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Child Development
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अंतर्गत, 'पूर्व-रूढ़िगत नैतिकता का स्तर' (Pre-Conventional Level) के प्रथम चरण यानी 'सजा और आज्ञाकारिता अभिविन्यास' (Punishment and Obedience Orientation) और द्वितीय चरण यानी 'सापेक्षवादी या उपकरणवादी अभिविन्यास' (Instrumental Relativist Orientation) के बीच का सबसे बुनियादी और तात्विक मनोवैज्ञानिक अंतर निम्नलिखित में से कौन-सा है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, पूर्व-रूढ़िगत नैतिकता के स्तर (Pre-Conventional Level) का पहला चरण 'सजा और आज्ञाकारिता अभिविन्यास' है, जहाँ बच्चे का व्यवहार पूरी तरह से दंड से बचने और सत्ता या शक्ति के आगे झुकने से तय होता है। इसके विपरीत, इसी स्तर का दूसरा चरण 'सापेक्षवादी या उपकरणवादी अभिविन्यास' (जिसे 'लेखा-जोखा या आदान-प्रदान का अभिविन्यास' भी कहते हैं) इस विचार पर आधारित होता है कि 'वही सही है जो निष्पक्ष हो या जिसमें आपसी आदान-प्रदान और व्यक्तिगत आवश्यकताओं की संतुष्टि शामिल हो'। इस विषय पर अधिक विस्तार से जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं।
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'पूर्व-रूढ़िगत नैतिकता' (Pre-conventional Morality) के दूसरे चरण—यानी 'साधनवादी सापेक्षतावादी अभिविन्यास' या 'आपसी आदान-प्रदान का चरण' (Instrumental Relativist Orientation / Tit for Tat, चरण 2)—की दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस चरण के केंद्रीय स्वरूप को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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बाल केंद्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा (Child-Centric and Progressive Education) के दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक आधारों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, जॉन डीवी (John Dewey) द्वारा प्रतिपादित 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत तथा प्रगतिशील कक्षाओं की संरचना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है?
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अधिगम मनोविज्ञान में 'अधिगम के वक्र' (Learning Curves), 'अधिगम के पठार' (Plateaus of Learning) और 'अधिगम स्थानांतरण' (Transfer of Learning) के तात्विक एवं वैज्ञानिक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई शिक्षार्थी किसी जटिल कौशल को सीखते समय प्रारंभिक चरणों में मंद गति से प्रगति करता है और बाद में उसकी गति तीव्र हो जाती है (जिसे 'उन्नतोदर या अवतल वक्र' यानी Concave Curve कहा जाता है), इसके साथ ही यदि अभ्यास के दौरान एक निश्चित बिंदु पर उसकी निष्पत्ति में पूर्ण ठहराव आ जाता है जिसे मानसिक थकान, प्रेरणा की कमी या गलत विधियों के कारण उत्पन्न 'पठार' माना जाता है, तथा अंत में वह अपने पूर्व-अर्जित ज्ञान का अनुप्रयोग किसी सर्वथा भिन्न परिस्थिति में तार्किक सादृश्यता के आधार पर करता है; तो इन तीनों मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं और उनके अंतर्निहित कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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शिक्षक को कक्षा में 'व्यक्तिगत भिन्नताओं' (Individual Differences) को कैसे समझना चाहिए?
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सिग्मंड फ्रायड (Sigmund Freud) द्वारा प्रतिपादित मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के विभिन्न चरणों और व्यक्तित्व संरचना (इदम, अहम्, और पराहम्) के अंतर्संबंधों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, 'फालिक अवस्था' (Phallic Stage, लगभग 3 से 6 वर्ष) के दौरान उत्पन्न होने वाली 'इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स' (Electra Complex) और 'ओडिपस कॉम्प्लेक्स' (Oedipus Complex) की संकल्पनाओं तथा 'तादात्मीकरण' (Identification) की रक्षा युक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है?
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