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Child Development
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सिग्मंड फ्रायड द्वारा प्रतिपादित मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के विभिन्न चरणों—विशेषकर 'गुदा अवस्था' (Anal Stage) और 'फैलिस अवस्था' (Phallic Stage)—तथा इनसे जुड़े मनोवैज्ञानिक घटनाक्रम जैसे 'ओडिपस कॉम्प्लेक्स' (Oedipus Complex) और 'इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स' (Electra Complex) की तात्विक और गत्यात्मक संरचना का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, यदि कोई बालक या बालिका इन चरणों के दौरान अनुचित पालन-पोषण या अत्यधिक लाड़-प्यार/कड़ाई के कारण 'स्थिरीकरण' (Fixation) का शिकार हो जाता है, तो फ्रायड के इस सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?

Detailed Explanation

सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत के अनुसार, विकास के विभिन्न चरण व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 'गुदा अवस्था' (Anal Stage) के दौरान मलत्याग के नियंत्रण से संबंधित प्रशिक्षण (Toilet Training) का बच्चों के मनोविज्ञान पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यदि माता-पिता बहुत अधिक कठोरता बरतते हैं, तो बालक 'एनल-रिटेंटिव' (Anal-retentive) बन जाता है, जिससे उसमें अत्यधिक कंजूसी, अत्यधिक व्यवस्था (Orderliness) और जिद्दीपन जैसे गुण विकसित होते हैं। इसके विपरीत, बहुत अधिक ढील देने पर 'एनल-एक्सपल्सिव' व्यक्तित्व बनता है। इसके अतिरिक्त, ओडिपस कॉम्प्लेक्स बालकों में (न कि बालिकाओं में) पाया जाता है जहाँ वे अपनी माँ के प्रति आकर्षित होते हैं, जबकि बालिकाओं में 'इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स' होता है। सुप्त अवस्था में कामुक ऊर्जा सुप्त रहती है, और जननांग अवस्था (Genital Stage) अंतिम चरण है। इस सिद्धांत के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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