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Child Development
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सिग्मंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत (Psychoanalytic Theory) और मनो-लैंगिक विकास के चरणों के संदर्भ में, जब कोई बालक 'गुदा अवस्था' (Anal Stage) से गुजर रहा होता है, तो इस अवस्था के दौरान फ्रायड द्वारा प्रतिपादित 'मलत्याग प्रशिक्षण' (Toilet Training) की अति-कठोर या अति-उदार विधियों का बालकों के वयस्क व्यक्तित्व पर क्या दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है, और इसके परिणामस्वरूप कौन-से विशिष्ट व्यक्तित्व लक्षण (Personality Traits) विकसित हो सकते हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'गुदा अवस्था' (Anal Stage) लगभग 1.5 से 3 वर्ष की आयु तक होती है, जिसमें आनंद का मुख्य केंद्र गुदा क्षेत्र होता है। इस दौरान माता-पिता द्वारा दिया जाने वाला 'मलत्याग प्रशिक्षण' (Toilet Training) बच्चे के मनोवैज्ञानिक विकास में निर्णायक भूमिका निभाता है। यदि प्रशिक्षण अत्यधिक कठोर (Punitive/Rigid) होता है, तो बच्चा 'गुदा-धारण' (Anal Retentive) व्यक्तित्व विकसित कर सकता है, जिसमें कंजूसी, अत्यधिक जिद, सफाई और व्यवस्था के प्रति अति-संवेदनशीलता पाई जाती है। इसके विपरीत, अति-उदार प्रशिक्षण से 'गुदा-निष्कासन' (Anal Expulsive) व्यक्तित्व बनता है जो लापरवाह, अव्यवस्थित और विद्रोही स्वभाव का होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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