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History of India
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बाजीराव प्रथम और हैदराबाद के निजाम के बीच 1728 ई. में कौन सा युद्ध हुआ था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1728 में पालखेड़ का युद्ध लड़ा गया था।
Related Questions
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मुगल कालीन प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत बिना जात पद बढ़ाए अपने आश्वस्त सैनिकों की संख्या बढ़ाने के लिए 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (Du-aspa Sih-aspa) प्रणाली की शुरुआत की गई थी।
2. शाहजहाँ के शासनकाल में कृषि और भूमि के क्षेत्रफल के वास्तविक आकलन के लिए 'जब्ती प्रणाली' को और अधिक कठोर बनाते हुए 'माहवार' (Month-scale) और 'खलसा' भूमि के प्रबंधन में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किए गए थे।
3. औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो जाने के कारण उन्हें वेतन भुगतान के लिए पर्याप्त 'जागीरें' उपलब्ध नहीं हो पा रही थीं, जिसे इतिहास में 'जागीर संकट' (Jagir Crisis) कहा जाता है।
4. मुगल साम्राज्य के केंद्रीय वित्त विभाग का प्रमुख 'मीर बख्शी' होता था, जो न केवल सैन्य प्रशासन और सैनिकों के वेतन का भुगतान करता था बल्कि साम्राज्य के समस्त आय-व्यय के लेखा-जोखा का सर्वोच्च अधिकारी भी होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध के समय भारत का गवर्नर जनरल कौन था?
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सिंधु घाटी सभ्यता की धार्मिक मान्यताओं, मुहरों (Seals) और पाषाण/मृण्मूर्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रसिद्ध 'पशुपति मुहर' (Pashupati Seal) पर एक त्रिमुख देवता को योगमुद्रा में बैठा हुआ दिखाया गया है, जिनके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा तथा सिंहासन के नीचे दो हिरण विराजमान हैं, जिसे जॉन मार्शल ने आद्य-शिव (Proto-Shiva) के रूप में पहचाना है।
2. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग मातृदेवी (Mother Goddess) की उपासना बड़े पैमाने पर करते थे, जिसके साक्ष्य टेराकोटा की कई स्त्री मृण्मूर्तियों से मिलते हैं, परंतु इस सभ्यता में किसी भी प्रकार के भव्य मंदिरों या संगठित पुरोहित वर्ग के स्पष्ट और अकाट्य प्रमाण नहीं मिले हैं।
3. लोथल और कांबी से प्राप्त अग्निकुंडों (Fire Altars) के अवशेष यह दर्शाते हैं कि सैंधव वासी यज्ञ या अग्नि-पूजा जैसी अनुष्ठानिक परंपराओं से परिचित थे, और वे लिंग तथा योनि की पूजा भी करते थे, जिसके साक्ष्य हड़प्पा स्थलों से मिले प्रचुर पाषाण छल्लों से मिलते हैं।
4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे के अस्त्र-शास्त्रों और सोने के सिक्कों के उपयोग से भली-भांति परिचित थे, तथा उन्होंने मिस्र की सभ्यता की तरह अपने शासकों के शवों को दफनाने के लिए विशाल पिरामिडनुमा मकबरों का निर्माण करवाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दीन-ए-इलाही के संस्थापक कौन थे?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह द्वारा किया गया था, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, और उनके सैन्य अभियान को अंततः ब्रिटिश अधिकारी जनरल कैंपबेल द्वारा पूरी तरह कुचल दिया गया था।
2. रोहेलखंड के मुख्य केंद्र बरेली में खान बहादुर खान ने रोहिला सेना का गठन कर स्वयं को नवाब घोषित किया था, किंतु कर्नल जोन्स और सर कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने इस विद्रोह का अत्यंत दमनकारी ढंग से अंत कर दिया।
3. इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह की कमान संभाली थी, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सेनापति कर्नल नील द्वारा पराजित कर इस सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर पर पुनः अंग्रेजों का अधिकार स्थापित किया गया था।
4. इन तीनों केंद्रों पर विद्रोह के दमन के पश्चात खान बहादुर खान को बरेली में ही सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी, जबकि लियाकत अली को युद्ध के दौरान ही मार गिराया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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