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History of India
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मुगल काल में समुद्री व्यापार पर नियंत्रण के लिए मुगलों ने मुख्य रूप से किस पर निर्भरता दिखाई?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मुगल नौसेना कमजोर थी, इसलिए वे पुर्तगाली कार्टाज पर निर्भर थे।
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उदय की प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें से अधिकांश महाजनपद उत्तर भारत के गंगा के मैदान और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित थे और इनमें वज्जी तथा मल्ल जैसे महाजनपद गणतंत्रात्मक व्यवस्था (गण/संघ) के अंतर्गत आते थे।
2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष का मुख्य भौगोलिक कारण इसकी राजधानी राजगीर (गिरिव्रज) का पाँच पहाड़ियों से घिरा होना और इसकी सामरिक स्थिति थी, तथा बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से यह गंगा और सोन जैसी प्रमुख नदियों के जलमार्गों के माध्यम से व्यापारिक और सैन्य नियंत्रण में अत्यधिक सुदृढ़ हो गया।
3. हर्यंक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई, और कौशल, मल्ल तथा लिच्छवि राजवंशों की राजकुमारियों से विवाह कर अपनी स्थिति मजबूत की, तथा अवध के राजा प्रद्योत के बीमार पड़ने पर अपने राजवैद्य जीवक को उनकी सेवा में भेजा था।
4. शिशुनाग वंश के संस्थापक शिशुनाग ने प्रतापी शासक के रूप में अवध साम्राज्य को पूरी तरह मगध में मिला लिया और अपनी विजयों के क्रम में वत्स तथा कौशल को भी मगध साम्राज्य का अभिन्न अंग बना दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में संचालित स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोकागार दिवस' (असंतोष एवं शोक दिवस) के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, एक-दूसरे के हाथों पर राखियाँ बांधी और 'बंदे मातरम' गीत गाते हुए जुलूस निकाले।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, जिसके पहले अध्यक्ष प्रख्यात न्यायविद् रास बिहारी घोष बनाए गए थे।
4. इस आंदोलन के दौरान उग्रवादी नेताओं (लाल-पाल-बाल और अरविंद घोष) ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखने पर जोर दिया, ताकि ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाकर विभाजन के निर्णय को तुरंत वापस लिया जा सके और अखिल भारतीय स्तर पर इसके विस्तार का कड़ा विरोध किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिसके परिणामस्वरूप अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था और बाद में अंग्रेजों ने पीर अली को सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया था।
2. दानापुर (Dinapur) छावनी के 7th, 8th और 40th नेटिव इन्फैंट्री के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा पहुंचकर बाबू कुंवर सिंह से जुड़ गए, जिन्होंने इस संयुक्त सेना का नेतृत्व संभाला।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का नेतृत्व स्थानीय जमींदारों और यूरोपीय विरोधी तत्वों ने किया था, जहाँ मोहम्मद हुसैन खां और वाजिद अली जैसे नेताओं ने अंग्रेजों के संचार साधनों और प्रशासनिक चौकियों को नष्ट कर दिया था।
4. तिरहुत और छपरा क्षेत्र में कमिश्नर विलियम टेलर और मेजर विंसेंट आयर ने अत्यधिक नरमी की नीति अपनाते हुए विद्रोही नेताओं के साथ समझौता किया और उन्हें बिहार की प्रांतीय सरकार में मंत्री पद की पेशकश की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में पाटलिपुत्र नगर प्रशासन का विस्तृत विवरण दिया है, जिसके अनुसार नगर का शासन तीस सदस्यों की एक परिषद द्वारा संचालित किया जाता था जिसे छह उप-समितियों में विभाजित किया गया था।
2. सम्राट अशोक के धम्म की नीति केवल बौद्ध धर्म के धार्मिक सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार तक सीमित थी, और उसने अपने अभिलेखों में कभी भी अन्य संप्रदायों या ब्राह्मणों और श्रमणों के प्रति सहिष्णुता का उपदेश नहीं दिया।
3. मौर्यकालीन केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में राजा की सहायता के लिए मंत्रिपरिषद होती थी, जिसके सदस्यों को 'तीर्थ' कहा जाता था और अर्थशास्त्र के अनुसार इनकी कुल संख्या अठारह थी।
4. अशोक के शासनकाल में आयोजित 'तृतीय बौद्ध संगीति' का मुख्य उद्देश्य बौद्ध संघ में आए मतभेदों को दूर करना और बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों को संकलित कर 'अभिधम्म पिटक' का संकलन करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था, न्याय प्रणाली और आर्थिक नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य प्रशासन में 'अध्यक्ष' विभिन्न विभागों के प्रमुख होते थे, जैसे कि 'सुवर्णध्यक्ष' स्वर्ण और खान विभाग का प्रमुख था, जबकि 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य और व्यापार पर नियंत्रण रखता था।
2. अशोक के धम्म महामात्रों की नियुक्ति केवल धार्मिक प्रचार के लिए की गई थी, और उन्हें किसी भी प्रकार के न्यायिक अधिकार या समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विवाद सुलझाने की शक्ति नहीं दी गई थी।
3. मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में दीवानी न्यायालय को 'धर्मस्थीय' और फौजदारी न्यायालय को 'कंटकशोधन' कहा जाता था, तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार राज्य समाज विरोधी तत्वों और भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ा नियंत्रण रखता था।
4. मौर्य साम्राज्य में भूमि कर (भाग) उपज का एक-छठा से लेकर एक-चौथाई भाग तक वसूला जाता था, और सिंचाई की व्यवस्था करने के लिए राज्य द्वारा 'सेतुबंध' (बांधों और नहरों) का निर्माण कराया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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