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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नेतृत्व संभालने वाले नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) को अंग्रेजों द्वारा उनके पिता की पेंशन से वंचित कर दिया गया था, जिसके कारण उन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का शंखनाद किया।
- 2. तात्या टोपे, जो नाना साहब के अत्यंत विश्वसनीय सेनापति थे, ने कानपुर की सुरक्षा और सैन्य अभियानों का कुशल संचालन किया तथा बाद में ग्वालियर के पतन के बाद रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर मध्य भारत और राजस्थान में अंग्रेजों के खिलाफ छापामार युद्ध का नेतृत्व किया।
- 3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और कानूनी रणनीतिकार थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर ब्रिटिश संसद के समक्ष नाना साहब की पेंशन का मामला उठाया था तथा बाद में कानपुर में विद्रोही सैनिकों के बीच कूटनीतिक व प्रचार गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 4. कानपुर में ब्रिटिश सेना के समर्पण के पश्चात विद्रोही ताकतों द्वारा सतीचौरा घाट पर हुए नरसंहार के उपरांत, नाना साहब नेपाल भाग गए थे और उनके बारे में यह माना जाता है कि नेपाल की तराई में अज्ञात कारणों से उनकी मृत्यु हो गई, जबकि तात्या टोपे को ब्रिटिश सेना द्वारा गिरफ्तार कर शिवपुरी में फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ मोर्चा खोला। उनकी पेंशन बंद करने और डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स (व्यपगत सिद्धांत) के तहत उनके अधिकारों को अस्वीकार करने के कारण उन्होंने विद्रोह का नेतृत्व किया। उनके सैन्य कमांडर तात्या टोपे और मुख्य सलाहकार अजीमुल्ला खां ने इस आंदोलन को रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से अत्यंत मजबूत बनाया। अधिक जानकारी के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ। कानपुर में संघर्ष के पश्चात तात्या टोपे मध्य भारत चले गए और नाना साहब नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ उनका अंतिम जीवन इतिहास में रहस्यमय रहा।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अवध में विद्रोह के फूट पड़ने के उपरांत बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को लखनऊ का नवाब घोषित किया और स्वयं राज्य की वास्तविक बागडोर संभालते हुए अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया।
2. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था और वे अपनी उत्कृष्ट सैन्य रणनीति तथा नेतृत्व क्षमता के लिए विख्यात थे।
3. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अंततः मार्च 1858 में गोरखा रेजिमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से लखनऊ पर पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया, जिसके बाद बेगम हजरत महल ने नेपाल की ओर प्रस्थान किया और वहीं शरण ली।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंत में पुवायां के एक स्थानीय राजा के साथ हुई मुठभेड़ में उन्हें जीवित गिरफ्तार कर लिया गया था, जिन पर लखनऊ में राजद्रोह का मुकदमा चलाकर फांसी दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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लोदी काल में हिंदुओं द्वारा फारसी भाषा सीखने के पीछे मुख्य कारण क्या था?
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ऋग्वैदिक कालीन समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (दुहने वाली) शब्द पुत्री के लिए प्रयोग किया जाता था, जो यह दर्शाता है कि गायों के दोहन का कार्य मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता था, और इस काल में समाज स्पष्ट रूप से पितृसत्तात्मक होने के बावजूद महिलाओं को सभा और समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेने की स्वतंत्रता थी।
2. इस काल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पशुपालन पर आधारित थी, जहाँ गाय सबसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान संपत्ति मानी जाती थी, तथा युद्धों का मुख्य कारण भूमि या क्षेत्र का विस्तार न होकर 'गविष्टि' (गायों की खोज या गायों के लिए युद्ध) होता था।
3. ऋग्वैदिक कबीले के मुखिया को 'राजन्' कहा जाता था, जो भूमि का स्वामी होता था और करों (बलि) को नियमित रूप से अनिवार्य रूप से वसूलता था, जिसे जनता द्वारा राजा को देना कानूनी रूप से बाध्यकारी था।
4. ऋग्वैदिक देवताओं में इन्द्र को 'पुरंदरा' (किले को तोड़ने वाला) कहा गया है, जिन्हें सबसे अधिक 250 सूक्त समर्पित हैं, जबकि अग्नि को मनुष्य और देवताओं के बीच मध्यस्थ के रूप में देखा जाता था जिन्हें 200 सूक्त समर्पित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गदर पार्टी और क्रांतिकारी आतंकवाद के द्वितीय चरण (हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन - HSRA) के वैचारिक विकास, प्रमुख घटनाओं तथा उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1913 में सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना द्वारा स्थापित 'गदर पार्टी' ने 'युगान्तर' और 'गदर' साप्ताहिक पत्र के माध्यम से औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का संदेश प्रवासी भारतीयों तक पहुँचाया था।
2. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन कर इसका नाम बदलकर 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें समाजवाद को इसके घोषणापत्र का मुख्य आधार बनाया गया था।
3. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल के विरोध में 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधान सभा (Central Legislative Assembly) में बम फेंका था, जिसका मुख्य उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहरे कानों को सुनाना' और अपनी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार करना था।
4. गदर पार्टी के प्रमुख नेता लाला हरदयाल को वर्ष 1915 में ब्रिटिश सरकार के दबाव पर अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसके उपरांत वे आजीवन कभी भी भारत वापस नहीं लौट पाए और उनकी मृत्यु अमेरिका में ही हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बिहार के अन्य क्षेत्रों—विशेष रूप से पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में 1857 के विद्रोह के घटनाक्रम और उसके नेतृत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष में अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था, किंतु ब्रिटिश अधिकारियों ने शीघ्र ही इस विद्रोह को कुचलकर पीर अली खां को फाँसी दे दी थी।
2. दानापुर छावनी (Danapur Cantonment) के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार करके आरा की ओर कूच किया था, जहाँ उन्होंने कुंवर सिंह की सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाया था।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में भी 1857 के विद्रोह की सुगबुगाहट तेज हो गई थी, जहाँ मुजफ्फरपुर में यूरोपीय अधिकारियों और प्रिंगल महोदय के खिलाफ असंतोष फूटा था, जबकि छपरा में विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय जमींदारों ने ब्रिटिश संचार व्यवस्था और सरकारी भवनों को निशाना बनाया था।
4. पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने बिहार में बढ़ते विद्रोही तेवरों को दबाने के लिए अत्यधिक दमनकारी और क्रूर नीतियां अपनाई थीं, जिसके तहत उसने पटना के मौलवी अहमदुल्लाह, वारिस अली और मोहम्मद हुसैन जैसे प्रमुख संदिग्ध मुस्लिम विद्वानों को षड्यंत्र रचने के आरोप में गिरफ्तार कर मृत्युदंड दे दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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