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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों और नरम दल-गरम दल काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले) की राजनीतिक कार्यपद्धति मुख्य रूप से '3P' यानी प्रार्थना (Prayer), याचिका (Petition) और विरोध (Protest) पर आधारित थी।
- 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूरे देश में लागू करने का समर्थन किया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक संतुष्ट हुए।
- 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
- 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरुप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों का मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता में था और उनकी कार्यपद्धति '3P' (Prayer, Petition और Protest) पर आधारित थी। कथन 2 गलत है क्योंकि 1905 के बनारस अधिवेशन में नरमपंथियों ने बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखने का समर्थन किया था, जिससे गरम दल के नेता असंतुष्ट थे, पूरे देश में लागू करने का समर्थन गरम दल ने किया था जिसे नरमपंथियों ने शुरू में अस्वीकार कर दिया था। कथन 3 सही है, 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी ने पहली बार 'स्वराज' शब्द का उल्लेख किया। कथन 4 सही है, 1907 के सूरत अधिवेशन में गतिरोध के बाद रास बिहारी बोस अध्यक्ष बने और कांग्रेस नरम एवं गरम दल में विभाजित हो गई। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में ब्रिटिश सत्ता के पुनरुद्धार और विद्रोह के दमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह की गतिविधियों को कुचलने और विद्रोह का दमन करने के लिए ब्रिटिश सेनापति जनरल कैंपबेल ने मुख्य रूप से अभियान का नेतृत्व किया था, जबकि मौलवी को अंततः पुवायाँ के राजा के सहयोग से अंग्रेजों द्वारा घेरकर मार दिया गया था।
2. बरेली में रोहिल्ला सेना का नेतृत्व करने वाले खान बहादुर खान ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक मजबूत समानांतर सरकार चलाई थी, किंतु अंततः सर कॉलिन कैंपबेल और ब्रिटिश सेना द्वारा बरेली पर पुनः अधिकार कर लिए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया।
3. इलाहाबाद में लियाकत अली ने विद्रोह का शानदार नेतृत्व करते हुए सरकारी खजाने पर अधिकार कर लिया था और मौलवी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की थी, किंतु कर्नल नील (Colonel James Neill) ने अत्यंत क्रूरता के साथ इलाहाबाद के विद्रोह को कुचल दिया और लियाकत अली को बाद में आजीवन अंडमान निष्कासित कर दिया गया।
4. इन तीनों ही केंद्रों (फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद) में विद्रोही ताकतों का दमन करने में असफल रहने के बाद ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग ने अंततः अवध के ताल्लुकदारों के साथ सुलह करने की नीति को पूरी तरह त्याग दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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औरंगजेब ने किसे "जिंदा पीर" कहा?
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ऋग्वैदिक काल एवं उत्तर वैदिक काल की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'सभा' और 'समिति' नामक संस्थाएँ अत्यधिक शक्तिशाली थीं, जो राजा की निरंकुशता पर नियंत्रण रखती थीं, और इन दोनों संस्थाओं में महिलाओं (जैसे 'सभाती' और 'इशा') की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख मिलता है, जबकि उत्तर वैदिक काल में आते-आते इन संस्थाओं का राजनीतिक प्रभाव क्षीण होने लगा और महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
2. ऋग्वैदिक समाज मुख्य रूप से एक समतावादी और कबीलाई समाज था जिसमें वर्ण व्यवस्था कर्म पर आधारित थी और गोत्र प्रणाली अपनी पूरी अवस्था में थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में लोहे (श्याम अयस) की खोज के बाद कृषि आधारित अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई और वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित होकर कठोर हो गई।
3. उत्तर वैदिक काल में गोत्र (Gotra) संस्था का उदय हुआ, जिसका मूल अर्थ 'गोहूति' या 'गोष्ठ' (वह स्थान जहाँ कुल विशेष का गोधन पाला जाता था) था, और इसी काल में पहली बार चार आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास) का पूर्ण विधान 'जाबालोपनिषद' में देखने को मिलता है।
4. ऋग्वैदिक काल में राजा को 'गोपा जनस्य' (कबीले का रक्षक) कहा जाता था, जिसे नियमित कर (बलि) देने की अनिवार्य व्यवस्था थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में 'भागदुध' नामक अधिकारी कर संग्रह करने लगा और राजा की शक्ति में वृद्धि के साथ-साथ 'राजसूय', 'अश्वमेध' तथा 'वाजपेय' जैसे बड़े यज्ञों का प्रचलन बढ़ गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों, नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष तथा संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) में नरमपंथियों का मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता में था और वे 'प्रार्थना, याचिका और प्रतिवेदन' की पद्धति का अनुसरण करते थे, जबकि गरमपंथियों ने 'स्वदेशी', 'बहिष्कार', 'राष्ट्रीय शिक्षा' और 'निष्क्रिय प्रतिरोध' को राजनीतिक संघर्ष का मुख्य हथियार बनाया।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, बंगाल विभाजन के विरोध में चलाए जा रहे स्वदेशी आंदोलन को पूरे देश में फैलाने का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया तथा नरमपंथियों और गरमपंथियों के संयुक्त समझौते के तहत 'पूर्ण स्वराज' का लक्ष्य स्वीकार किया गया।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरम दल और गरम दल के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव तथा आंदोलन के दायरे को लेकर हुए तीव्र मतभेद के कारण कांग्रेस का विभाजन हो गया, जिसमें नरमपंथियों ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष चुना, जबकि गरमपंथियों की ओर से लाला लाजपत राय या बाल गंगाधर तिलक को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव था।
4. सूरत विभाजन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियों का सहारा लेते हुए गरमपंथी नेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के कारावास के लिए म्यांमार की मांडले जेल भेज दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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लोदी काल में "सिकंदरी गज" का प्रयोग मुख्य रूप से किसके लिए किया जाता था?
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