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History of India
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महिलाओं, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों की भूमिका तथा कराची अधिवेशन (1931) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं ने शराब की दुकानों, विदेशी कपड़ों की दुकानों और अफीम के अड्डों पर बड़े पैमाने पर धरना दिया तथा कांग्रेस के इस संघर्ष को अभूतपूर्व जन-समर्थन प्रदान किया।
  2. 2. भारतीय व्यापारी और उद्योगपति वर्ग ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का सक्रिय समर्थन किया, किंतु गोलमेज सम्मेलनों और वित्तीय सुरक्षा के मुद्दों पर वे कांग्रेस के पूर्ण स्वराज के प्रस्ताव से हमेशा असहमत रहे।
  3. 3. वर्ष 1931 के कराची अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति' (Fundamental Rights and National Economic Programme) से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया, जिसकी अध्यक्षता वल्लभभाई पटेल ने की थी।
  4. 4. गांधी-इरविन समझौते के तहत कांग्रेस ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने की स्वीकृति दी, किंतु इस समझौते में पुलिस अत्याचारों की निष्पक्ष जांच की मांग को ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व थी। कराची अधिवेशन (1931) की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, जिसमें मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव पारित हुआ। ब्रिटिश सरकार ने पुलिस अत्याचारों की जांच की मांग को ठुकरा दिया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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