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General Science
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अनुनाद (Resonance)?

Detailed Explanation

आवृत्ति का मेल होना।
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विशिष्ट ऊष्मा क्षमता (Specific Heat Capacity) और ऊष्मागतिकी के विभिन्न तापमान पैमानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जल की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता अत्यधिक उच्च होने के कारण यह एक उत्कृष्ट शीतलक (Coolant) के रूप में कार्य करता है, जिसका अर्थ है कि यह न्यूनतम तापमान परिवर्तन के साथ बड़ी मात्रा में ऊष्मा को अवशोषित या विमुक्त कर सकता है। 2. केल्विन पैमाने पर व्यक्त किया जाने वाला तापमान निरपेक्ष तापमान (Absolute temperature) कहलाता है, और इस पैमाने पर 'त्रिक बिंदु' (Triple point) वह स्थिति है जहाँ जल की तीनों अवस्थाएँ (ठोस, द्रव और गैस) तापीय साम्यावस्था में सह-अस्तित्व में रहती हैं। 3. रुद्धोष्म प्रक्रिया (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान हो सकता है, बशर्ते कि निकाय की कुल आंतरिक ऊर्जा नियत बनी रहे। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? मानव रोगों, उनके संचरण के माध्यमों, रोगजनकों (Pathogens) और उनके नैदानिक परीक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'ट्यूबरकुलोसिस' (तपेदिक) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु के कारण होता है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, और इसके निदान के लिए किया जाने वाला 'माउंटॉक्स परीक्षण' (Mantoux test) एक प्रकार का त्वचा परीक्षण है जो सेल-मीडिएटेड इम्युनिटी पर आधारित होता है। 2. 'एड्स' (AIDS) उत्पन्न करने वाला एचआईवी (HIV) एक रेट्रोवायरस है जिसमें आनुवंशिक पदार्थ के रूप में द्वि-रज्जुक आरएनए (Double-stranded RNA) पाया जाता है, जो संक्रमण के पश्चात होस्ट कोशिकाओं के रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइम का उपयोग करके डीएनए का संश्लेषण करता है। 3. 'मलेरिया' प्लासमोडियम प्रजाति के परजीवी के कारण होता है, जिसमें प्लासमोडियम फाल्ciparum सबसे गंभीर प्रकार का मलेरिया उत्पन्न करता है और यह मस्तिष्क को प्रभावित करके 'सेरेब्रल मलेरिया' का कारण बन सकता है, जिसका वाहक मादा एनाफिलिस मच्छर होता है। 4. 'टाइफाइड' साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु जनित रोग है, जिसकी पुष्टि के लिए 'विडाल परीक्षण' (Widal test) किया जाता है, जो रोगी के सीरम में मौजूद एंटीबॉडी और जीवाणु के एंटीजन के बीच प्रति-अवक्षेपण या संकोचलन (Agglutination) प्रतिक्रिया पर आधारित होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? कृत्रिम उपग्रहों और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा (यांत्रिक ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो उसकी गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग होती है। 2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की परिक्रमण अवधि ठीक 24 घंटे होती है और यह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर पूर्व से पश्चिम की ओर अपनी कक्षा में चक्कर लगाता है। 3. जब कोई उपग्रह अपनी कक्षा से थोड़ा सा ऊपर उठाया जाता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ जाती है, किंतु केप्लर के नियमों के अनुसार उसकी कक्षीय चाल (Orbital speed) कम हो जाती है। 4. भारहीनता की स्थिति में उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल शून्य हो जाता है, जिसके कारण वहाँ वस्तुओं का प्रभावी भार शून्य महसूस होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम, एंट्रॉपी (Entropy) और विभिन्न तापमापी पैमानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम स्पष्ट करता है कि किसी भी स्वतः स्फूर्त (Spontaneous) प्रक्रम में ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी हमेशा बढ़ती है, और आदर्श रूप से उत्क्रमणीय (Reversible) प्रक्रम में कुल एंट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है। 2. केल्विन ताप पैमाने पर तापमान की परिभाषा ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम पर आधारित होती है, और इस पैमाने पर किसी वस्तु का ऋणात्मक तापमान संभव है क्योंकि कार्नोट इंजन की दक्षता 100% से अधिक हो सकती है। 3. जब किसी गैस का रुद्धोष्म (Adiabatic) स्वतंत्र प्रसार (Free expansion) निर्वात में किया जाता है, तो गैस द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता और न ही कोई ऊष्मा बाहर से दी जाती है, किंतु इस अप्रतिवर्ती प्रक्रम के कारण गैस की एंट्रॉपी में वृद्धि होती है। 4. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी और गैस तापमापी दोनों ही तापमान मापन के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिसमें स्थिर आयतन गैस तापमापी को उसके अत्यधिक व्यापक कार्यक्षेत्र और उच्च यथार्थता के कारण प्राथमिक मानक तापमापी माना जाता है, जिसका विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? नाभिकीय भौतिकी और रेडियोएक्टिवता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी रेडियोएक्टिव तत्व की अर्ध-आयु (Half-life) उस समयाराश के बराबर होती है जिसमें परमाणु नाभिकों की प्रारंभिक संख्या घटकर अपनी मूल संख्या की आधी रह जाती है, और यह अर्ध-आयु काल उस तत्व के रेडियोएक्टिव क्षय नियतांक (Decay Constant) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। 2. 'द्रव्यमान क्षति' (Mass Defect) किसी नाभिक के वास्तविक कुल द्रव्यमान और उसके व्यक्तिगत प्रोटॉनों व न्यूट्रॉनों के द्रव्यमानों के योग के बीच का अंतर है, और यही द्रव्यमान क्षति अल्बर्ट आइंस्टीन के संबंध $E=mc^2$ के अनुसार नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Nuclear Binding Energy) में परिवर्तित होती है। 3. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया में यूरेनियम-235 पर जब एक धीमा न्यूट्रॉन आघात करता है, तो यह अस्थिर यूरेनियम-236 बनाता है जो लगभग समान आकार के दो छोटे नाभिकों में टूट जाता है, तथा इस प्रक्रिया में प्रति विखंडन औसत रूप से 2 से 3 तीव्र न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। 4. सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च तापमान और दाब पर चार हाइड्रोजन नाभिक मिलकर एक हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और इस संलयन प्रक्रिया के दौरान द्रव्यमान में होने वाली मामूली क्षति ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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