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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3,000 रुपये वार्षिक कर के बदले कर-मुक्त व्यापार करने का अधिकार मिला था, जिसे कंपनी के अधिकारियों ने अपने निजी व्यापार (दस्तक) पर भी अवैध रूप से लागू कर दिया था।
- 2. अलीवर्दी खान के उत्तराधिकारी सिराजुद्दौला ने कलकत्ता (आलिनगढ़) पर आक्रमण कर मार्च 1756 में उस पर अधिकार कर लिया था और इस संघर्ष के दौरान प्रसिद्ध 'कालकोठरी की त्रासदी' (Black Hole Tragedy) की घटना घटी थी, जिसका समकालीन फारसी वृत्तांत जे.जे. हॉलवेल द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
- 3. प्लासी के युद्ध (23 जून 1757) में सिराजुद्दौला की सेना का एक बड़ा हिस्सा मीर जाफर के नेतृत्व में अंग्रेजों से मिल जाने के कारण युद्ध मैदान से अलग रहा, जिसके परिणामस्वरूप रॉबर्ट क्लाइव ने इस युद्ध को आसानी से जीत लिया और मीर जाफर को बंगाल का अगला नवाब बनाया गया।
- 4. बक्सर के युद्ध (1764) के उपरांत रॉबर्ट क्लाइव ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय और अवध के नवाब शुजाउद्दोला के साथ इलाहाबाद की संधियाँ कीं, जिसके तहत कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की वास्तविक दीवानी अधिकार प्राप्त हो गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि फर्रुख्शियर का फरमान (जिसे ब्रिटिश इतिहासकार ओरम ने 'कंपनी का मैग्ना कार्टा' कहा था) केवल कंपनी के व्यापार के लिए था, लेकिन अधिकारियों ने 'दस्तक' का दुरुपयोग कर अपने निजी व्यापार को भी कर-मुक्त कर लिया था। कथन 2 गलत है क्योंकि सिराजुद्दौला ने कलकत्ता पर जून 1756 में आक्रमण किया था, न कि मार्च 1756 में; तथा कालकोठरी की त्रासदी के एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी और प्रचारक जे.जे. हॉलवेल थे, जिसकी ऐतिहासिक सत्यता पर आधुनिक इतिहासकारों में मतभेद है। कथन 3 सही है; प्लासी के युद्ध में मीर जाफर के विश्वासघात के कारण सिराजुद्दौला की पराजय हुई थी। कथन 4 सही है; बक्सर के युद्ध के बाद 1765 की इलाहाबाद की संधियों के माध्यम से कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के दार्शनिक संप्रदायों, उनके प्रमुख आचार्यों तथा उनके वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के वैष्णव संत रामानुजचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और जगत ब्रह्म से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी (अंश के रूप में), तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए 'प्रपत्ति' (पूर्ण आत्मसमर्पण) मार्ग पर विशेष बल दिया गया।
2. मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित 'द्वैतवाद' दर्शन के अनुसार ईश्वर, आत्मा और जड़ जगत पूरी तरह से पृथक और स्वतंत्र सत्य हैं, तथा ईश्वर और जीव के बीच कभी भी पूर्ण तदाकारिता या अद्वैत संबंध संभव नहीं है।
3. वल्लभाचार्य द्वारा प्रवर्तित 'शुद्धैतवाद' दर्शन के अनुसार माया का आवरण जीव पर नहीं बल्कि केवल ब्रह्म पर पड़ता है, जिसके कारण ब्रह्म अपनी इच्छा से संसार के रूप में प्रकट होता है और पुष्टि मार्ग के माध्यम से भगवान कृष्ण की अनन्य भक्ति ही मुक्ति का एकमात्र साधन है।
4. सूफी संतों के 'सुहरावर्दी' सिलसिले ने भारत में कठोर तपस्या, एकांत जीवन और राजकीय अनुदानों व जागीरों के पूर्ण बहिष्कार की नीति को अपनाया, जबकि इसके विपरीत 'चिशती' सिलसिले के संतों ने शाही दरबारों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे और सुल्तानों से बड़े पैमाने पर भूमि-अनुदान स्वीकार किए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अकबर के दरबार का गायक:
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अष्टप्रधान में "अमात्य" या "मजुमदार" का मुख्य कार्य क्या था?
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फिरोज शाह तुगलक ने सेना में पदोन्नति और भर्ती के लिए किस नियम को अपनाया था?
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1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के तहत भारत के शासन का नियंत्रण ईस्ट इंडिया कंपनी से सीधे ब्रिटिश क्राउन के हाथों में हस्तांतरित कर दिया गया, और बोर्ड ऑफ कंट्रोल तथा कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का नया पद सृजित किया गया।
2. महारानी विक्टोरिया की घोषणा में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीय रियाسतों के राजाओं के साथ पूर्व में की गई सभी संधियों, अनुबंधों और समझौतों का पूर्ण सम्मान करने का आश्वासन दिया गया तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के क्षेत्रीय विस्तार (Annexation) की नीति को त्यागने की घोषणा की गई।
3. इस घोषणा में यह स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया कि सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों के दौरान भारतीयों के साथ उनकी जाति, नस्ल, धर्म या रंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी योग्य भारतीयों को उनकी पात्रता के अनुसार बिना किसी पक्षपात के उच्च पदों पर नियुक्त किया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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