल द्वारा लागू की गई राजस्व प्रणाली को क्या कहा जाता था? सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1931 में हुए गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने पर सहमति जताई, और कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया। 2. वर्ष 1931 में आयोजित लंदन के द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के विवाद के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया। 3. प्रथम और तृतीय गोलमेज सम्मेलनों का बहिष्कार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा किया गया था, जबकि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने तीनों ही गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था। 4. कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया गया था और कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज के प्रस्ताव को वापस लेते हुए केवल डोमिनियन स्टेटस की मांग पर मुहर लगाई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके विभिन्न स्वरूपों के संदर्भ में इतिहासकारों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जॉन लॉरेन्स और सीले के अनुसार, 1857 का विद्रोह केवल एक 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त करना नहीं बल्कि केवल सेना की कुछ विशेष ग्रीवांसों का समाधान करना था। 2. विनायक दामोदर सावरकर (वी.डी. सावरकर) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इसे सुनियोजित ढंग से लड़ा गया भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बताया है। 3. टी.आर. होम्स का यह कथन प्रसिद्ध है कि यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता' के बीच का संघर्ष था, जबकि एल.ई.आर. रीस (L.E.R. Rees) के अनुसार यह 'धार्मिक कट्टरता का ईसाइयों के विरुद्ध युद्ध' था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.