त्वरित लिंक्स
History of India
2 views
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड में नरम दल और गरम दल की कार्यपद्धतियों, विचारधाराओं और प्रमुख घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के प्रारंभिक उदारवादी (नरम दल) नेताओं का यह दृढ़ विश्वास था कि ब्रिटिश शासन भारत के हित में है और वे ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट आस्था रखते हुए केवल 'प्रार्थना, याचिका और शिष्टमंडल' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति के माध्यम से क्रमिक प्रशासनिक सुधार प्राप्त करना चाहते थे।
- 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उग्रवादी (गरम दल) नेताओं—लाल, बाल, पाल और अरबिंदो घोष—ने इस बात पर जोर दिया कि केवल प्रार्थनाओं से अधिकार नहीं मिलने वाले, इसलिए उन्होंने 'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' के साथ-साथ 'निष्क्रिय प्रतिरोध' (Passive Resistance) को अपना मुख्य राजनीतिक अस्त्र बनाया।
- 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पश्चात नरमपंथियों ने कांग्रेस संगठन पर अपना पूर्ण नियंत्रण पुनः स्थापित कर लिया और वर्ष 1908 के मद्रास अधिवेशन में कांग्रेस के नए संविधान का निर्माण किया गया, जिसके माध्यम से उग्रवादियों के प्रवेश के मार्ग को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया और कांग्रेस का लक्ष्य 'ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन' (Colonial Self-Government) घोषित किया गया।
- 4. सूरत विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियों अपनाते हुए गरम दल के नेताओं को कुचल दिया, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर मांडले जेल (बर्मा) भेज दिया गया, जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ 'गीता रहस्य' की रचना की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल (उदारवादी) और गरम दल (उग्रवादी) काल में वैचारिक मतभेद अपनी चरम सीमा पर पहुँच गए थे। वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस नरमपंथियों और उग्रवादियों में विभाजित हो गई। विभाजन के उपरांत नरमपंथियों ने मद्रास अधिवेशन (1908) में कांग्रेस का नया संविधान बनाया ताकि भविष्य में उग्रवादी दल के लोग संवैधानिक दायरे से बाहर जाकर हंगामा न कर सकें, किंतु उग्रवादियों के प्रवेश के मार्ग को 'हमेशा के लिए बंद' नहीं किया गया था, बल्कि बाद में लखनऊ अधिवेशन (1916) में वे पुनः कांग्रेस में शामिल हो गए। अतः कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि मार्ग हमेशा के लिए बंद करने का प्रावधान नहीं था। शेष कथन सही हैं। इस ऐतिहासिक कालखंड के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में क्रांतिकारियों के नेतृत्व, सैन्य गतिविधियों और ब्रिटिश प्रतिरोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब ने संभाला था, जिन्होंने स्वयं को पेशवा घोषित किया और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष के लिए अजीमुल्ला खां को अपना मुख्य सलाहकार और राजनीतिक रणनीतिकार नियुक्त किया था।
2. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में कानपुर की सेना का प्रभावी सैन्य नेतृत्व किया, तथा ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल और हैवलॉक की संयुक्त सेना के साथ भीषण संघर्ष के उपरांत ग्वालियर से आकर कानपुर पर पुनः अधिकार करने का सफल प्रयास किया था।
3. सती चौरा घाट की घटना के उपरांत कानपुर में ब्रिटिश अधिकारियों और आत्मसमर्पण करने वाले यूरोपीय नागरिकों के साथ हुए संघर्ष में अजीमुल्ला खां की प्रमुख कूटनीतिक भूमिका थी, जिन्होंने बाद में विद्रोह के प्रचार हेतु विदेशों में भी प्रयास किए थे।
4. कानपुर में विद्रोह के पूर्ण दमन के पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज ने नाना साहब और तात्या टोपे को गिरफ्तार कर लिया था, जहाँ नाना साहब को तोप से उड़ा दिया गया और तात्या टोपे को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फौज (INA) तथा क्रांतिकारी गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों (Parallel Governments) की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया (चित्तू पाण्डू के नेतृत्व में), ताम्रलुक (जातीय सरकार) और सतारा (प्रति सरकार, जो सबसे लंबे समय तक चली) प्रमुख थीं।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से जापान पहुँचने के बाद रास बिहारी बोस से आज़ाद हिंद फौज का नेतृत्व संभाला, और उन्होंने सिंगापुर में 'आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद' (अस्थায়ী स्वतंत्र भारत सरकार) की स्थापना की जिसे धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई थी।
3. आज़ाद हिंद फौज की 'रानी झांसी रेजिमेंट' का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया था, जो महिला सैनिकों की एक अनूठी और समर्पित रेजिमेंट थी।
4. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का आह्वान किया था, और इस आंदोलन की शुरुआत के साथ ही वायसराय लिनलिथगो ने कांग्रेस के सभी प्रमुख नेताओं को तुरंत गिरफ्तार कर देश की विभिन्न जेलों में नजरबंद कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व तथा संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा की लड़ाई में वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश कप्तान डनबार की सेना को बुरी तरह पराजित किया था, तथा ब्रिटिश जनरल आउट्राम और विंसेंट आयर के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्होंने अपनी कुशल छापामार युद्धनीति का परिचय दिया।
2. जगदीशपुर के पतन के बाद वीर कुंवर सिंह ने उत्तर प्रदेश और मध्य भारत में विद्रोही ताकतों से हाथ मिलाया, तथा आजमगढ़ के समीप ब्रिटिश सेना को परास्त करने के बाद गंगा नदी पार करते समय दाहिने हाथ में गोली लगने पर उन्होंने स्वयं अपनी तलवार से अपना हाथ काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था।
3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों से अंग्रेजों के विरुद्ध समानांतर प्रशासन और सशस्त्र संघर्ष का संचालन जारी रखा, तथा अंग्रेजों के खिलाफ युद्धबंदी शिविरों और न्याय प्रणाली की एक अनूठी व्यवस्था स्थापित की थी।
4. अमर सिंह को युद्ध के दौरान गिरफ्तार करके कलकत्ता के अलीपुर जेल में मुकदमा चलाया गया था, जहाँ वर्ष 1860 में बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में व्यापारिक विस्तार तथा राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस कैरो ने मुगल सम्राट औरंगजेब से अधिकार पत्र प्राप्त कर वर्ष 1668 में भारत में पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री की स्थापना सूरत में की थी, जबकि इसके दो वर्ष पश्चात मार्कारा के नेतृत्व में मसूलिपट्टनम में दूसरी फ्रांसीसी फैक्ट्री स्थापित हुई।
2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में वास्तविक राजनीतिक और व्यापारिक सुदृढ़ीकरण वर्ष 1651 में शाहशुजा द्वारा जारी 'निशान' (राजकीय आज्ञापत्र) के माध्यम से मिला, जिसके तहत मात्र 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले बंगाल में मुक्त व्यापार करने का विशेषाधिकार प्राप्त हुआ।
3. भारत में एंग्लो-फ्रेंच प्रतिद्वंद्विता (कर्नाटक युद्ध) के दौरान, प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48) ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध का परिणाम था, जिसका अंत एक्स-ला-शापेली की संधि से हुआ और इसके तहत अंग्रेजों को मद्रास वापस मिल गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे द्वारा संचालित सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज़ ने झांसी के किले को घेर लिया, जिसके उपरांत रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ किले की रक्षा की और पतन के समय तात्या टोपे की सेना की मदद से कालपी की ओर सुरक्षित प्रस्थान करने में सफल रहीं।
2. कालपी में ब्रिटिश सेना से पराजित होने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया, जहाँ सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया ने उनका खुलकर स्वागत किया और ग्वालियर के किले पर अधिकार करने में अपनी संपूर्ण सेना उनके अधीन कर दी।
3. ग्वालियर पर अधिकार करने के उपरांत तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई ने संयुक्त रूप से ब्रिटिश सेना का सामना किया, और 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे ने मध्य भारत के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध जारी रखा, किंतु उनके एक विश्वासघाती मित्र मानसिंह के धोखे के कारण वे अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिए गए और अप्रैल 1859 में शिवपुरी में उन्हें फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.